अवैध कोयला कारोबार पर संशय जारी, जमीनी सच्चाई कोसों दूर

वैसे यह आरोप एक निजी खबरिया चैनल ने लगाई है। जिसकी जमीनी हकीकत आरोप से कोसों दूर है..

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। वैश्विक संकट के इस दौर में पूरे देश के साथ झारखंड भी हर दिन एक नई चुनौतियों से जूझ रहा है। इन सबके बीच सरायकेला- खरसावां जिला पुलिस पर अवैध कोयला कारोबारियों को पराश्रय देने का आरोप लगा है।

गौरतलब है कि 17 मई को अचानक एक खबर वायरल हुई, जिसमें एक खबरिया चैनल द्वारा दावा किया जा रहा था कि रामगढ़ से बंगाल के किसी कोयला कारोबारी का कोयला लदा 25 ट्रक झारखंड के रास्ते कहीं भेजा जा रहा है। जिसे चौका थाना क्षेत्र के पेट्रोल पंप व आसपास के इलाकों में छिपा कर रखा गया है।

इतना ही नहीं खबरिया चैनल ने यह भी दावा किया कि इन कोयले के गाड़ियों को छोड़ने के एवज में मोटी रकम की डील भी की जा रही है। हालांकि इस खबर की पड़ताल करने जिले के अन्य मीडिया कर्मी मीडिया कर्मियों ने रात को ही चौक थाना का रुख किया।

इतना ही नहीं मीडिया कर्मियों ने चौका थाना अंतर्गत आठ-दस पेट्रोल पंपों का भी पड़ताल किया किया, इसके अलावा एनएच 33 के आसपास सुनसान इलाकों में भी पड़ताल किया, लेकिन कोयले से भरे ट्रक कहीं नजर नहीं आए।

उसके बाद स्थानीय मीडिया कर्मियों ने चौक थाना प्रभारी से पूरे मामले का पक्ष जाना। जिस पर चौका थाना प्रभारी सत्यवीर सिंह ने बताया कि दिन में ही यहां 23 गाड़ियां आयीं थी, जिन्हें अलग-अलग जगह पर खड़ा कर रखा गया था।

उन गाड़ियों में नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बन रहे पुलिस पिकेट के लिए बिल्डिंग मटेरियल के सामान आए थे। जिन्हें अधिकारियों के निर्देश के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच राड़गांव के रास्ते रायजामा भिजवाया गया।  वही कोयला के संबंध में उन्होंने बताया कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है, ना ही ऐसी कोई गाड़ियां यहां पहुंची है।

उधर मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के एसपी मोहम्मद अर्शी सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले को दुर्भावना से ग्रसित करार देते हुए साफ कर दिया कि जिन गाड़ियों में कोयला होने का दावा किया जा रहा है, वह सरासर अफवाह और झूठा है।

उन्होंने बताया कि सभी गाड़ियों में बिल्डिंग मैटेरियल्स भरे हुए थे जिसे रायजामा में निर्माणाधीन पुलिस पिकेट के लिए भेजा गया।

वही एसपी ने बताया कि अगर किसी को इसकी जानकारी थी कि जिले में कहीं अवैध कोयला लदे गाड़ियों का संचालन हो रहा है, तो उन्हें जिला पुलिस, खनन विभाग या अन्य वरीय पदाधिकारियों को सूचना देनी चाहिए थी।

उन्होंने यह भी दावा किया कि अभी भी अगर कोई उन्हें कोयले से भरी गाड़ियों से संबंधित दस्तावेज अथवा वीडियो फुटेज उपलब्ध करा देते हैं, तो निश्चित तौर पर बड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इन सबके बीच खबरिया चैनल ने एक बार फिर से जिला पुलिस पर हमले तेज कर दिए हैं।

जहां चैनल ने दावा किया है कि जिन गाड़ियों में बिल्डिंग मैटेरियल्स होने का दावा किया जा रहा है दरअसल उसमें कोयले ही थे। वहीं खबरिया चैनल एसपी के बयान को भी झुठलाते हुए दावा कर रहा है, कि एसपी ने कोयले से लदे गाड़ियों को सीमेंट, गिट्टी, छड़, पत्थर वगैरह बताकर मामले को पेचीदा बना दिया है।

हालांकि खबरिया चैनल जिन तथ्यों को आधार बता रहा है वह सच्चाई से कोसों दूर है। क्योंकि उस चैनल पर भी वह फुटेज नहीं दिखाया जा रहा है, जिसमें 25 ट्रकों में कोयले  लदे होने का दावा किया जा रहा है।

न ही चैनल द्वारा चौका थाना क्षेत्र के अलग-अलग पेट्रोल पंपों या सुनसान इलाकों में खड़े कर रखे गए ट्रकों को दिखाया जा रहा है।

खबरिया चैनल पर जिस ट्रक ड्राइवर के बयान को दिखाया जा रहा है, उसके अनुसार ट्रक ड्राइवर ट्रक में लदे सामान के संबंध में नहीं बता रहा है। वह केवल इतना बता रहा है कि उसे नहीं पता इस गाड़ी में जो सामान है वह किसका है।

ड्राइवर यह बता रहा है कि मालिक को फोन किया गया है जो आ रहा है, लेकिन ट्रक का नंबर उस वीडियो फुटेज में नहीं दिखाया जा रहा है। केवल ट्रक को ही दिखाया जा रहा है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि जरूर खबर को तोड़ मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

इसके अलावा खबरिया चैनल पर जिस चालान की बात की जा रही है वह सीसीएल का चालान जरूर है, लेकिन चालान में कहीं से भी यह मेंशन नहीं किया गया है, कि कोयला जा कह रहा है।

हां खबरिया चैनल में इसका दावा जरूर किया जा रहा है कि कोयला जहां से चला था वापस वही पहुंच गया। ऐसे में चौका थाना या सरायकेला पुलिस की भूमिका कहां से तय होती है इसकी जांच भी जरूरी है।

देखिए वीडियोः क्या है पूरा मामला….

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