रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। झारखंड राज्य की प्रभारी डीजीपी तदाशा मिश्र को पहली पूर्णकालिक महिला डीजीपी बनाया गया है। इससे संबंधित आदेश गृह विभाग ने जारी कर दिया है। अब तदाशा दो वर्षों के लिए डीजीपी के पद पर रहेंगी।
राज्य सरकार ने डीजीपी के चयन के लिए आठ जनवरी 2025 को अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत डीजीपी के पद पर दो वर्षों तक पूर्णकालिक नियुक्ति के लिए छह माह का कार्यकाल शेष बचा होना चाहिए।
इस नियमावली पर डीजीपी पद पर अनुराग गुप्ता की नियुक्ति हुई थी। लेकिन इस नीति में सरकार द्वारा 29 दिसंबर 2025 को संशोधन किया गया है। इसके अनुसार पूर्णकालिक डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए 30 वर्ष की सेवावधि का प्रावधान किया गया है।
इस तरह से तदाशा यह कार्यकाल पूर्व में ही पूरी कर चुकी थीं। इसी आधार पर इनकी सेवा की गिनती पहले के वर्ष से की गयी है। संशोधन में छह माह के नियम को शिथिल किया गया है। इसी आधार पर तदाशा की नियुक्ति डीजीपी पद पर की गयी है। अब वह 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त नहीं होंगी।
1994 बैच की यह आइपीएस अधिकारी न केवल अपनी पेशेवर क्षमताओं के लिए जानी जाती हैं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में सामना की गई चुनौतियों के बावजूद अपनी दृढ़ता के लिए भी। आइए उनके जीवन, कैरियर और उपलब्धियों के बारे में विस्तार से जानें।
तदाशा मिश्र का जन्म ओडिशा राज्य के एक परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में ज्यादा सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन वे एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं।
उन्होंने आईपीएस परीक्षा पास कर 1994 में बिहार कैडर में प्रवेश किया। जब 2000 में झारखंड राज्य का गठन हुआ, तो वे झारखंड कैडर में स्थानांतरित हो गईं। उनकी यात्रा एक सामान्य अधिकारी से राज्य की शीर्ष पुलिस अधिकारी तक पहुंचना प्रेरणादायक है।
तदाशा मिश्र का कैरियर 30 वर्षों से अधिक का है, जिसमें उन्होंने झारखंड पुलिस के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं।
सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (एसपी): वे गिरिडीह, बोकारो और रांची सिटी एसपी के रूप में कार्यरत रहीं। इन पदों पर उन्होंने अपराध नियंत्रण, कानून व्यवस्था और जनसुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
इंस्पेक्टर जनरल (आईजी) और एडिशनल डीजीपी (एडीजीपी): विभिन्न जिलों और विभागों में आईजी और एडीजीपी के रूप में उन्होंने पुलिस प्रशिक्षण, जांच प्रक्रिया और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान किया।
स्पेशल सेक्रेटरी, होम, प्रिजन एंड डिजास्टर मैनेजमेंट: मई 2025 तक वे झारखंड सरकार के होम विभाग में स्पेशल सेक्रेटरी के पद पर तैनात थीं, जहां उन्होंने जेल सुधार, आपदा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा नीतियों पर काम किया।
उनका कैरियर चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने हमेशा पेशेवर दक्षता का परिचय दिया। वे एक सक्षम प्रशासक के रूप में जानी जाती हैं, जो जांच प्रक्रिया को मजबूत बनाने और अपराधियों को त्वरित सजा दिलाने पर जोर देती हैं।
झारखंड की पहली महिला डीजीपी: 7 नवंबर 2025 को तदाशा मिश्र को झारखंड पुलिस का कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया, जो राज्य के 25 वर्ष के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण था। यह नियुक्ति पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता (1990 बैच) के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद हुई। उन्होंने रांची के पुलिस मुख्यालय में चार्ज संभाला और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सौजन्य भेंट की।
नीतिगत योगदान: डीजीपी के रूप में उन्होंने पुलिसिंग के लिए प्राथमिकताएं निर्धारित कीं, जैसे जांच प्रक्रिया को मजबूत करना, जवाबदेही सुनिश्चित करना, नागरिक-मित्रवत पुलिसिंग को बढ़ावा देना और राज्य सरकार के दृष्टिकोण को लागू करना। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे नागरिकों के साथ गरिमा का व्यवहार करें और अपराधियों को बिना देरी के सजा दिलाएं।
प्रेरणादायक उदाहरण: उनकी नियुक्ति को महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत माना जा रहा है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां लिंग असमानता अभी भी बनी हुई है।
तदाशा मिश्र एक मजबूत व्यक्तित्व की धनी महिला हैं। वे दो बेटों की मां हैं, लेकिन 2018 में उनके एक बेटे की मृत्यु हो गई, जिसे उन्होंने अपने जीवन का सबसे कठिन मोड़ बताया। इस व्यक्तिगत त्रासदी के बावजूद उन्होंने अपने कर्तव्यों को कभी प्रभावित नहीं होने दिया।
उनकी दृढ़ता और सहनशीलता उन्हें एक प्रेरणादायक मां और पेशेवर के रूप में चित्रित करती है। निजी जीवन के बारे में वे ज्यादा खुलासा नहीं करतीं, लेकिन उनकी कहानी लचीलापन (रेजिलिएंस) का प्रतीक है।



