पद की गरिमा का कुछ ख्याल कीजिए बिहार के डीजीपी साहब !

“बिहार के बड़बोले डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को लेकर कभी सीएम नीतीश कुमार ने दो टूक कहा था कि ‘मीडिया वाले आपको बढ़िया पब्लिसिटी दे रहे हैं, लेकिन काम में कमी आएगी तो चार-पांच महीने के बाद वे आपको ध्वस्त कर देंगे। अगर मीडिया आपको फ्रंट पेज पर लाया तो पक्का जानिए कि आप अंदर जाने वाले हैं। ताली बजवाने से अच्छा है कि गंभीरतापूर्वक अमल करना और काम करना चाहिए। हमारी यही अपेक्षा है’….

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। बिहार के डीजीपी को लेकर ट्वीटर पर एक ताजा वीडियो खूब ट्रोल हो रहा है। एक मीडियाकर्मी के सवोलों पर वे काफी बौखलाए दिख रहे हैं।

एक रिपोर्टर ने जब डीजीपी से पूछा कि आपने जिस तरह से रिया चक्रवर्ती को लेकर औकात जैसे शब्द का प्रयोग किया है, क्या आप जैसे संवैधानिक पद पर व्यक्ति को शोभा देता है?

इस पर बमकते हुए डीजीपी कहते हैं कि जी, औकात का मतलब क्या होता है, शोभा देता है, मैं रिपीट कर रहा हूं कि रिया चक्रवर्ती की हैसियत नहीं हैं कि वो बिहार के सीएम पर टिप्पणी करे।

वायरल वीडियो के अनुसार जब रिपोर्टर ने उनसे पूछा कि आप सरकार के प्रवक्ता की तरह क्यों बात करते हैं सर? इस पर डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय कहते हैं, इसलिए कि सरकार ने हमको बोलने के लिए कहा है। इसलिए बोल रहे हैं।

इसके आगे डीजीपी मीडिया कर्मियों को कहते हैं कि आप लोग तो तैयारी करके आए हैं. आप लोगों से डेमोरलाइज होने वाले नहीं हैं। आप मोटिवेटेड कोस्चन कर रहे हैं। आपको भेजा गया है।

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वायरल इस वीडियो को देखने के बाद कहीं से यह नहीं लगता कि बिहार जैसे संवेदनशील राज्य का पुलिस प्रमुख बोल रहे हों। न भाषा में गंभीरता और न ही डीजीपी जैसे पद की गरिमा का कोई ख्याल।

बढ़ते कोरोना संक्रमण भयकाल में डीजीपी का खुद दंडनीय प्रावधानों की धज्जियां उड़ाते हुए देखना भी कम आश्चर्य पैदा नहीं करता है। वे निःसंदेह मीडिया के सामने उस तेवर में दिख रहे हैं, मानों वे खुद सवालों के घेरे में हों और मीडिया से छुपते-छुपाते खुद का बचाव कर रहे हों….

आईए आप भी देखिए उस वायरल वीडियो को और खुद बिहार के डीजीपी को समझने का आंकलन कीजिए….

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