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    Monday, July 22, 2024
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      दानियावां बाजार के ऐसे जांच लैब की लापरवाही कहीं बन न जाए मौत का करण

      दनियावां (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। पटना जिले के दानियावां बाजार स्थित श्रीराम अल्ट्राउंड एंड  कलर डॉप्पलर सेंटर में कुछ दिन पूर्व एक प्रसूति महिला के ब्लड जाँच का रिपोर्ट गलत दिया गया।

      Negligence of such testing lab of Daniyawan market should not become the cause of death 3विगत 1 सितंबर को छोटी केवई के अजय मांझी की पत्नी जुली देवी इस सेंटर में जांच के लिए पहुंची।  इनके रिपोर्ट के मुताबिक रक्त समूह A+ थी, जिसका जांच आइडी – 20220901002 है।

      श्रीमति जुली देवी इसके बाद 12 दिसम्बर को एनएससीएच में  डा. इंदु कुमारी के यूनिट में एडमिट हुई, जिसका रजिस्ट्रेशन संख्या-  0/4063/22 है।  वहाँ उक्त मरीज के डिलीवरी हेतु अतिरिक्त ब्लड जरूरत के लिए ब्लड बैंक पहुंचे। वहाँ पुनः ब्लड ग्रुप की जांच की गई तो रक्त समूह O+ पाया गया।

      जबकि पूर्व के जांच रिपोर्ट श्री राम लैब के अनुसार A+ होने के करण इलाज में लगे डॉक्टर व चिकित्सक कर्मचारियों के बीच संशय कि स्थिति के करण काफ़ी परेशानी हुई।

      फिर एक बार अस्पताल के बाहर रत्नेश्वर पैथो लैब के जांच उपरांत समस्या हल हुआ जहाँ O+ ही पाया गया। इसके अलवा माँ डायगनोस्टिक सेंटर दानियावां का रिपोर्ट भी O+ रहा।

      जब यह बात श्री राम लैब को रोगी के परिवार ने बताया तो वह गलती स्वीकार करने को तैयार नही है।  परिवार के सदस्य कोसते हुए यह कह रहे हैं कि  श्रीराम के नाम से लैब चलाते हैँ  और ठीक ठाक को भी राम नाम सत्य करने का भी काम करते हैँ ।

      Negligence of such testing lab of Daniyawan market should not become the cause of death 1इस संबंध में जब श्रीराम अल्ट्राउंड एंड  कलर डॉप्पलर सेंटर के मोबाईल पर जानकारी चाही तो पहले उधर से से हेलो-हेलो कहकर काट दिया गया। बाद में घंटी उठाना मुनासिब नहीं समझा। इस कारण इस खबर में उनका पक्ष नहीं रखा जा रहा है।

      बहरहाल, यह काफ़ी गंभीर मामला है। ऐसी लापरवाही एक गंभीर अपराध है, क्योंकि पेशेवरों को डॉक्टरों को उनके क्षेत्र में विशेषज्ञ माना जाता है और किसी भी मरीज को जो चिकित्सक द्वारा दौरा किया जाता है या ठीक किया जाता है या ठीक होने या बेहतर होने की उम्मीद करता है।

      एक डॉक्टर को अपने कर्तव्यों का पालन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि उसकी लापरवाही से रोगी को सीधे नुकसान हो सकता है और यह जीवन और मृत्यु का मामला भी हो सकता है।

       

       

       

       

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