रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड में बुनियादी शिक्षा (फाउंडेशनल) की स्थिति खराब है। राज्य में निर्धारित उम्र सीमा के 100 में 38 बच्चे ही स्कूलों में प्री प्राइमरी से वर्ग दो तक एडमिशन करा रहे हैं।
पिछले तीन साल में बुनियादी शिक्षा में एडमिशन का प्रतिशत लगातार गिर रहा है। वर्ष 2022-23 में 40.5 फीसदी (सकल नामांकन अनुपात) विद्यार्थियों का एडमिशन फाउंडेशनल कोर्स में हुआ था। वर्ष 2024-25 में इसमें करीब तीन फीसदी की गिरावट हुई है।
वहीं, पिछले तीन साल में माध्यमिक (सेकेंडरी) शिक्षा के जीइआर में वर्ष 2022-23 की तुलना में करीब 10 फीसदी की वृद्धि हुई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की हाल में जारी रिपोर्ट में सकल नामांकन अनुपात (जीइआर) के आंकड़ों ने झारखंड में स्कूली शिक्षा की मिली- जुली तस्वीर पेश की है।
रिपोर्ट के अनुसार राज्य ने प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा के बीच नामांकन के अंतर को कम करने की दिशा में प्रगति तो की है, लेकिन फाउंडेशनल और सेकेंडरी स्तर पर अब भी काफी काम बाकी है।
आंकड़ों का विश्लेषण करें तो झारखंड ने प्रारंभिक स्तर (कक्षा तीन से पांच) में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इस स्तर पर राज्य का सकल नामांकन अनुपात 96.7 फीसदी है। यह दर्शाता है कि राज्य के लगभग सभी बच्चे प्राथमिक शिक्षा के दायरे में आ रहे हैं।
इस श्रेणी में लड़कियों का नामांकन (97.6 फीसदी) लड़कों (95.9 फीसदी) से बेहतर है। यह राज्य में बालिका शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता का प्रमाण है। जैसे ही बच्चे मिडिल स्कूल (कक्षा छह से आठ) की ओर बढ़ते हैं, नामांकन के ग्राफ में गिरावट देखी गयी है।
झारखंड में मिडिल स्तर पर जीइआर 83.1 फीसदी है। यहां भी छात्राओं (85.3 फीसदी) ने छात्रों (81.2 फीसदी) को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि प्राथमिक से मिडिल स्तर के बीच करीब 13 फीसदी की यह गिरावट ड्रॉप-आउट की समस्या की ओर इशारा करती है।
इस राज्य के लिए सबसे चिंताजनक आंकड़े माध्यमिक स्तर पर हैं। पिछले तीन साल में इस स्तर पर जीइआर में करीब 10% की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2022-23 में यह 49.5% था। यह बढ़कर 60% से अधिक हो गया है।
नौवीं से 12वीं कक्षा तक आते-आते सकल नामांकन अनुपात गिरकर 60.6% रह जाता है। यानी मिडिल स्कूल पास करनेवाले बच्चों का एक बड़ा हिस्सा उच्च शिक्षा तक नहीं पहुंच पा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार फाउंडेशनल स्तर (प्री-प्राइमरी से कक्षा (दो) में झारखंड का प्रदर्शन धीमा है, यहां जीआर मात्र 38% दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा पड़ोसी राज्यों और राष्ट्रीय औसत की तुलना में कम है। इसमें झारखंड नीचे से पांचवें स्थान पर है।
इस स्तर पर राष्ट्रीय औसत करीब 41 फीसदी है। देश में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में झारखंड 32वें स्थान पर है। सबसे खराब स्थिति बिहार की है।



