JPSC नियुक्ति घोटाले में ED की एंट्री, 60 से अधिक आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग एंगल
रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की दूसरी नियुक्ति परीक्षा से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी जांच शुरू कर दी है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पहलुओं की जांच के लिए झारखंड लोक सेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, सदस्य, परीक्षार्थियों, परीक्षकों और अन्य सहयोगियों समेत कुल 60 से अधिक लोगों के खिलाफ ईसीआईआर (इन्फोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट) दर्ज की है। यह कार्रवाई सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट के आधार पर की गई है।
ईडी की ईसीआईआर में जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष दिलीप कुमार प्रसाद, गोपाल प्रसाद, तत्कालीन सदस्य शांति देवी, राधागोविंद नागेश, एलिस उषा रानी सिंह और अरविंद कुमार सिंह जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इसके साथ ही उन परीक्षार्थियों को भी आरोपी बनाया गया है, जो इस कथित घोटाले के बाद प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए और वर्तमान में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं।
उत्तर पुस्तिकाओं में हेराफेरी का आरोपः जेपीएससी नियुक्ति घोटाले की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि उत्तर पुस्तिकाओं में अंकों की कृत्रिम बढ़ोतरी, टेंपरिंग और आयोग के अधिकारियों की मिलीभगत से कई परीक्षार्थियों को अनुचित रूप से पास कराया गया। इस पूरे खेल में परीक्षकों और इंटरव्यू बोर्ड से जुड़े कुछ सदस्यों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी।
एसीबी से सीबीआई तक पहुंचा मामलाः सरकार ने पहले इस घोटाले की जांच का जिम्मा एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) को सौंपा था, लेकिन जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। इसके बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर वर्ष 2012 में सीबीआई ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। लगभग 12 वर्षों की लंबी जांच के बाद सीबीआई ने वर्ष 2024 में आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। फिलहाल इस मामले के सभी आरोपी जमानत पर हैं।
अफसर से आईपीएस बने नाम भी रडार परः इस घोटाले में चयनित कुछ राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी वर्तमान में प्रोन्नति पाकर आईपीएस अधिकारी बन चुके हैं। डीएसपी से आईपीएस बने अधिकारियों में अरविंद कुमार सिंह और विकास कुमार पांडेय शामिल हैं। वहीं 9 दिसंबर 2025 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शिवेंद्र, राधा प्रेम किशोर और मुकेश कुमार महतो को शर्तों के साथ प्रोन्नति प्रदान की है, जिस पर भी अब सवाल उठने लगे हैं।
परीक्षकों और इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों की भूमिका जांच के घेरे में: आरोपी परीक्षकों में बीएचयू, काशी विद्यापीठ, रांची कॉलेज, डीएवी कॉलेज बनारस समेत कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों से जुड़े प्रोफेसर और सहायक प्राध्यापक शामिल हैं। इसके अलावा इंटरव्यू बोर्ड के सदस्य, विशेषज्ञ, सेवानिवृत्त अधिकारी और निजी कंपनी ग्लोबल इंफॉरमेटिक के मैनेजर के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग की परतें खोलेगी ईडीः ईडी अब यह जांच करेगी कि इस नियुक्ति घोटाले से अर्जित अवैध धन का इस्तेमाल कहां-कहां किया गया, किस तरह से धन का लेन-देन हुआ और किन माध्यमों से उसे सफेद करने की कोशिश की गई। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ईडी की कार्रवाई और तेज हो सकती है तथा कई अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।
बहरहाल, जेपीएससी नियुक्ति घोटाले में ईडी की एंट्री से झारखंड की सियासत और प्रशासनिक हलकों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मनी लॉन्ड्रिंग जांच में कौन-कौन से नए नाम सामने आते हैं और दोषियों पर कब तक सख्त कार्रवाई होती है।










