यूं महंगा पड़ा सीएम हेमंत सोरेन को ट्वीट करना

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सरकार बदला। सत्ता बदली। नहीं बदली तो झारखंड पुलिस की कार्यशैली। भले वैश्विक महामारी के बीच पीएम मोदी कहते हैं कि कोरोना फाइटर पुलिसकर्मियों की सहयोग करें, लेकिन जरा झारखंड के सरायकेला पुलिस की कारगुजारी तो देखिए। फिर तय कीजिए कि क्या वाकई झारखंड पुलिस के अधिकारी सम्मान पाने के हकदार हैं

रांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क डेस्क)।  मामला बीते शुक्रवार का है। झारखंड के सरायकेला- खरसावां जिले के आरआईटी थाना अंतर्गत एमआईजी 248 औऱ 247 के पड़ोसियों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसमें दबंग माने जानेवाले एमआईजी 247 निवासी आलोक दुबे और पप्पू दुबे ने अपने शराबी हिश्ट्रीशीटर साथी सुमित राय के साथ मिलकर पड़ोसी परमानंद राय के पूरे परिवार पर हमला बोल दिया।

इस हमले में परमानंद राय, पत्नी अंजू देवी, दो पुत्र सूरज और प्रिंस राय बुरी तरह से घायल हुए। घटना के बाद लहुलूहान पीड़ित परिवार आरआईटी थाना पहुंचे।

जहां केवल कागजी कार्रवाई करते हुए पूरे परिवार को मेडिकल कराने भेज दिया गया, न उन्हें थाना की गाड़ी उपलब्ध कराई गई, न ही पुलिस का कोई जवान पीड़ित परिवार के साथ गया।

बहरहाल, पूरा परिवार अकेले पहले आदित्यपुर शहरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा, जहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी घायलों को जमशेदपुर के साकची स्थित कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां से देर रात सभी इलाज करा वापस थाना लौटे।

इधर सभी आरोपी खुले में घूमते रहे। वहीं आरआईटी पुलिस  की कारस्तानी से नाराज पीड़ित परिवार ने पूरे मामले से ट्वीट कर राज्य के मुख्यमंत्री को अवगत कराया।

जहां मुख्यमंत्री ने संज्ञान लेते हुए झारखंड पुलिस मुख्यालय और सरायकेला पुलिस को पीड़ित को न्याय दिलाने का फरमान जारी किया गया।

वैसे राज्य के मुखिया तक सीधा मामला पहुंचाना आरआईटी थाना पुलिस को नागवार गुजरा।

पहले तो सीएम के ट्वीट पर आरआईटी थाना पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया, लेकिन थोड़ी ही देर में सभी आरोपी खुलेआम घूमते नजर आए।

इतना ही नहीं आरोपियों ने पीड़ित परिवार को फोन पर यह कहते हुए केस उठा लेने की धमकी दी कि पुलिस मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती। वैसे उसने सही ही कहा।

क्योंकि पूरे परिवार को मारकर लहुलूहान करने के बाद अगर सभी आरोपियों पर जमानती धाराएं लगा थाने से ही छोड़ दिया गया तो उसके दावों में सच्चाई है।

 बता दें एक ही परिवार की महिला सहित कुल चाल सदस्य गंभीर रूप से घायल हुए, सभी के सर व शरीर के कई हिस्सों से खून निकला, लेकिन जरा देखिए क्या- क्या धाराएं लगीं हैं धारा 341, 383, 337, 506 और 341 मतलब साफ है।

क्या इस मामले में 307 का कही स्थान नहीं था। वैसे इस मामले पर पीड़ित परिवार ने जिले के एसपी, एसडीपीओ और डीआईजी से भी फरियाद लगाया लेकिन, सभी ने एफआईआर का जिक्र कर कोर्ट से समझने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। इधर पीड़ित परिवार डरा सहमा हुआ है।

वैसे पूरा मामला काफी पुराना है। बताया जा रहा है, कि एमआईजी 248 में रहनेवाला परिवार गरीब है औऱ आवास बोर्ड द्वारा बने मकान पर करीब 20- 25 वर्षों से रह रहा है। वैसे इनके पास मकान का स्वामित्व नहीं है। उधर दबंग एमआईजी 247 निवासी इन्हें दबंगई का रौब दिखाकर मकान खाली करवाने की फिराक में है।

यही कारण है, कि दबंगता दिखा आए दिन दुबे परिवार इन पर जुल्म ढाहता रहा है।

वैसे घटना से तीन दिन पहले भी पीड़ित परिवार ने जानमाल की सुरक्षा को लेकर आरआईटी थाना में फरियाद लगाई थी।

ऐसे में सरायकेला के नए पुलिस कप्तान और एसडीपीओ को मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।

बताया जा रहा है, कि घटना के बाद आरोपी सुमित राय को हर्ट अटैक आया है, जिससे उनके द्वारा भी काउंटर केस किया गया है।

वहीं इसको लेकर भी पुलिस की ओर से पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि घटना के दिन अगर पीड़ित परिवार के शिकायत पर कार्रवाई हो जाती तो पूरा मामला सामने का सकता था। क्योंकि सभी आरोपी शराब के नशे में थे।

वैसे सुमित राय का आपराधिक इतिहास रहा है, और इससे पूर्व भी वह जेल जा चुका है। ऐसे मे एक अपराधी को निर्दोष बता थाना से ही जमानत दे देना, किसी को हजम नहीं हो रहा है।

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