रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड सरकार के ऊर्जा विभाग में कथित रूप से 160 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) गायब होने का मामला सामने आया है। पूर्व मंत्री और भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता सरयू राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह दावा किया है कि विभाग ने यह FD केनरा बैंक और एक अन्य बैंक में जमा की थी, लेकिन परिपक्वता तिथि पर जब अधिकारी निकासी के लिए पहुंचे, तो बैंकों ने बताया कि उनके पास विभाग की कोई FD शेष नहीं है। राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इसकी जांच कराने की मांग की है।
यह आरोप ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी विभागों में वित्तीय अनियमितताओं के कई मामले पहले से ही चर्चा में हैं। हाल के महीनों में ऊर्जा विभाग से जुड़े खातों में फर्जी निकासी और धन हस्तांतरण के मामले सामने आए हैं।
उदाहरण के लिए अक्टूबर 2024 में ऊर्जा उत्पादन निगम और पर्यटन विभाग के कुल 107 करोड़ रुपये फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए गए थे, जिसके बाद चार लोगों को हिरासत में लिया गया।
इसी तरह ऊर्जा विभाग के खाते से 100 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी का मामला सामने आया, जिसमें एटीएस ने जांच की और लगभग 1.30 करोड़ रुपये जब्त किए। एक अन्य घटना में केनरा बैंक से जुड़े ऊर्जा विभाग के खाते से 44 करोड़ रुपये गायब होने की खबर आई, जिससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया।
सरयू राय के पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने जोर पकड़ा है। कई यूजर्स ने इसे राज्य की वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए देखा है। एक यूजर ने लिखा कि यह बहुत गंभीर मामला है, बैंकों की लापरवाही भी साफ नजर आ रही है।
वहीं, भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि ऊर्जा विभाग में पहले 107 करोड़ के घपले की जांच चल रही है और अब 160 करोड़ का यह नया मामला केंद्र सरकार की सहायता के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है।
झारखंड सरकार की ओर से अभी इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह दावा सत्य साबित होता है, तो यह साइबर फ्रॉड या आंतरिक साजिश का मामला हो सकता है, जैसा कि हाल के वर्षों में राज्य में देखा गया है। 2024 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने झारखंड में अवैध खनन से जुड़े मामलों में 36 करोड़ रुपये जब्त किए थे, जिसमें मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि का नाम भी जुड़ा था।
राज्य में वित्तीय अनियमितताओं का सिलसिला जारी है। CAG की 2023 की रिपोर्ट में भी छात्रवृत्ति और पेंशन में 1.17 करोड़ की धोखाधड़ी का जिक्र था। हाल ही में जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, जहां भाजपा ने 30 करोड़ के फर्जी बैंक गारंटी के जरिए अनियमितता का दावा किया। मनरेगा में भी 2025-26 में 302 करोड़ की अनियमितताएं पाई गईं।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए, जिसमें बैंक रिकॉर्ड्स, विभागीय लेन-देन और साइबर फॉरेंसिक शामिल हों। यदि साबित हुआ, तो यह झारखंड की सरकारी वित्तीय प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा। फिलहाल, मुख्यमंत्री कार्यालय से जांच की मांग पर कोई अपडेट नहीं है।
स्रोतः एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क के लिए मुकेश भारतीय की रिपोर्ट
