पीत पत्रकारिताः सच देखने के पहले सुनिए News11 की झूठ

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एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क।  देश की पत्रकारिता को कलंकति करने के मामले में झारखंड से एक और नाम जुड़ गया है। निश्चित तौर पर यह बेहद ही शर्मनाक दौर है। खासकर झारखंड में पत्रकारिता का जौ दौर चल रहा है।

ऐसे में  कह सकते हैं कि झारखंड के पत्रकारों के लिए भविष्य के लिए कब्र खोदने की तैयारी चल रही है। वैसे पत्रकारों को तय करना होगा कि उन्हें क्या करना है।

हम बात कर रहे हैं, झारखंड के खबरिया चैनल न्यूज 11 की, जो अब न्यूज 11 भारत के नाम से जाना जा रहा है। हद है कि इस चैनल के टैग लाईन जिसमें यह लिखा गया है कि सच है तो दिखेगा! 

यहां एक्सक्लेशन का निशान देने के पीछे का कारण जान लीजिए। क्योंकि इस चैनल को लेकर हम आज जो खुलासा करने जा रहे है, उसमें सच दिखाने से पहले के खेल को दिखाने जा रहे हैं।

झारखंड में चल रहे कई खबरिया चौनलों की स्थिति खस्ताहाल है। लेकिन न्यूज 11 भारत पूरे लय में है। हम इसकी सराहना करते हैं, लेकिन जिन खबरों को लेकर चैनल पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, उसकी सच्चाई जानने के बाद आपको सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि चैनल के मालिक बहुत बड़ा ब्लैकमेलर माना है।

एक मामूली से रिपोर्टर से चैनल का मालिक बनने के सफर को काफी कम समय में पूरा करनेवाला अरूप चटर्जी मौका परस्त इंसान रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है।

इसने इतने कम समय में जो अपनी पहचान बनाई है, उसके पीछे का सबसे घिनौना रूप ब्लैकमेलिंग के लगते आरोप ही है।

पूरे राज्य में इसने अपने रिपोर्टर बहाल कर रखे हैं, लेकिन तनख्वाह चहेतों को ही देता है, बाकी से क्या करवा रहा है, ये जांच का विषय है। आइए अब मुद्दे पर आते हैं। चलिए पहले आप इस वीडियों क्लिप को सुनिए…. 

तो सुना आपने.. इस वीडियो क्लिप में जो दो व्यक्ति बात कर रहा है, उसमें से एक व्यक्ति अरूप चटर्जी है, जो न्यूज 11 भारत का मालिक है। जबकि दूसरा ट्रांसपोर्टर का सहयोगी। लेकिन इन दोनों के बीच आखिर कौन सी खिचड़ी पक रही है, जरा उसपर भी गौर फरमाइए।

दरअसल, यह पूरा मामला एशिया के सबसे बड़े कोल परियोजना सीसीएल का चतरा का है. जहां चल रहे मगध- आम्रपाली परियोजना में टेरर फंडिग मामले में एनआइए और इडी जांच के दायरे में आए कोयला कारोबारी सोनू अग्रवाल के मामले को लेकर खबर मैनेज करने के मामले को लेकर चैनल के मालिक अरूप चटर्जी खुद सोनू अग्रवाल के सहयोगी से संपर्क कर उससे बात कराने को कह रहा है।

इतना ही नहीं अरूप चटर्जी के शब्दों को जरा गौर से सुनिए क्या कह रहा है, वह कह रहा है, मुझे पता है, कोर्ट में क्या होता है। मतलब देश के चौथे स्तंभ को चलानेवाला माननीय न्यायालय को भी कटघरे में खड़ा कर रहा है। इसकी हिमाकत की दाद देनी होगी।

अब सवाल ये उठता है, कि आखिर चैनल का मालिक कारोबारी से बात करने को व्याकुल क्यों है। क्यों वह बार-बार कारोबारी के सहयोगी से संपर्क कर रहा है। हां एक और अहम सवाल यहां यह भी है, कि जरा इस स्नैप शॉट पर गौर कीजिए.. देखिए कैसे चैनल ने अपने वेबसाइट पर खबर चलाकर उसे डिलीट कर दिया है।

वैश्विक संकट के इस दौर में कई मामलों में जमानत पर चल रहा यह आरोपी चैनल मालिक तीन-तीन अंगरक्षक लेकर चलता है। क्या सरकार का संरक्षण इसे नहीं कहेंगे।

वैसे सरकार की अगर हम बात करें तो यह शातिर मिजाज चैनल मालिक मौके का फायदा उठाने में माहिर है। सत्ता की हवा जिस ओर बहा इसने उसी का रूख कर लिया।

यही कारण है, कि इसे आज तक सरकारी संरक्षण मिलता रहा है। वैसे इसके दिन जल्द ही लदनेवाले हैं। हम समाज, सरकार और व्यवस्था तंत्र से अपील करते हैं कि मीडिया की छतरी में बैठे वैसे शातिरों से प्रताड़ित हो रहे हैं, तो वे खुलकर सामने आएं और उन्हें नंगा करें।  

पत्रकारिता के आड़ में ऐसे लोगों के द्वारा जो खेल खेला जा रहा है, उसे बेनकाब करना जरूरी हो गया है। वैसे इस चैनल में के रिपोर्टरों को भी ऐसे पाप में भागीदार बनने से बचनी चाहिए।

वैसे धनबाद से लेकर चतरा और रांची से लेकर जमशेदपुर तक फैले इसके नेटवर्क से संबंधित कई मामले सामने आए हैं। उससे हम आपको अवगत जरुर कराएंगे।   

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