रामविलास पासवान:  शहरब्नी से दिल्ली की सत्ता तक एक कठिन प्रेरक सफर

केंद्र में सरकार बनाने वाली सभी राष्ट्रीय गठबंधन में का हिस्सा थे वे। चाहे यूपीए हो या एनडीए। राजनीति में उन्हें मौसम वैज्ञानिक कहा जाता था। संभवतः यह नाम लालूप्रसाद ने दिया था। खुद रामविलास भी मानते थे कि वे जिधर रहते है, केंद्र में उसकी ही सरकार बनती है...

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क।  “ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर’ इन पंक्तियों को राजनीति में चरितार्थ करने वाले केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान देश के आधा दर्जन प्रधानमंत्रियों के साथ काम कर चुके हैं।

रामविलास पासवान का जन्म 5 जुलाई,1946 को हुआ था। 1960में उनकी शादी राजकुमारी देवी के साथ हुआ था। 1981 में अपनी पत्नी को तलाक देकर उन्होंने 1983 में रीना शर्मा के से की थी।

उन्होंने कोसी काँलेज, खगड़िया और पटना विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने एम ए और लाँ स्नातक की डिग्री हासिल की।

रामविलास पासवान ने खगडि़या के काफी दुरूह इलाके शहरब्नी से निकलकर दिल्ली की सत्ता तक का सफर अपने संघर्ष के बूते तय किया। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।

लिहाजा वह पांच दशक तक बिहार और देश की राजनीति में छाये रहे। इस दौरान दो बार लोकसभा का चुनाव सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकॉर्ड उनके नाम रहा। देश के छह पीएम के कैबिनेट में वह मंत्री रहे।

राजनीति की नब्ज पर उनकी पकड़ इस कदर थी कि वह वोट का एक निश्चित को इधर से उधर कर सकते थे। यही कारण रहा कि वह राजनीति में हमेशा प्रभावी भूमिका निभाते रहे थे।

इनके राजनीति कौशल का ही प्रभाव था कि उन्हें यूपीए में शामिल करने के लिए  सोनिया गांधी स्वयं चलकर इनके आवास पहुंची थी।

1969  में वे एक आरक्षित सीट से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के रूप में बिहार विधानसभा पहुंचे थें।

कभी गुजरात दंगे को लेकर अटल बिहारी की सरकार गिराने वाले रामविलास पासवान 1989 में पहली बार केंद्र में श्रम मंत्रीबने। 1999 में संचार मंत्री, 2002 में कोयला मंत्री, 2014 में खाध एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री तथा 2019 में फिर से वही मंत्री बने।

रामविलास पासवान आपातकाल में गिरफ्तार कर जेल भेजे गये। 1977 में जेल से रिहा हुए। पहली बार हाजीपुर  से जनता पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़े और भारी मतों से जीते भी। उनकी यह जीत विश्व रिकॉर्ड भी बना। 1980 और 1984 में हाजीपुर से चुने गये।

1983 में उन्होंने दलित मुक्ति और कल्याण के लिये एक संगठन दलित सेना का गठन किया।

1989 में लोकसभा के लिए चुने गये और वीपी सिंह मंत्रीमंडल में केंद्रीय श्रम मंत्री बनाए गये।

2000 में वे जनता दल से अलग होकर लोक जनशक्ति पार्टी का गठन किया।

2005 में उन्होंने अपनी नई पार्टी लोजपा को बिहार विधानसभा में उतारा।उस समय उनकीं पार्टी के 29 विधायक जीतकर आए थे। किसी दल को बहुमत नहीं मिला, लेकिन सता की चाभी उनके पास थी।

वे चाहते तो उस समय नीतीश कुमार या लालूप्रसाद की सरकार बन जाती।लेकिन वह मुस्लिम मुख्यमंत्री पर अड़े रहे।

रामविलास पासवान व्यक्ति गत रुप से राजनारायण, कपूर्री ठाकुर और सत्येन्द्र नारायण सिन्हा जैसे आपातकाल के प्रमुख नेताओं के करीबी थे। हाजीपुर में रेलवे का जोनल कार्यलय खोलने का श्रेय उन्हें ही जाता है।

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Mukesh Bhartiy / मुकेश भारतीय

Ceo_Cheif Editor

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