बिहार डीजीपी सशरीर हाज़िर हों, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का आदेश

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बिहार पुलिस की ओर से यदि डीजीपी के सशरीर उपस्थित होने के पहले पूरी रिपोर्ट जमा नहीं करती है तो आयोग राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के भी आदेश जारी कर सकती है

नई दिल्ली (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)।  बिहार में कु’शासन की अनेक विभत्व तस्वीरें आए दिन सामने आती रही है। लेकिन नीतीश सरकार उन सभी कमियों को मूकदर्शक बन कर दबाते रही है।

यहां, आये दिन मानव अधिकार के हनन करने में बिहार पुलिस के साथ अधिकारयों ने  भी रिकॉर्ड तोड़ रखा है।

हाल ही में एक मामला प्रकश में आया था कि कृषि अधिकारी ने एक चौकीदार से बीच सड़क पर उठक बैठक करवाया। इस मामले में बाद में कार्यवाही भी हुई। परन्तु बिहार के जंगल राज में कई ऐसे घटनाएं हैं, जिसे आम जनता तक नहीं लाया जाता। जो वही दब कर रह जाता है।

ऐसा ही एक वारदात बिहार के नालंदा जिले की थी। जब राजगीर के वन विभाग गेस्ट हॉउस से टीवी चोरी के आरोप में 5 वनकर्मी के साथ बेरहमी से वहां की पुलिस ने मार पीट किया था। जिससे सभी वन कर्मी अधमरा हो गए थे।

इस वारदात को तात्कालीन पुलिस अधीक्षक सुधीर पोरिका, वर्तमान अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सोमनाथ प्रसाद, पुलिस इंसपेक्टर उदय कुमार, थानाध्यक्ष बिजेन्द्र प्रसाद सिंह ने मिल जुलकर अंजाम दिया था।

तब एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क की टीम ने सब कुछ प्रकाश में ला दिया, लेकिन सरकार कोई कार्रवाई तो दूर किसी स्तर पर जांच कराना तक उचित नहीं समझी।

इसके बाद मानवाधिकार कार्यकर्त्ता ओंकार विश्वकर्मा ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज करवाई। उसके बाद यह मामला काफी गंभीर हो गया।

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पहली बार राज्य के पुलिस मुख्यालय से 25 फरवरी 2019 को रिपोर्ट तलब किया गया था, जिसके बाद राज्य के पुलिस अधिकारी ने अपना रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग को समर्पित नहीं किये।

 जिसके बाद आयोग द्वारा पुनः 6 नवम्बर 2019 को डीजीपी से से रिपोर्ट तलब किया गया। फिर भी पुलिस ने मानवाधिकार आयोग को कोई रिपोर्ट नहीं भेजी।

इसके बाद मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को अति गंभीरता से लेते हुए बिहार राज्य के पुलिस महानिदेशक को अपने शक्तियों का प्रयोग करते हुए मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के खंड 13 का प्रयोग करते उन्हें 14 जुलाई 2020 को सशरीर रिपोर्ट के साथ उपस्थित होने का आदेश जारी किया है।

आयोग ने यह भी कहा है की अगर समय से पहले यह रिपोर्ट प्राप्त हो जाता है तो रियायत दी जा सकती है।

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