
पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सुपौल सदर के बर्खास्त अंचलाधिकारी प्रिंस राज को चयनमुक्त करने का अंतिम निर्णय ले लिया है। यह कार्रवाई उस विवाद के बाद की गई, जिसमें वे अपने कथित मृत भाई ‘धर्मेंद्र कुमार’ से जुड़े मामले में विभाग के समक्ष मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने में असफल रहे। विभागीय संकल्प के अनुसार, यही तथ्य पूरे प्रकरण में निर्णायक आधार बना।
मामले की जांच विशेष निगरानी इकाई द्वारा की गई थी। अनुसंधान के दौरान यह गंभीर तथ्य सामने आया कि धर्मेंद्र कुमार के नाम से वर्ष 2004 में तथा प्रिंस राज के नाम से वर्ष 2006 में अलग-अलग जन्मतिथियों के साथ माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के प्रमाण-पत्रों का उपयोग किया गया। यह स्थिति प्रथम दृष्टया नियमों और प्रक्रियाओं के विरुद्ध मानी गई।
विभाग द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर प्रिंस राज ने अपने जवाब में कहा कि धर्मेंद्र कुमार उनके सगे भाई थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी है और दोनों अलग-अलग कानूनी पहचान वाले व्यक्ति हैं। विभाग ने इस दावे की पुष्टि के लिए उनसे मृत्यु प्रमाण-पत्र सहित मृत्यु की तिथि, स्थान और परिस्थितियों से संबंधित आधिकारिक दस्तावेज मांगे।
हालांकि, निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद न तो मृत्यु प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया गया और न ही किसी अन्य प्रामाणिक दस्तावेज से भाई की मृत्यु की पुष्टि हो सकी। विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही और संदेहास्पद आचरण मानते हुए कड़ा रुख अपनाया। इसके अलावा वर्ष 2006 में उत्तीर्ण माध्यमिक परीक्षा से जुड़े आवश्यक कागजात भी प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
इसी दौरान बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना ने विभाग को सूचित किया कि वर्ष 2006 की माध्यमिक परीक्षा से संबंधित अंकपत्र एवं प्रमाण-पत्र को रद्द कर दिया गया है। इस सूचना ने मामले को और मजबूत आधार प्रदान किया।
इन सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, बिहार ने प्रिंस राज को चयनमुक्त करने का निर्णय लिया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि सरकारी सेवा में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई आवश्यक है। स्रोत: मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट







