झारखंड की जेलों में बढ़ते कोरोना संक्रमण सरकार के लिए गंभीर चुनौती

“झारखंड की जेलों में कोरोना संक्रमितों की बढ़ते तादात ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के लगभग हर जेल में ओवरवर्डन है। सच कहा जाए तो जिस तरह से कोरोना को रोकना मुश्किल है, क्योंकि स्वास्थ्य तंत्र कमजोर है।  उसी तरह कैदियों की रफ्तार को रोकना भी मुश्किल है…”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क / नारायण विश्वकर्मा। कोरोना काल में मास्क और सामाजिक दूरी पर खूब जोर है। कोरोना से बचाव के लिए शायद यह सबसे कारगर उपाय है। अब जरा सोचिए, कोरोना काल में झारखंड की जेलों की क्या स्थिति हो सकती है, जहां कि हर जेल में क्षमता से अधिक कैदी रखे गए हैं।

हर जिले का जेल प्रशासन अपनी क्षमता के अनुसार तैयारी की बात तो करता है, लेकिन यह अर्द्ध सत्य है। हकीकत में सभी जेलों के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनका सामना करना बहुत मुश्किल है। जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने के कारण वहां जगह की भारी कमी है।

राज्य के कई जेल प्रशासन संसाधन के अभाव में नए कैदियों को क्वारंटाइन करने में आधी-अधूरी प्रक्रिया अपना रहा है, तो दूसरी ओर कैदियों की बढ़ती संख्या को काबू करना जेल प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है

दो दिन पूर्व होटवार जेल में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या ने राज्य सरकार को सकते में ला दिया है। कोरोना ब्लास्ट के कारण होटवार जेल प्रशासन को भी एहतियातन लॉकडाउन लगाना पड़ा है।

झारखंड के दो मंत्री एनोस एक्का और राजा पीटर समेत 40 कैदी और 14 कर्मी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनको जेल में ही आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।

इसके अलावा संपर्क में आए 65 सुरक्षाकर्मियों को जेल में ही क्वारंटाइन में रखा गया है। कर्मियों के पॉजिटिव आने के बाद प्रशासनिक कामों में बाधा उत्पन्न हो गई है। अभी 400 अन्य कैदियों और कर्मियों की रिपोर्ट नहीं आयी है।

झारखंड की सभी जेलों की विकट स्थिति लेकर दो हफ्ते पूर्व आये नये जेल महानिरीक्षक बीरेंद्र भूषण ने कोरोना काल में जेलों में कैदियों को लेकर चिंता जतायी है।

जेल आईजी से जेलों के हालात पर हुई बातचीत के क्रम में उन्होंने माना कि सभी जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं।उन्होंने बताया कि झारखंड की जेलों में कुल क्षमता 18 हजार कैदियों की है, लेकिन अभी लगभग 20,400 कैदी हैं।

नए कारा महानिरीक्षक ने बताया कि यह सही है कि झारखंड की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं। लेकिन कोरोना काल में जेल में बढ़ते मरीजों के बीच सोशल डिस्टेसिंग पर अधिक जोर है।

बाहर से जो कैदी आते हैं, उनका टेस्ट लिया जाता है। कोरोना संक्रमित पाये जाने पर उस कैदी को संबंधित जेल अस्पताल भेज दिया जाता है।

जेलों के कैदियों के बोझ को कम करने के लिए क्या उपाय किये जा रहे हैं, के जवाब में उन्होंने कहा कि हजारीबाग के बरही अनुमंडल में मंडलकारा बनकर तैयार है। संभव है एक माह के अंदर मंडलकारा खुल जाएगा, तब कैदियों का बोझ कुछ कम हो जाएगा।

उन्होंने बताया कि कैदियों को वीडियो काफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हो रही है। होटवार जेल की नई बिल्डिंग में भी कैदी रखने की व्यवस्था की गई है। सेल भी खाली रहने से उसका उपयोग किया जा रहा है।

कैदी को कोरोना मरीज पाये जाने पर उसे तुरंत रिम्स या जिला अस्पताल भेज दिया जाता है। जेल के हरेक वार्ड में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है।

कारा महानिरीक्षक ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर कैदियों के खान-पान और डायट चार्ट तैयार किया जाता है। कारापालों को निर्देश दिया गया है कि चाय की जगह काढ़ा, नींबू चाय या विटामिन सी की गोली दी जाए है।

उन्होंने बताया कि मुलाकाती सिस्टम पर अभी रोक लगा दी गई है। फोन से बात करवायी जाती है। बूथ पर भीड़ नहीं लगे, होटवार जेल में 6 बूथ बनाये गए हैं। टोकन सिस्टम लागू किया गया है। इसके अलावा बंद कैदियों को तीन-तीन मास्क दिये गए हैं।

जेलों में साफ-सफाई के बारे में पूछने पर अपनी साफगोई पेश करते हुए उन्होंने कहा कि जेलों में साफ-सफाई की स्थिति अच्छी है। सोशल डिस्टेंसिंग के अलावा बेड, वाशरूम और सेनिटाइजेशन पर खासा ध्यान दिया जा रहा है। वैसे अन्य जेलों से होटवार जेल में अच्छी व्यवस्था है।

कोरोना जांच के संबंध में उन्होंने बताया कि जेलों में सौ फीसदी जांच हो रही है। जेलों में करीब 500 कैदियों का टेस्ट किया जा चुका है। इस मामले में स्वास्थ्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने भी निर्देशित कर दिया है।

उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हर महीने उच्चस्तर कमेटी की बैठक होती है। इसके अलावा जिन जेलों में कैदियों की संख्या अधिक है, उन्हें दूसरी जेलों में शिफ्ट भी किया जा रहा है।

कैदियों के पेरोल पर छोड़ने के बारे में पूछने पर उन्होंने दो टूक कहा कि इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है, जहां तक लालू जी का प्रश्न है तो इसकी जवाबदेही रिम्स के पास है। हालांकि जो सुविधा उन्हें पेइंग वार्ड में मिल रही थी, वही सुविधा उन्हें वहां भी मिलेगी।

उल्लेखनीय है कि कोरोना काल के शुरुआती दौर में, यानी मार्च में ही सुप्रीम कोर्ट ने इस संकट की घड़ी में जेलों में बंद कैदियों के स्वास्थ्य की खुद ही चिंता की।

कोर्ट ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को कैदियों की रिहाई के बारे में निर्देश दिये। वैसे यह पहला अवसर था, जब किसी महामारी की वजह से कोर्ट ने जेलों में बंद कैदियों को पेरोल पर रिहा करने पर विचार करने का निर्देश राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिया।

चूंकि मार्च माह से लेकर मई-जून तक कोरोना मरीजों की संख्या में वैसी वृद्धि नहीं हुई थी। इसलिए उस समय राज्य की जेलों में बंद कैदियों को विशेष केस में असमय कारा मुक्ति, पेरोल या अग्रिम जमानत का वैसा लाभ नहीं मिल सका।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 26 मार्च को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए राज्य की उच्चस्तरीय कमेटी ने यह निर्णय लिया था। कमेटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति एचसी मिश्रा हैं, जबकि सदस्यों में पूर्व अपर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह व पूर्व कारा महानिरीक्षक शशि रंजन शामिल थे।

वैसे नए कारा महानिरीक्षक ने उच्चस्तरीय बैठक में पेरोल को लेकर कोई सूचना देने में अपनी असमर्थता जतायी।

पूर्व जेल आईजी शशि रंजन के समय जेल के अंदर ही मास्क बनाये जा रहे थे, वो अब भी जारी है, ऐसा जेल आईजी का कहना है। उनका कहना है कि सभी कैदियों को मास्क भी मुहैया कराया जा रहा है। जेल के अंदर सैनिटाइजर बनाने का भी काम शुरू है।

हालांकि पूर्व जेल आईजी शशि रंजन के कार्यकाल में जेलों क्षमता से अधिक वाली जेलों से कैदियों को लोकल कोर्ट के आदेश से दूसरी जेल में शिफ्ट किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश आने के बाद इस दिशा में राज्य के पूर्व जेल आईजी ने बेहतर काम किया था। उन्होंने कोर्ट के आदेश पर 1316 कैदियों को दूसरी जेलों में शिफ्ट किया था।

झारखंड में 7 सेंट्रल, 16 मंडल कारा, 5 उपकारा और एक ओपन जेल है। राज्य की 7 सेंट्रल जेलों में रांची, हजारीबाग, जमशेदपुर, दुमका, डालटनगंज, गिरिडीह और देवघर हैं। वहीं 16 मंडलकारा हैं, जिनमें धनबाद, चाईबासा, सरायकेला, गढ़वा, लातेहार, चतरा, कोडरमा, बोकारो (चास), जामताड़ा, पाकुड़, गोड्डा, साहेबगंज, सिमडेगा, लातेहार और गुमला जिले शामिल हैं। इसके अलावा 5 उपकारा हैं, जिनमें खूंटी, तेनुघाट, रामगढ़, राजमहल, मधुपुर शामिल हैं। राज्य का एकमात्र ओपन जेल हजारीबाग में है।

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