रोहतासः महज 13 घंटा में यूं धाराशाही हो गया 13 करोड़ का रोप-वे
रोहतास (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार के रोहतास जिले में लगभग ₹13 करोड़ रुपये की लागत से बन रही रोप-वे परियोजना का सपना तब टूट गया जब यह ट्रायल रन के दौरान ही धराशायी हो गया। यह रोपवे ऐतिहासिक रोहतासगढ़ किला और चौरासन मंदिर जैसी प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुँच को आसान बनाने के उद्देश्य से बनाया जा रहा था, लेकिन 13 घंटे भी नहीं चल पाने के बाद यह जमीन पर गिर गया, जिससे परियोजना पर कई सवाल उठने लगे हैं।
कहा जाता है कि रोपवे का ट्रायल किया जा रहा था, जिसमें केबल-कार केबिन खाली चलाई जा रही थी। लेकिन टॉवर पिलर और ट्रॉली अचानक गिर गए और पूरा ढांचा धराशायी हो गया। अधिकारियों ने पुष्टि की कि टेस्ट के समय किसी में सवारी नहीं थी, जिससे किसी प्रकार की जनहानि टल गई।
रोपवे को रोहतास ब्लॉक से रोहतासगढ़ किला तथा रोहितेश्वर धाम जैसी ऊँची पहाड़ियों तक यातायात को सरल बनाने के लिए बनाया जा रहा था। वर्तमान में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किले तक पहुँचने के लिए कठिन रास्तों से होकर जाना पड़ता है, जबकि रोपवे इसे मिनटों में आसान बना सकता था।
प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि परीक्षण के दौरान एक पिलर भार सहन नहीं कर पाया और वायर में फँसी समस्या के कारण कई पिलर और केबिन जमीन पर गिर गए। इससे निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर सीधा सवाल खड़ा हुआ है।
स्थानीय नेताओं और विपक्षी दलों ने भी भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी जैसे आरोप लगाते हुए अधिकारियों को घेरा है, यह बताते हुए कि परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ा है।
घटना के बाद राज्य पुल निर्माण निगम के निदेशक द्वारा डिज़ाइन और गुणवत्ता ऑडिट का आदेश दिया गया है, और उच्चस्तरीय समिति को पूरी जांच रिपोर्ट जल्दी से प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारी स्पष्ट कर चुके हैं कि रोपवे आम जनता के लिए तब तक नहीं खोला जाएगा, जब तक सभी सुरक्षा पूर्वापेक्षाएँ पूरी नहीं हो जातीं।
स्थानीय लोग और पर्यटन व्यवसायी इस दुर्घटना से निराश हैं, क्योंकि यह परियोजना किले और आसपास के पर्यटन स्थलों के लिए नए सिरे से पर्यटन विकास का मार्ग खोलने वाली थी। कई लोगों ने निर्माण में जल्दबाज़ी, लापरवाही और जवाबदेही की कमी के प्रति चिंता व्यक्त की है।
बहरहाल, ₹13 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का ट्रायल के दौरान ही धड़ाम हो जाना न सिर्फ तकनीकी और प्रबंधन के मुद्दों को उजागर करता है, बल्कि बुनियादी ढांचा विकास में गुणवत्तापूर्ण नियंत्रण की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट और जिम्मेदारों के खिलाफ उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।





