
रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड की जीवनरेखा मानी जाने वाली सोनाडुब्बी नदी को लेकर एक बड़ा और गंभीर पर्यावरणीय मामला सामने आया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) प्रधान पीठ नई दिल्ली ने रांची जिले में सोनाडुब्बी नदी पर कथित अतिक्रमण और प्रदूषण के खिलाफ दायर शिकायत पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने की।
यह मामला 17 जुलाई 2025 को पंजीकृत हुआ था। सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ता मनोज कुमार द्वारा सार्वजनिक शिकायत पोर्टल के माध्यम से दायर शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एमएस मोनेट डेनियल कोल वाशरी प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधन द्वारा सोनाडुब्बी नदी के भूभाग पर अवैध अतिक्रमण किया जा रहा है।
शिकायत के अनुसार नदी के भीतर 12 अवैध पिलर खड़े कर दिए गए हैं और रसायन युक्त कोयला अपशिष्ट सीधे नदी में बहाया जा रहा है, जिससे जल, पर्यावरण और स्थानीय जनजीवन को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
चूंकि मामला झारखंड राज्य से जुड़ा है, इसलिए एनजीटी ने इसे अब अपनी पूर्वी क्षेत्रीय पीठ कोलकाता को स्थानांतरित कर दिया है, जहां इसकी अगली सुनवाई 25 फरवरी को निर्धारित की गई है।
शिकायत में बताया गया है कि सोनाडुब्बी नदी, दामोदर नदी की एक महत्वपूर्ण सहायक नदी है और खलारी क्षेत्र के तीन से चार गांवों के हजारों ग्रामीणों के लिए पेयजल, सिंचाई और आजीविका का प्रमुख स्रोत है।
आरोप है कि अंचल अधिकारी, खलारी तथा उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची द्वारा अतिक्रमण हटाने के आदेश तो दिए गए, लेकिन बाद में लगाए गए स्थगन आदेश के कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। नतीजतन, नदी की स्थिति दिन-ब-दिन और अधिक चिंताजनक होती जा रही है।
इस गंभीर मामले को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को पारित अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि अतिक्रमण से संबंधित मामला रांची उपायुक्त के समक्ष लंबित है और इसे शीघ्र निपटाया जाना आवश्यक है।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि खलारी अंचल कार्यालय की जांच में यह तथ्य सामने आया है कि एमएस मोनेट डेनियल कोल वाशरी द्वारा लगभग 1800 फीट लंबे हिस्से में सोनाडुब्बी नदी की भूमि पर अतिक्रमण किया गया है और नदी के ऊपर 12 पिलर का निर्माण कराया गया है।
हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल को निर्धारित की गई है। पर्यावरणविदों और स्थानीय ग्रामीणों को उम्मीद है कि एनजीटी और हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सोनाडुब्बी नदी को अतिक्रमण और प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
स्रोतः एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क के लिए मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स





