रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। मुंबई और पटना के बाद अब झारखंड के साहिबगंज में एलिवेटेड मरीन ड्राइव कॉरिडोर का निर्माण कराया जायेगा। इसके साथ ही महादेवगंज में गंगा नदी के सामने के पूरे इलाके को सुंदर तरीके से विकसित किया जायेगा। इस परियोजना की लागत करीब 1236 करोड़ रुपये है।
इस परियोजना का प्रस्ताव तैयार करने के पहले पथ निर्माण विभाग ने मुंबई और पटना दोनों जगहों के मरीन ड्राइव का सर्वे कराया गया। इसके बाद इसे धरातल पर उतारने के लिए योजना तैयार की गयी। इस योजना को तकनीकी स्वीकृति भी मिल गयी है।
अब प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया की जा रही है। जल्द ही प्रशासनिक स्वीकृति के बाद इसके निर्माण की दिशा में कार्रवाई की जायेगी। यह प्रयास किया जा रहा है कि नये साल में इसका काम शुरू करा दिया जाये।
पथ निर्माण विभाग ने काफी प्रयास के बाद इस परियोजना को तैयार किया है। यह परियोजना अपने आप में अनोखी होगी। ऐसा इंजीनियरों का कहना है। इसके धरातल पर उतरने के कई लाभ दिखेंगे।
यह कॉरिडोर एनएच-33 (ओल्ड एनएच-80), एनएच-133 बी व स्टेट हाइवे-18 जैसे महत्वपूर्ण एनएच व राज्य पथ को जोड़ेगा। यह महादेवगंज, मनिहारी-साहिबगंज फोरलेन पुल, शकुंतलना घाट, ओझा टोली घाट, चनान, मदनशाही, सतीचौकी-खुथारी, साहिबगंज बंदरगाह और जमुनी रेलवे क्रॉसिंग को आपस में जोड़ती है।
वहीं एनएच 133 बी (साहिबगंज-मनीहारी) के माध्यम से यह कॉरिडोर बिहार व उतर-पूर्वी राज्यों को जोड़ेगा। इसकी कुल लंबाई 13 किमी होगी।
इस परियोजना के इनवायरमेंटल क्लियरेंस के लिए 6।50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। भू-अर्जन आदि पर 40 करोड़, यूटिलिटी शिफ्टिंग पर छह करोड़, एजेंसी चार्ज पर 15 करोड़ व सुपरविजन चार्ज पर करीब 34 करोड़ रुपये खर्च आने हैं। परियोजना की कुल लागत 1236 करोड़ रुपये होगी।
इसके निर्माण से ट्रैफिक की समस्या से तो निबटा ही जा सकता है। वहीं, नदी साइट के डेवलप होने से सुंदर पर्यटन स्थल बन सकेगा। इस इलाके में अत्यधिक भीड़ है। ऐसे में राजमार्गों से भीड़ कम हो जायेगी।
कॉरिडोर के माध्यम से पर्यटक राजमहल हिल्स, साहिबगंज किला, गंगा नदी आदि पर्यटन स्थलों का नजारा ले सकेंगे। इन स्थलों से तक लोग आसानी से पहुंच सकेंगे। यह परियोजना साहिबगंज के ट्रैफिक व पर्यटन दोनों के लिए वरदान साबित होगी।



