तेजस्वी के इस दर्द को समझिए ‘चच्चा’, अन्यथा कभी माफ नहीं करेगा बिहार का कोई ‘बच्चा’

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। वेशक बिहार में चुनाव आयोग की भारी लापरवाही के बीच बनी जदयू-भाजपा नीत नीतीश सरकार की घोर अकर्मण्यता से बिहार में कोरोना संक्रमण एक भयावह रुप धारण कर चुकी है। सरकार के सारे तंत्र धाराशाही हैं। आम जन की बात तो दूर बड़े-बड़े अफसर-जजों तक बदइंतजामी के शिकार हो रहे हैं…

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तेजस्वी के इस दर्द को समझिए ‘चच्चा’, अन्यथा कभी माफ नहीं करेगा बिहार का कोई ‘बच्चा’

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। वेशक बिहार में चुनाव आयोग की भारी लापरवाही के बीच बनी जदयू-भाजपा नीत नीतीश सरकार की घोर अकर्मण्यता से बिहार में कोरोना संक्रमण एक भयावह रुप धारण कर चुकी है। सरकार के सारे तंत्र धाराशाही हैं। आम जन की बात तो दूर बड़े-बड़े अफसर-जजों तक बदइंतजामी के शिकार हो रहे हैं…

अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की भारी किल्लत है। डाक्टर भी स्तब्ध मायूस होने के आलावे कुछ नहीं कर पा रहे। हर तरफ बेड और ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा है। सीएम नीतीश कुमार और उनके नकारे स्वास्थ्य तंत्र (मंत्री मंगल पाण्डेय) की सारी गतिविधियां ऑनलाईन मीडिया तक ही सीमित है।

इसी बीच आज बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एंव राजद नेता तेजस्वी यादव ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर पूरे सरकारी व्यवस्था को बीच चौराहा नंगा कर दिया है।

तेजस्वी ने लिखा है कि “इतना असहाय, असमर्थ कभी अनुभव नहीं किया। एक इंसान होने के नाते चाहकर भी गुहार लगा रहे, मदद माँग रहे, तड़प रहे सभी ज़रूरतमंदो की मदद नहीं कर पा रहा। अस्पतालों में फोन लगवाओ तो जवाब आता है- “कुछ नहीं कर सकते सर! बेड नहीं है। इंजेक्शन नहीं है, ऑक्सीजन नहीं है। कैसे मदद करें?”

उन्होंने आगे ट्वीट कर लिखा कि “अधिकारियों को फोन लगवाओ तो फोन बजते रह जाता है। कोई उठाता नहीं है। अधिकारी या तो सीएं  की भी सुन नहीं रहे या मुख्यमंत्री को व्यवस्था दुरुस्त करने में कोई रुचि ही नहीं? कोई ऐसी सुनिश्चित हेल्पलाइन नहीं है, जहाँ लोग फोन कर रीयल टाइम बेड,ऑक्सीजन या दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ले पाएँ।

नागरिकों के लिए एक तरफ बेपरवाह व भ्रष्ट सरकारी व्यवस्था का अंधा कुआं है तो दूसरी तरफ काला बाज़ारी, मुनाफाखोरी और आँकड़ों की हेरा-फेरी। भ्रष्ट सरकार धृतराष्ट्र की तरह हाथ पर हाथ धरे बैठी है। लोगों को मरते छोड़ सरकार बस हेडलाइन मैनेजमेंट  व मौत के आँकड़ों को कम करने में लगी है।”

उन्होंने अगर ट्वीट में लिखा है कि “हमारी पार्टी और कार्यकर्ता लोगों की मदद कर रहे है लेकिन एक सीमा के बाद ऑक्सिजन नहीं मिल पाती, अस्पतालों में बेड नहीं मिल पाते। हम सीमित संसाधनों के साथ लोगों की मदद करने के लिए आगे बढ़ते हैं तो हाथ ऊपर कर चुकी सरकार और उसकी भ्रष्ट सरकारी व्यवस्था दीवार बनकर रास्ता रोक देती है।

हमने सर्वदलीय बैठक में सरकार को इस महामारी से निपटने के लिए 30 सकारात्मक सुझाव दिए थे पर एक पर भी अहंकारी सरकार ने अमल नहीं किया। नीतीश सरकार की आम लोगों की तकलीफ दूर करने की कोई मंशा ही नहीं है। सरकार बस विज्ञापन देकर और आँकड़ों को कम कर धूल झोंकने के फ़िराक में है।”

उल्लेखनीय है कि कोरोना की दूसरी लहर से बचाव के लिए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बिहार के लोगों के लिए खुला खत भी लिख चुके हैं। खत में वह बिहार के लोगों से हिम्मत और हौसला रखने की अपील कर चुके हैं।

उन्होंने कहा था कि संकट की इस घड़ी में सही फैसले से ही हम खुद को सुरक्षित रख पाएंगे। संक्रमित होने के बाद उपचार कराने से बेहतर है, हम संक्रमित न होने के उपायों पर ध्यान दें। सहयोग, सक्रियता, साहस, सतर्कता और जागरूकता के साथ इस खतरे का सामना करना है।

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