मार्च में सर्दियों जैसा नजारा! बारिश-आंधी के बाद झारखंड में घना कुहासा, हाईवे पर थमी रफ्तार

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। मार्च का महीना आमतौर पर गर्मी की शुरुआत का संकेत देता है, लेकिन इस बार मौसम ने झारखंड में लोगों को चौंका दिया है। बारिश, आंधी और तेज हवाओं के बाद रांची समेत कई इलाकों में ऐसा घना कुहासा छा गया है, जैसा आमतौर पर दिसंबर-जनवरी में देखने को मिलता है।

तस्वीरों में आप साफ देख सकते हैं कि हाईवे पर दृश्य इतना धुंधला दिख रहा है कि कुछ मीटर दूर खड़ा व्यक्ति तक साफ नजर नहीं आ रहा है और ट्रकों की रफ्तार लगभग रेंगती हुई दिख रही है।

मौसम विभाग की ताज़ा चेतावनी से मिल रहा संकेतः भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की हालिया प्रेस रिलीज में भी बताया गया है कि मार्च के बीच से लेकर आख़िरी सप्ताह तक देश के कई हिस्सों में अचानक मौसम बदल सकता है। 16 मार्च 2026 की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी भारत में गरज-चमक, तेज हवाएं और ओलावृष्टि जैसी स्थिति बनने की संभावना जताई गई थी, जिसमें झारखंड भी शामिल था।

इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि बड़े पैमाने पर गरज-चमक के साथ आंधी-तूफान की गतिविधि के कारण सामान्य से कम तापमान रहने और मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है।

पूरे देश में दिख रहा है असामान्य मौसमः यह बदलाव सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है। ताज़ा राष्ट्रीय रिपोर्टों में भी बताया गया है कि मार्च में ही कई राज्यों में ठंड जैसा माहौल बन गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 21 मार्च 2026 को दिल्ली में तापमान सामान्य से काफी नीचे चला गया और बारिश के बाद सुबह का माहौल बिल्कुल सर्दियों जैसा हो गया।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के कई शहरों में तेज बारिश और तूफान के बाद तापमान 5 से 12 डिग्री तक गिर गया और मार्च का सबसे ठंडा दिन रिकॉर्ड हुआ।

हाईवे पर बढ़ा खतरा, सुबह की यात्रा सबसे मुश्किलः सड़क पर विजिबिलिटी 20–30 मीटर से ज्यादा नहीं दिख रही है। ट्रक और भारी वाहन बेहद धीमी गति से चल रहे हैं । विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का “पोस्ट-रेन फॉग” तब बनता है जब बारिश के बाद जमीन में नमी ज्यादा हो और रात में तापमान अचानक गिर जाए।

आखिर मार्च में कुहासा क्यों? मौसम विशेषज्ञ इस बदलाव के पीछे तीन मुख्य कारण बता रहे हैं। पश्चिमी विक्षोभ के कारण अचानक बारिश और आंधी आना है। जमीन की नमी बढ़ने से सुबह धुंध बनना है। तापमान का तेजी से गिरना है। हवा की रफ्तार कम होने से कुहासा देर तक बना रहना है। यही वजह है कि मार्च में भी लोगों को दिसंबर-जनवरी जैसा मौसम देखने को मिल रहा है।

बदलता मौसम क्या बड़ा संकेत है? मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। पहले मार्च में लू की शुरुआत हो जाती थी, लेकिन अब उसी महीने में बारिश, आंधी, ओले और घना कुहासा देखने को मिल रहा है।

अगर यही स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में ट्रैफिक पर असर बढ़ सकता है। फसलों को नुकसान हो सकता है और मौसम का कैलेंडर पूरी तरह बदल सकता है

बहरहाल आज की तस्वीर बदलते मौसम चक्र की सच्चाई भी दिखा रही हैं। मार्च में इस तरह का घना कुहासा आम बात नहीं है और यही वजह है कि यह स्थिति लोगों के लिए हैरान करने वाली भी है और चिंताजनक भी।

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