नालंदाः कबीर अंत्येष्टि खाता से हो रहा शिक्षकों का मानदेय भुगतान, यूं भिड़े दो विभाग

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। नालंदा जिले के चंड़ी प्रखंड में एक अनोखे खेल का भंडाफोड़ हुआ है। एक खाते पर दो विभाग आमने-सामने आ गये है। शिक्षा विभाग जिस खाते पर दावा कर रहा है। वह कबीर अंत्येष्टि योजना की बताई जा रही है।

जबकि जिला शिक्षा विभाग उस खाते को नियोजित प्रारंभिक शिक्षकों के वेतन भुगतान का खाता बताकर चंडी बीडीओ से इस सबंध में स्पष्टीकरण की मांग की है।

चंड़ी प्रखंड के कई व्हाट्सएप ग्रुप में जिला शिक्षा पदाधिकारी का एक चंडी बीडीओ के नाम पत्र वायरल हो रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जिस खाते से राशि निकाली जा रही है, वह प्रांरभिक नियोजित शिक्षकों के मानदेय के लिये खोला गया था।

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) ने चंडी प्रखंड विकास पदाधिकारी सह सचिव नियोजन इकाई को प्रेषित पत्र में उल्लेख किया है कि बिहारशरीफ, पंजाब नेशनल बैंक से प्राप्त नियोजित प्रारंभिक शिक्षकों के वेतन भुगतान का खाता के स्टेटमेंट से ज्ञात हुआ कि नियोजित शिक्षकों के वेतन भुगतान राशि की निकासी आपके द्वारा की गई है।

जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने पत्र में उल्लेख किया है कि जिस खाते को उपलब्ध कराया गया था, उससे सिर्फ़ शिक्षकों का वेतन भुगतान होना था। लेकिन नियोजन इकाई के खाते से राशि निकाल ली गई है।

इस पत्र के वायरल होने पर सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर लोग बीडीओ को घेरने लगे। उधर बीडीओ ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को स्पष्टीकरण देते हुए प्रखंड कार्यालय के पत्रांक-290/01.7.2020 को लिखे पत्र में कहा है कि उक्त खाता संख्या, जो वर्ष 2012 के भी पूर्व कबीर अंत्येष्टि हेतु उपयोग में थी।

प्रखंड कार्यालय के सभी संचिकाओं एवं पंजियों में यह खाता कबीर अंत्येष्टि हेतु संधारित थी। इसकी राशि खाते पर ही आती थी। जिसके उपरांत पंचायतों को भेज दी जाती थी।

कबीर अंत्येष्टि की राशि आँनलाइन हो जाने के उपरांत इस खाता को 13 अगस्त, 2019 से पंचम मद तथा अन्य मद हेतु उपयोग में लाया गया।

बीडीओ ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को अवगत कराया कि वर्तमान में नाजिर और अधोहस्ताक्षरी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह खाता नियोजित शिक्षकों के मानदेय भुगतान के लिये किया जा रहा है।

फिलहाल इस खाते को लेकर सश्पेंस बरकरार है। चंडी प्रखंड विकास पदाधिकारी के दावे के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी आगे क्या कदम उठाते हैं, देखना दिलचस्प होगा।

लेकिन सवाल कई है कि आखिर नियोजन शिक्षकों का मानदेय भुगतान अगर हो रहा था तो किस खाते से। अगर नहीं हो रहा था तो शिक्षा विभाग को इसकी भनक क्यों नही लगी। शिक्षकों ने आवाज क्यों नहीं उठाई। कई बातें है, जो निकलकर आनी है।

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