
पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार राजस्व व भूमि सुधार विभाग को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मार्च 2027 तक विभाग में कुल 16,584 पदों पर बहाली की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इन पदों में राजस्व अधिकारी, राजस्व कर्मचारी और अमीन सहित विभिन्न कैडरों के पद शामिल हैं। बिहार विधानसभा में वर्ष 2026-27 के बजट अनुदान मांगों पर जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने यह महत्वपूर्ण घोषणा की।
8,051 राजस्व कर्मचारियों की होगी नियुक्तिः उपमुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि राजस्व कर्मचारी के 8,051 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इनमें से वर्ष 2023 में 3,559 पदों के लिए अधियाचना बिहार स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को भेजी जा चुकी है। शेष 4,492 पदों के लिए रोस्टर क्लियरेंस के बाद वर्ष 2025 में सामान्य प्रशासन विभाग को अधियाचना भेजी गई है।
सरकार ने राजस्व कर्मचारियों के 3,303 नए पदों का सृजन भी किया है। इससे इस संवर्ग में स्वीकृत पदों की संख्या 8,472 से बढ़कर अब 11,775 हो गई है। फिलहाल राज्य में लगभग 3,767 राजस्व कर्मचारी कार्यरत हैं।
इसके साथ ही सरकार ने ‘बिहार राजस्व कर्मचारी संवर्ग नियमावली 2025 (राज्य स्तरीय अराजपत्रित संवर्ग)’ का गठन किया है, जिससे यह संवर्ग अब राज्य स्तरीय हो गया है। इससे पदस्थापन, प्रोन्नति और सेवा शर्तों में पारदर्शिता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
अमीन के 765 पदों पर भी बहालीः राज्य में भूमि मापी और सीमांकन कार्य को तेज करने के लिए अमीन के 765 पदों पर भी नियुक्ति की जाएगी। इन पदों के लिए रोस्टर क्लियरेंस के बाद वर्ष 2025 में सामान्य प्रशासन विभाग को अधियाचना भेजी गई है।
वर्तमान में अमीन के कुल 2,502 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 1,199 पदों पर कर्मी कार्यरत हैं। सरकार ने ‘बिहार अमीन संवर्ग नियमावली 2025 (राज्य स्तरीय अराजपत्रित संवर्ग)’ का गठन किया है। साथ ही अमीन, अमीन ग्रेड-1, प्रधान अमीन जैसे तीन स्तरीय पद संरचना तय की गई है। इस नई व्यवस्था से प्रोन्नति के अवसर बढ़ेंगे और विभागीय कार्यों में दक्षता आएगी।
2,190 करोड़ से अधिक का बजट पारितः विधानसभा ने ध्वनिमत से 2,190 करोड़ 15 लाख 1 हजार रुपये के बजट अनुदान को पारित कर दिया। इस दौरान सदन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मौजूद रहे।
हालांकि, उपमुख्यमंत्री के जवाब के दौरान विपक्षी सदस्यों ने असहमति जताते हुए वॉकआउट किया। एआईएमआईएम के तीन सदस्यों को छोड़कर बाकी विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया, जिससे कार्यवाही के दौरान राजनीतिक गरमाहट भी देखने को मिली।
प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदमः विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर यह बहाली राजस्व व भूमि सुधार विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। राज्य में जमीन से जुड़े मामलों, म्यूटेशन, दाखिल-खारिज और मापी संबंधी लंबित मामलों के त्वरित निपटारे में इससे गति आने की उम्मीद है।
वहीं सरकार का दावा है कि नई संवर्ग नियमावली और पद संरचना से विभागीय ढांचा अधिक संगठित और जवाबदेह बनेगा, जिससे आम लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।
समाचार स्रोत: मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स





