
पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा से डोमिसाइल नीति हटाए जाने को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। पूर्व शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर ने इस फैसले पर अफसोस जताते हुए खुलासा किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस नीति को हटाने के लिए अड़े हुए थे, जिसके चलते उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी कोई बदलाव नहीं कर सके। इस बयान ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है और शिक्षक अभ्यर्थियों के बीच नाराजगी को और हवा दी है।
दरअसल बिहार में 1.70 लाख शिक्षक पदों पर भर्ती के लिए 2023 में नई नियमावली जारी की गई थी, जिसमें डोमिसाइल नीति को समाप्त कर दिया गया। इस नीति के तहत पहले केवल बिहार के स्थानीय निवासियों को ही शिक्षक भर्ती में प्राथमिकता दी जाती थी।
इस नीति हटने के बाद दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों को भी भर्ती में शामिल होने का मौका मिल गया, जिससे बिहार के स्थानीय युवाओं में भारी असंतोष फैल गया। शिक्षक अभ्यर्थियों का कहना है कि यह फैसला उनके रोजगार के अवसरों को कम करता है और बिहार के बेरोजगार युवाओं के साथ अन्याय है।
पटना के गांधी मैदान में 2023 में इस फैसले के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। बिहार शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने विधानसभा घेराव की चेतावनी दी थी और शिक्षक अभ्यर्थियों ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की थी।
पूर्व शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर ने आज एक ताजा बयान में कहा है कि “मैंने डोमिसाइल नीति को लागू रखने की पूरी कोशिश की थी। मैंने उत्तराखंड का उदाहरण देकर समझाने की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस नीति को हटाने के लिए अड़े हुए थे। तेजस्वी यादव भी इस मामले में कुछ नहीं कर सके।”
चंद्रशेखर ने यह भी दावा किया कि कुछ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को गलत जानकारी दी, जिसके आधार पर यह फैसला लिया गया। उन्होंने आगे कहा, “मेरी सलाह पर नकारात्मक अंकन (निगेटिव मार्किंग) को हटाया गया था, लेकिन डोमिसाइल नीति पर मेरी बात नहीं मानी गई।”
बता दें कि चंद्रशेखर जो राजद कोटे से शिक्षा मंत्री थे, अपने कार्यकाल में कई विवादास्पद बयानों के लिए चर्चा में रहे। उनके रामचरितमानस पर टिप्पणी और अन्य मंत्रियों के साथ तनातनी ने भी उनकी स्थिति को कमजोर किया था। जनवरी 2024 में उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर गन्ना विभाग में भेज दिया गया था।
हालांकि बिहार विधानसभा में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठा। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने दिव्यांग शिक्षकों की भर्ती में बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया था। वर्तमान शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने मार्च 2025 में विधानसभा में स्पष्ट किया कि डोमिसाइल नीति लागू करने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है, लेकिन 80 फीसदी नियुक्तियां बिहार के अभ्यर्थियों को ही दी गई हैं।
वहीं नीतीश सरकार ने डोमिसाइल नीति हटाने का बचाव करते हुए कहा कि इससे शिक्षक भर्ती में गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। चंद्रशेखर के कार्यकाल में उनके बयानों और शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के साथ तनातनी ने भी इस फैसले को प्रभावित किया।
हालांकि, चंद्रशेखर के ताजा बयान ने नीतीश कुमार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ा है। एक यूजर ने लिखा है कि जब 95 फीसदी भर्तियां हो चुकी हैं, तब डोमिसाइल नीति की बात करना चुनावी लॉलीपॉप है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डोमिसाइल नीति का हटना बिहार के स्थानीय युवाओं के लिए नुकसानदायक है, क्योंकि बिहार में बेरोजगारी पहले से ही एक बड़ी समस्या है। दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है।