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    Monday, July 22, 2024
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      झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश पर बिहार निवासी JPSC के 2 अभ्यर्थी को बनाया उप समाहर्ता

      “मूल निवासी बिहार के होने के कारण उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं देने के कारण नियुक्त नहीं किया गया था, लेकिन हाइकोर्ट के आदेश के बाद अब 12 साल बाद इनकी नियुक्ति की गयी…

      रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)।  झारखंड प्रशासनिक सेवा में दो अभ्यर्थी अखिलेश प्रसाद व मनोज कुमार की नियुक्ति की हरी झंडी सरकार ने दे दी है।

      ये अधिकारी झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शामिल हुए थे और इसमें उत्तीर्ण भी हुए और नियुक्ति की अनुशंसा होने के बाद भी इन्हें नियुक्त नहीं किया गया था। इसकी वजह बिहार का मूल निवासी होना था,जिस वजह से आरक्षण की अनुमान्यता का लाभ झारखंड में नहीं दिया गया।

      ऐसे में दोनों अभ्यर्थियों ने हाइकोर्ट की शरण ली, जहां उनके पक्ष में आदेश पारित होने के बाद झारखंड सरकार ने उप समाहर्ता पद पर 20 अक्टूबर 2022 की तिथि से नियुक्त किया और प्रशिक्षण के लिए जिला आवंटित कर दिया है।

      इस संबंध में कार्मिक प्रशासनिक सुधार राजभाषा विभाग ने अधिसूचना जारी कर दिया है। दोनों अभ्यर्थी झारखंड में विभिन्न सेवाओं में कार्यरत भी हैं,इसके बाद जेपीएससी की परीक्षा पास किए थे।

      दरअसल, जेपीएससी द्वारा आयोजित द्वित्तीय, तृतीय एवं चतुर्थ सीमित प्रतियोगिता परीक्षा 2010 के आलोक में अखिलेश प्रसाद ने अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के रूप में भाग लिया।

      प्रतियोगिता परीक्षा में अनुसूचित जनजाति में चयनित एवं नियुक्त अंतिम उम्मीदवार के प्राप्तांक से अधिक रहने के बाद भी इनका चयन नहीं किए जाने के बाद अखिलेश प्रसाद ने उप समाहर्ता के पद पर नियुक्ति के लिए हाइकोर्ट में वाद दायर किया।

      यह बात सामने आयी कि एकिकृत बिहार में बीपीएससी की परीक्षा के माध्यम से अनुसूचित जनजाति गौंड जाति अंतर्गत चयनित होकर 24 जुलाई 1995 को सहकारिता पदाधिकारी के पद नियुक्त हुए। राज्य गठन के बाद वे झारखंड कैडर में आये।

      मूल रूप से बिहार निवासी होने के कारण अखिलेश प्रसाद को झारखंड में आरक्षण नहीं दिया गया है,जिस वजह से जेपीएससी की तीन परीक्षाओं में उनकी नियुक्ति नहीं हुई। अब हाइकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें अनुसूचित जनजाति कोटि में नियुक्त किया गया है और खूंटी जिला में पदस्थापित किया गया है।

      इसी तरह मनोज कुमार जेपीएससी 2010 की परीक्षा में भाग लिया और पिछड़ा वर्ग-1 कोटि में नियुक्ति के लिए अनुशंसा की गयी पर इनकी नियुक्ति उप समाहर्ता पद पर नहीं की गयी। मामला हाइकोर्ट गया।

      ये भी बीपीएससी की परीक्षा मे पास हुए थे ओर 1997 को सहकारिता विभाग में टंकक के रूप में नियुक्त हुए। झारखंड में अभी ये स्कूली शिक्षा विभाग में प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर है।

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