पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। गोपालगंज और पूर्वी चंपारण को जोड़ने वाले नारायणी नदी पर बने डुमरिया पुल की संरचनात्मक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग (वजन लगभग 210 टन) को इसी पुल से पार कराए जाने के बाद सेतु के कई स्प्रिंग फेल हो जाने की पुष्टि हुई है। इससे पुल को मिलने वाला तकनीकी सपोर्ट समाप्त हो गया है और भारी वाहनों के गुजरने के दौरान पुल में कंपन न होने से किसी बड़े हादसे की आशंका और भी बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार डुमरिया सेतु पहले से ही जर्जर अवस्था में था। इसकी अधिकतम भार क्षमता लगभग 110 टन बताई गई थी, जबकि इससे दोगुने वजन वाले शिवलिंग को बीते 5 जनवरी को इसी पुल से पार कराया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षमता से अधिक भार पड़ने के कारण पुल के स्प्रिंग टूट गए और कई स्थानों पर नट-बोल्ट भी ढीले हो गए, जिससे सेतु की लचीलापन पूरी तरह खत्म हो गई है।
कंपन खत्म होना बना सबसे बड़ा खतराः एनएचएआई के तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी पुल में कंपन का होना सामान्य और आवश्यक प्रक्रिया है। स्प्रिंग और स्ट्रक्चरल जॉइंट्स लोड पड़ने पर ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और भार हटने पर अपनी मूल स्थिति में लौट आते हैं। लेकिन डुमरिया पुल में स्प्रिंग फेल होने के बाद यह प्रक्रिया बंद हो चुकी है। अब पुल भारी वाहनों का दबाव सह नहीं पा रहा, जिससे स्ट्रक्चर पर सीधा तनाव पड़ रहा है।
प्रशासन ने मांगी विस्तृत रिपोर्टः मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपालगंज के जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों से पूरी तकनीकी रिपोर्ट तलब की है। हालांकि प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि शिवलिंग को पार कराने से पहले एनएचएआई की टीम से निरीक्षण रिपोर्ट ली गई थी, लेकिन अब सामने आए तकनीकी फॉल्ट ने उस रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
तुरंत बंद नहीं हो सकता पुल, विकल्प पर काम तेजः सूत्रों के अनुसार फिलहाल डुमरिया पुल पर यातायात को पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है, क्योंकि यह एनएच-27 का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस पर रोज़ाना हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। ऐसे में एनएचएआई ने समानांतर सेतु के निर्माण कार्य को तेज करने का निर्णय लिया है, ताकि पुराने पुल पर ट्रैफिक लोड कम किया जा सके।
16 साल से लटका है नया सेतु निर्माणः गौरतलब है कि गुजरात के सिलचर से असम के गुवाहाटी को जोड़ने वाले ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर (एनएच-27) के तहत गंडक नदी पर नए सेतु का निर्माण वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। उस समय परियोजना की लागत 88 करोड़ रुपये तय की गई थी।
वर्ष 2011 में निर्माणाधीन सेतु का एक पाया धंस गया, जिसके बाद निर्माण कार्य कर रही कंपनी काम छोड़कर भाग गई। तब से यह परियोजना वर्षों तक ठप पड़ी रही।
2022 में एनएचएआई ने 167 करोड़ रुपये की लागत से नए सिरे से टेंडर जारी किया, लेकिन कंक्रीट स्पैन को लेकर तकनीकी गड़बड़ियां सामने आने से काम फिर अटक गया। अब अंततः स्टील स्ट्रक्चर आधारित सेतु के निर्माण की शुरुआत की गई है, जिससे जल्द राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में दहशतः इधर पुल की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और वाहन चालकों में भारी चिंता है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो कोई भी दिन बड़ा हादसा लेकर आ सकता है।
समाचार स्रोत : मुकेश भारतीय / मीडिया रिपोर्ट्स





