झारखंड में जजों के हेल्प के लिए होगी कोर्ट मैनेजर की नियुक्ति, जानें कार्य-वेतन-पात्रता

राँची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। झारखंड प्रदेश के जिला सत्र न्यायालय एवं सब ऑर्डिनेट न्यायालय, संलग्न कार्यालय में कोर्ट मैनेजर की नियुक्ति की जायेगी। एमबीए पास कोर्ट मैनेजर सिविल कोर्ट के प्रधान न्यायाधिशों व सेशन जज, न्यायायुक्त के कार्यो में सहयोग देंगे। प्रशासकीय कार्य, कोर्ट केस के निष्पादन के साथ-साथ ई-गर्वेनेंस के काम को आगे बढ़ाने

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झारखंड में जजों के हेल्प के लिए होगी कोर्ट मैनेजर की नियुक्ति, जानें कार्य-वेतन-पात्रता

राँची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। झारखंड प्रदेश के जिला सत्र न्यायालय एवं सब ऑर्डिनेट न्यायालय, संलग्न कार्यालय में कोर्ट मैनेजर की नियुक्ति की जायेगी।

एमबीए पास कोर्ट मैनेजर सिविल कोर्ट के प्रधान न्यायाधिशों व सेशन जज, न्यायायुक्त के कार्यो में सहयोग देंगे। प्रशासकीय कार्य, कोर्ट केस के निष्पादन के साथ-साथ ई-गर्वेनेंस के काम को आगे बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से जवाबदेह होंगे।

केंद्रीय विधि मंत्रालय के निर्देश के आलोक में झारखंड सरकार ने झारखंड राज्य, सिविल कोर्ट मैनेजर नियुक्ति सेवा, शर्त अपील नियमावली 2020 को मंजूर कर लिया गया है।

इस संबंध में राज्यपाल की सहमति के बाद विधि विभाग ने अधिसूचना जारी कर दिया है। जारी अधिसूचना के आलोक में कोर्ट मैनेजरों की नियुक्ति लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के जरिये किया जाएगा।

झारखंड हाइकोर्ट इनकी नियुक्ति करेगा। वैसे कर्मी जो सिविल कोर्ट में कार्यरत हैं और उनके पास बिजनेस मैनेजमेंट की डिग्री है तो उन्हें प्राथमिकता दी जायेगी।

नियुक्ति के लिए एमबीए पास और पांच साल की नौकरी का अनुभव, आईटी आदि संस्थानों में अनुभव का होना जरूरी रखा गया है। इनको सातवां वेतनमान के तहत लेबल दो 67000 हजार का वेतनमान दिया जायेगा।

छठा वेतनमान में 15600 – 39100 ग्रेड पे 6600 होगा। उम्र सीमा 25 साल न्यूनतम रखी गयी है। अधिकतम उम्र सीमा आरक्षण कैटेगरी में कार्मिक विभाग के द्वारा तय नियम के अनुसार होगा।

एमएसीपी का लाभ सरकार के द्वारा जारी संकल्प के अनुसार दिया जायेगा। नियमितीकरण की तिथि से वरीयता का निर्धारण किया जायेगा।

कोर्ट मैनेजर का समय-समय पर तबादला भी किया जायेगा। जारी नियमावली के अनुसार इसमें दंड का भी प्रावधान किया गया है,जिसके विरूद्ध वे अपील भी कर सकते हैं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायालयों के कामकाज की रफ्तार को लेकर चिंता जतायी थी। सभी राज्यों को अदालती कामकाज में तेजी लाने के मकसद यह निर्देश दियाथा कि न्यायालयों में प्रशिक्षित कोर्ट मैनेजरों की नियुक्ति की जाए।

केंद्रीय विधि मंत्रालय ने भी इस बाबत राज्य सरकारों को पत्र लिखा था। हालांकि, सात-आठ साल पहले भी यह बात उठी थी पर झारखंड सहित कई राज्यों ने इस पर पहल नहीं की है।

अब नियमावली बन जाने के बाद कोर्ट में कोर्ट मैनेजरों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। इनकी नियुक्त होने के बाद कामकाज में भी तेजी आयेगी।

ये होगा कामः वैसे सभी काम जो सिविल कोर्ट के बजट, प्रशासन,लेखा,खरीद, पे-रोल,ग्रांट, गाइडलाइन बजट इत्यादि। शिकायतों का मूल्यांकन करना,निष्पादन के लिए कार्य करना,केस निपटाने के लिए प्राथमिकता तय करना

ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट के कार्य। टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट,डाटा मैनेजमेंट, ऑटोमेटेड रिकार्डस, इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ कोर्ट रजिस्ट्रर, रसदी, सेंट्रालाइज फाइलिंग, नजारत सेक्शन,कॉपिंग सेक्शन,मालखाना सेक्शन सहित अन्य कार्यालयों के काम व समन्वय आदि।

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