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Sunday, September 26, 2021
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    नालंदा में खुलेगा बिहार का पहला अन्न बैंक

    एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। नालंदा में ‘नालंदा अन्न बैंक’ खुलेगा। अन्न बैंक का संचालन राजकुमार सिंह स्मृति न्यास द्वारा किया जाएगा। इसका मुख्यालय सिलाव प्रखंड का चंडीमौ होगा

    चंडीमौ में बुद्धिजीवियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस अन्न बैंक का विधिवत शुभारंभ 16 अक्टूबर 2020 को विश्व खाद्य दिवस के मौके पर किया जाएगा।

    राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने कहा कि  कोरोना वायरस जैसे वैश्विक महामारी के समय हकीकत सामने आ गई है। हजारों लाखों लोग अनाज के लिए तरस रहे हैं।

    वैसे लोगों के सहायता के लिए अन्न बैंक की जरूरत है। कृषि प्रधान देश होते हुए भी ग्रामीण परिवेश में रहने वाले किसान और मजदूरों की माली हालत अच्छी नहीं है। वे तंगहाली से सालों जूझते रहते हैं।

    अन्न बैंक का उद्देश्य बताते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे और भूख से न मरे। वैसे जरूरतमंद लोगों को इस अन्न बैंक से अनाज बिना पैसे लिए, लेकिन कुछ शर्तों के आधार पर आवश्यकता अनुसार दिए जाएंगे।

    नालंदा में यह योजना सफल होने  पर बिहार के दूसरे जिलों और प्रखंडों में भी नालंदा अन्न बैंक का ब्रांच खोलने पर विचार किया जाएगा।

    ‘प्रकृति’ सचिव राम विलास ने कहा कि अन्न बैंक समय की पुकार है। इस समय देश और प्रदेश संकट के दौर से गुजर रहा है। भूखा कोई न रहे इसके लिए प्रखंड और पंचायत स्तर पर अन्न बैंक अपेक्षित प्रतीत होता है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से उत्पन्न संकट के दौरान गरीब और लाचार लोगों को खाद्यान्न मुहैया कराने में अन्न बैंक की उपयोगिता सार्थक सिद्ध होगी।

    बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर शिवेंद्र नारायण सिंह ने कहा की इलाके में कोई भूखा न रहे, इसके लिए अन्न बैंक मील का पत्थर साबित होगा। बिहार चहुमुखी और बहुमुखी विकास के मार्ग पर है।

    बावजूद हजारों लाचार और असहायो को दो वक्त की रोटी नहीं मिल पा रही है।

    नव नालंदा महाविहार डीम्ड यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक डॉ श्रीकांत सिंह ने कहा कि कोई  ग्रामीण भूखा न रहे इसके लिए अन्न बैंक की आवश्यकता है। कोई भी जरूरतमंद इस बैंक से अनाज लेकर अपना और परिवार का भूख मिटा सकता है।

    प्रोफेसर विजय रामरतन सिंह ने कहा कि किसानों के पास कृषि योग्य भूमि है। लेकिन सिंचाई के साधन और पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं।

    जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाएं किसान और मजदूरों को कमर तोड़ कर रख दिया है। प्रतिकूल परिस्थिति में अन्न बैंक की बहुत उपयोगिता होगी।

    प्रोफेसर परमानंद सिंह ने कहा कि भूख से लड़ने के लिए अन्न बैंक का खुलना जरूरी है। इसके खुलने से इलाके में कोई भूखा नहीं रहेगा। यह उन्हें विश्वास है।

    इस अवसर पर पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुबोध कुमार, प्रकृति अध्यक्ष एवं मुखिया नबेन्दू झा, सुरेश सिंह, राम नरेश सिंह, जनार्दन सिंह, शिप्रा देवी , पंकज कुमार, परीक्षित नारायण सुरेश, साधु शरण सिंह, विपिन कुमार, लाल सिंह, अरुण कुमार, रूपेश कुमार एवं अन्य उपस्थित थे। बैठक में सोशल डिस्टेंस का अनुपालन किया गया।

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