NH-33 फोर लेन पर एक बड़ा हादसा को दावत देती बिजली विभाग की यह घपलेबाजी

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रांची। ‘अंधेर नगरी, चौपट राजा’ वाली कहावत यदि चरितार्थ होते देखना हो तो रांची (नेवरी) से हजारीबाग फोरलेन नेशनल हाइवे पर कहीं भी मिल जायेगा। कहने को तो फोर लेन बन गई,  बनाने वाली एजेंसी भारी-भरकम टोल टैक्स भी वसूल रही है लेकिन जहां देखिये, वहां नाना प्रकार के अव्यवस्था का आलम व्याप्त है।

बहरहाल, इस मार्ग पर चकला मोड़ के पास बिजली विभाग ने जिस तरह से अपने कार्यो को अंजाम दिया है, वह कभी भी एक बड़े हादसे की वजह बन सकती है। यहां फोर लेन के उपर से सिकिदिरी हाईडल प्रोजेक्ट और नामकुम फीडर के बीच हाई वोल्टेज तार गुजरती है। उसके नीचे 440 वोल्ट की तार पहले से थी।

इधर एक सप्ताह पहले नेशनल हाइवे की जमीन पर पोल गाड़ बिजली विभाग ने मनमानी करते हुये 11 हजार वोल्ट का नंगा तार गुजार दिया है। जबकि यहां पूर्व के प्रावधानों के अनुसार अंडरग्राउंड वायर बिछानी थी, जैसा कि सड़क के दूसरे तरफ किया गया है।

लेकिन उस योजना के टेंडर को बिचौलिये ठेकेदार हजम कर गये। इस पर किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने कोई ध्यान नहीं दिया।

इधर क्षेत्र में बिजली की समस्या की बाबत जब विभाग पर दवाब पड़ा तो उसने हाई टेंशन वोल्टेज तार से सटा कर 11 हजार वोल्ट का नंगा तार प्रवाहित कर दिया। इस हेतु पोल गाड़ने के समय आस-पास के लोगों को इस भ्रम में रखा कि निर्धारित स्थान पर कम वोल्टेज की शिकायत को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर नया ट्रांसफार्मर लगाया जा रहा है।

इधर, जब से 2 लाख 36 हजार पावर वोल्ट नंगे तार के नीचे 11 हजार के तार लगाये गये हैं, तब से आसपास के घरों में 440 बिजली नहीं रहने पर भी झनझनाहट देती विद्युत प्रवाह होती रहती है। क्योंकि हाईटेंशन क्रॉस वायर के ठीक बामुश्किल 15-20 फीट आगे पहले से लगे पोल से 440 से महज एक-ढेड़ फीट उपर 11 हजार वोल्ट का नंगा तार गुजार दिया गया है।

नतीजतन, आकाशीय बिजली कड़कते ही लोगों के घरों के इलेक्ट्रिक उपकरण क्षतिग्रस्त होने रहे हैं। एलइडी, सीफेल, ट्यूब लाइट आदि जैसे बल्ब फ्यूज हो रहे हैं।

दरअसल यह पूरा खेल बिजली विभाग के अफसरों और ठेकेदारों की घपलेबाजी से जुड़ी है। इस घपलेबाजी को ढंकने के लिये सबने ऐसा कुकर्म कर डाला है कि यहां कभी भी एक बड़ा हादसा हो सकता है।

यह एक बड़ा जांच का विषय है कि जब पहले यहां अंडरग्राउंड बिजली केवल बिछाने की निविदा पास हो गई थी तो अब तक उसे अमल में क्यों नहीं लाया गया? उस निविदा की भुगतान की गई राशि कहां गई ? आखिर एनएच-33 द्वारा अधिकृत रैयती जमीन, जिसपर आम जनता के लिये सर्विस लेन बनानी थी, उसके ठीक बीचोबीच किसके परमिशन से बिजली विभाग ने पोल गाड़ दिये ? जो कि कभी भी अलग दुर्घटना को जन्म दे सकती है।

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