तकनीकझारखंडदेशफीचर्डबिग ब्रेकिंग

गेतलसूद डैम में 100 mw फ़्लोटिंग सोलर प्लांट के लिए 132 kv ट्रांसमिशन लाइन तैयार

Getalsud Dam 100 MW Floating Solar Plant: SECI Completes Transmission Line, Power Generation Soon. 132 kV Double Circuit Line Ready for Charging; Ranchi Solar Power Project to Boost Clean Energy Supply.

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड की ऊर्जा व्यवस्था को नई दिशा देने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना गेतलसूद डैम में बन रहा 100 मेगावाट (100 mw) फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच गया है। सेकी (Solar Energy Corporation of India Limited) द्वारा इस परियोजना को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ने के लिए बनाई जा रही 132 केवी डबल सर्किट गेतलसूद-हेसागढ़ ट्रांसमिशन लाइन का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।

कंपनी की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार यह ट्रांसमिशन लाइन 25 मार्च 2026 से किसी भी समय उच्च वोल्टेज के साथ चार्ज की जा सकती है। इसके साथ ही परियोजना के पहले चरण में 50 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन अप्रैल माह में शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि दूसरे चरण के पूरा होने पर कुल क्षमता 100 मेगावाट तक पहुंच जाएगी।

कई गांवों से होकर गुजर रही ट्रांसमिशन लाइनः बताया गया कि यह हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन अनगढ़ा प्रखंड के कई गांवों से होकर गुजरती है। इनमें प्रमुख रूप से गेतलसूद, बुकी, बनादाग, पेलादा (नगड़ाबेड़ाडांगी) और हेसातु शामिल हैं।

इसको देखते हुए कंपनी और प्रशासन ने स्थानीय ग्रामीणों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। ग्रामीणों को चेतावनी दी गई है कि वे ट्रांसमिशन लाइन और टावर से पर्याप्त दूरी बनाए रखें तथा पशुओं को भी नियंत्रण में रखें।

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि टावर पर चढ़ना या लाइन के बेहद करीब जाना खतरनाक हो सकता है। किसी भी तरह की लापरवाही से दुर्घटना की आशंका को देखते हुए कहा गया है कि सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी होने पर होने वाली घटना के लिए कंपनी जिम्मेदार नहीं होगी।

झारखंड की पहली बड़ी फ्लोटिंग सोलर परियोजनाः विशेषज्ञों के अनुसार गेतलसूद डैम में स्थापित हो रहा यह फ्लोटिंग सोलर प्लांट झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण हरित ऊर्जा परियोजनाओं में से एक है।

फ्लोटिंग सोलर प्लांट में सौर पैनलों को जलाशय की सतह पर विशेष प्लेटफॉर्म पर स्थापित किया जाता है। यह तकनीक कई मायनों में पारंपरिक सौर परियोजनाओं से अधिक प्रभावी मानी जाती है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की सतह पर तापमान अपेक्षाकृत कम रहने के कारण सोलर पैनलों की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। साथ ही जलाशय के पानी का वाष्पीकरण भी कम होता है, जिससे जल संरक्षण में भी मदद मिलती है।

राष्ट्रीय ग्रिड से जुड़ेगी गेतलसूद की बिजलीः इस परियोजना से उत्पन्न होने वाली बिजली को राज्य और राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुंचाने के लिए 132 केवी गेतलसूद-हेसागढ़ ट्रांसमिशन लाइन अहम भूमिका निभाएगी।

ट्रांसमिशन लाइन के चार्ज होने के बाद सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली सीधे ग्रिड में भेजी जा सकेगी। इससे राँची सहित झारखंड के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

हरित ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदमः ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह परियोजना झारखंड को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। देश में तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच फ्लोटिंग सोलर जैसी परियोजनाएं भविष्य के ऊर्जा मॉडल का अहम हिस्सा बन रही हैं।

गेतलसूद परियोजना के सफल संचालन से झारखंड न सिर्फ अपनी ऊर्जा जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेगा, बल्कि स्वच्छ और टिकाऊ ऊर्जा के क्षेत्र में भी नई पहचान बना सकेगा।

यदि अप्रैल में 50 मेगावाट उत्पादन शुरू हो जाता है और दूसरे चरण में अतिरिक्त 50 मेगावाट जुड़ जाता है, तो यह परियोजना झारखंड के ऊर्जा परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में राज्य के अन्य जलाशयों में भी फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं की संभावनाएं खुल सकती हैं।

मुकेश भारतीय

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारतीय पिछले तीन दशक से राजनीति, प्रशासन, सरकार को लेकर स्थानीय, राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर लेखन-संपादन करते आ रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button