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    Friday, March 1, 2024
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      जाति की आग में झुलस रही सोने की चिड़िया

      एससी-एससी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर अध्यादेश लाने के बाद केंद्र सरकार की मुश्किलें बढ़ गई  है। देशभर में सवर्णों का प्रदर्शन बीजेपी के गले की फांस बन गया है। छह सितंबर को सवर्णों ने भारत बंद बुलाया है।

      एक्सपर्ट मीडिया न्यूज (राजीव)। इस एससी एसटी एक्ट कानून को लेकर सवर्णों का कहना है कि ऐसा काला कानून अंग्रेजों के जमाने में भी देश में लागू नहीं था। इस कानून का गलत फायदा उठाया जाता रहा है और वर्तमान में भी धड़ल्ले से जारी है।BHARAT BAND NEW 1

      बिहार में भी कई बार सवर्ण इस एक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सवर्णों के इस बंद का असर पूरे देश में देखने को मिल रहा है वही नालंदा जिले में भी एससी एसटी एक्ट के विरुद्ध बंद में शामिल लोगों ने जहां-तहां  आगजनी प्रदर्शन कर राष्ट्रीय राज्य मार्ग समेत स्टेट हाईवे समेत कई इलाकों को जाम लगा दिया, जिससे यातायात पूरी तरह से प्रभावित हो गया।

      यहां प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग उठा रहे।दरअसल, दलित कानून (एससी-एसटी एक्ट) को लेकर सवर्णों का सरकार के खिलाफ गुस्सा तेज हो चला है।

      एक्ट के विरोध में प्रदर्शनकारियों का सबसे बड़ा प्रदर्शन बिहार राज्य में नालंदा समेत गया पटना आरा शेखपुरा बेगूसराय मुजफ्फरपुर में देखने को मिला। यहां प्रदर्शनकारियों ने राजगीर बख्तियारपुर रेलवे लाइन को भी पूरी तरह बाधित कर दिया है जिससे श्रमजीवी एक्सप्रेस अभी तक राजगीर से नहीं खुली है।

      बिहार शरीफ के दीपनगर  नालंदा मोड सिलाव में NH 82 पर प्रदर्शनकारियों ने जमकर आगजनी की एवं सरकार के विरुद्ध नारेबाजी किया, वही  राजगीर गिरियक पथ को सिठौरा गांव जाम लगा दिया।

      प्रदर्शन को देखते हुए ये अनुमान लगाया जा सकता है कि बिहार में भी सवर्णों के बंद का असर देखने को मिलेगा और सरकार इस पर कोई बड़ी फैसला लेने को मजबूर हो सकती है।

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