केंद्रीय कैबिनेट ने जमालपुर-भागलपुर के बीच तीसरी रेल लाइन को दी मंजूरी

नई दिल्ली (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में चार महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर लगभग 12328 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इनमें से एक प्रमुख परियोजना बिहार के जमालपुर और भागलपुर के बीच 53 किलोमीटर लंबी तीसरी रेल लाइन का निर्माण है, जिसके लिए 1156 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इस परियोजना को तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
माना जा रहा है कि जमालपुर-भागलपुर के बीच तीसरी रेल लाइन का निर्माण बिहार के इस क्षेत्र में आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा। यह परियोजना पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना और आर्थिक विकास के नए अवसर सृजित करना है।
इस रेल लाइन के निर्माण से न केवल रेल नेटवर्क का विस्तार होगा, बल्कि बिहार, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना और असम जैसे राज्यों में रेलवे की कुल 565 किलोमीटर की अतिरिक्त लाइनें भी जुड़ेंगी।
वर्तमान में, जमालपुर-भागलपुर रेलखंड पर केवल दो लाइनें उपलब्ध हैं, जिसके कारण ईसीएल राजमहल से आने वाले कोयले के रैक को उत्तर और उत्तर-पूर्व बिहार तक पहुंचने में काफी समय लगता है। सवारी गाड़ियों के लगातार आवागमन के कारण कोयले के रैक को कई स्टेशनों पर रोका जाता है, जिससे परिवहन में देरी होती है।
इस रेलखंड से होकर गुजरने वाले कोयले के रैक को मुंगेर के रास्ते ले जाया जाता है, लेकिन तीसरी लाइन के निर्माण के बाद कोयले का परिवहन निर्बाध रूप से हो सकेगा। इससे न केवल रेलवे को राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि कोयले की समय पर आपूर्ति भी सुनिश्चित होगी।
इस परियोजना को शुरूआत में 1893 करोड़ रुपये के बजट के साथ रेलवे बोर्ड को भेजा गया था, लेकिन बोर्ड ने लागत को कम करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पूर्व रेलवे के कंस्ट्रक्शन विंग भागलपुर ने पुनः संशोधित अनुमान (री-एस्टीमेट) तैयार किया और इसे रेलवे बोर्ड को प्रस्तुत किया। बोर्ड ने संशोधित योजना को मंजूरी दे दी, जिसके तहत अब 1156 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना को पूरा किया जाएगा।
यह तीसरी रेल लाइन न केवल कोयला परिवहन को सुगम बनाएगी, बल्कि क्षेत्र में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देगी। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से स्थानीय व्यापारियों, उद्यमियों और निवेशकों को नए अवसर प्राप्त होंगे।
साथ ही यात्रियों के लिए भी रेल यात्रा अधिक सुगम और समयबद्ध होगी। यह परियोजना बिहार के आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जिससे रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास को भी बल मिलेगा।