Ex. DGP डीपी ओझा उधेड़ सकते हैं CBI जांच की परतें

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“हालांकि इस संदर्भ में जब Ex. DGP डीपी ओझा से संपर्क किया  गया तो उन्होंने इसे अदालती मामला बता अभी कुछ भी बोलने से इनकार करते हुए कहा कि बस 23 जनवरी का इंतजार कीजिए।”

पटना/रांची (खबर मंथन) । चारा घोटला मामले की सुनवाई कर रही रांची सीबीआई की विशेष अदालत में आगामी 23 जनवरी को पूर्व डीजीपी डीपी ओझा की सशरीर उपस्थिति काफी मायने रखती है।

गौरतलब है कि 90 के दशक में जब इस बहुचर्चित मामले की जांच निगरानी विभाग को सौंपा गया था उस वक्त डीपी ओझा निगरानी विभाग में आईजी के पद पर पदस्थापित थे और निगरानी की टीम उनहीं के नेतृत्व में इस मामले की जांच कर रही थी।

बाद में पटना हाइकोर्ट के आदेश से इस मामले की जांच निगरानी विभाग से लेकर सीबीआई को दे दी गई। 1990 में निगरानी ने इस मामले में मुकदमा दायर कर जांच के लिए यह मामला अपने हाथ में ले लिया।

23 अगस्त 1990 को तत्कालीन प्रतिपक्ष नेता डा. जगन्नाथ मिश्र ने अपने पत्रांक 2991/90 के द्वारा तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद को एक पत्र लिखा।

इस पत्र में तब कांग्रेस के विधायक रहे (वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष) के पत्र का हवाला देते हुए कहा गया कि ‘निगरानी ने कुछ वैसे व्यक्त्यिों पर भी मुकदमा दर्ज किया है, जिनका क्रय समिति से कुछ लेना देना नहीं है जो सर्वथा अनुचित है।’

बाद में यह पत्र तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा सीन और टिप्पणी कर निगरानी को भेज दी गइ्र थी जिस पत्र पर तत्कालीन आईजी, निगरानी डीपी ओझा के भी सीन हैं।

बाद में सीबीआई ने जब इस मामले की जांच शुरु की तो डीपी ओझा ने सीबीआई की जांच पर कई सवाल उठाए। यहां तक कि उन्हों इस संदर्भ में गृह मंत्रालय से लेकर सीबीआइ्र के तत्कालीन निदेशक से भी पत्राचार किया।

छह वर्ष पूर्व उन्होंने रांची सीबीआइ की अदालत में भी कई सवाल खड़े किए पर अदालत ने उस पर संज्ञान नहीं लिया।

सूत्रों के अनुसार अब जब डीपी ओझा को 23 जनवरी को कोर्ट में हाजिर होने के लिए अदालत ने सम्मन जारी किया है तो सबकी नजरें डीपी ओझा पर टिक गई हैं। संभव है कि उस दिन पूर्व डीजीपी सीबीआई की जांच पर सवाल खड़ा कर कुछ विस्फोटक रहस्योद्घाटन कर सकते हैं।

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