चुनावी सरगर्मी में सक्रिय हुए ठेकेदार की जाल में उलझते वोटर

यह ठेकेदार ऐसी स्थिति भी पैदा कर रहे हैं कि प्रत्याशी उनसे मिलें तो प्रत्याशियों को काफी फायदा हो जाएगा और उन्हें काफी वोट भी मिल जाएंगे। चुनाव की तिथि तय हो गई हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा सक्रिय हो गए हैं वोटों के ठेकेदार……….”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। चुनावी सरगर्मी तेज हो गई। ऐसे में वोटों के ठेकेदार पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। यह वोटों के ठेकेदार समाज, जाति, गली-मोहल्लों और गांवों में अपने प्रभाव को दर्शाकर प्रत्याशियों को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका खासा प्रभाव है और वह काफी वोट दिलवा देंगे।

आलेखकः अविनाश कुमार

इन ठेकेदारों ने जाति-बिरादरी में अपने संगठन बना रखे हैं। गली-मोहल्लों से लेकर गांवों में यह खासे सक्रिय हो गए हैं।

इस तरह की भूमिका इन ठेकेदारों ने बनानी शुरू कर दी है कि अमुक बिरादरी या अमुक क्षेत्र में उनका खासा प्रभाव है और यदि प्रत्याशी उनके पास आता है तो उसे खासा फायदा होगा।

यही नहीं इन ठेकेदारों ने अपने कुछ चमचे भी पाल रखे हैं और वह प्रत्याशी और उसके खास लोगों को जाकर बता भी रहे हैं कि यदि इस व्यक्ति से मिलकर उसे अपना बना लिया जाए तो अमुक इलाके का या जाति-बिरादरी का वोट मिल सकता है।

प्रत्याशी और पार्टियों के नेता भी अपने स्तर से इसकी टोह ले रहे हैं। कुछ इन्हें चोरी-छिपे अपने साथ लेकर घूम रहे हैं, क्योकि यह वोटों के ठेकेदार खुद को अराजनीतिक बताते हुए यह कह रहे हैं कि वह उन्हें सपोर्ट तो कर देंगे, लेकिन मंच पर नहीं आएंगे।

वहीं कुछ ठेकेदारों के बारे में यह तैयारी की जा रही है कि क्यों न उन्हें किसी कार्यक्रम में मंचासीन करा शामिल करा लिया जाए। इन वोटों के ठेकेदारों ने खुद को इस तरह से दर्शा रखा है कि उनका काफी प्रभाव है। इस बात को वह प्रत्याशियों के सामने अपने हथकंडों से प्रस्तुत भी कर रहे हैं।

यह बाद की बात है कि इन ठेकेदारों के कहने पर उनकी बिरादरी, जाति, मोहल्ला, गांव कितना वोट देता है, लेकिन इनकी सक्रियता फिलहाल चरम पर है।

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