एडीसी सुबोध कुमार पर कार्रवाई की मीडियाई खबर से उद्यमी भी हैरान

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पूरे मामले पर एडीसी सुबोध कुमार से बात किए जाने पर उन्होंने कहा कि मैं इस कार्रवाई से हैरान हूं। उन्होंने बताया कि इस तरह की कोई भी जानकारी उपायुक्त महोदय की ओर से नहीं दी गई है। न ही किसी तरह की कोई विभागीय सूचना ही उन्हें मिला है.

jरांची (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। सरायकेला-खरसावां जिले के एडीसी सुबोध कुमार पर कार्रवाई की खबर मीडिया में आने के बाद पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना हुआ है। वैसे इस संबंध में जिले के उपायुक्त की ओर से किसी तरह की कोई जानकारी नहीं दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि लॉकडाउन पार्ट टू शुरू होने के बाद जिले के उद्योगों को खोलने की अनुमति देने के लिए एडीसी  सुबोध कुमार और पूनम कच्छप को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था।

लेकिन एडीसी  सुबोध कुमार और उनके  सहायक पंकज कुमार आदित्यदेव  ने  दूसरे नोडल ऑफिसर पूनम कच्छप  को बगैर संज्ञान में दिए  उपायुक्त के नाम का सहारा लेकर उद्यमियों से उद्योग चालू करने के एवज में पैसों की मांग कर रहे थे।

वहीं  मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि कुछ उद्यमियों ने अपने संस्थानों को शुरू करने के एवज में सहायक पंकज कुमार को पैसे भी दिए हैं, जिसकी शिकायत सचिव से किए जाने के बाद सचिव ने जिले के उपायुक्त को दूरभाष पर पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया।

उधर उपायुक्त ए दोड्डे ने पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए एडीसी के सहायक पंकज कुमार को निलंबित कर दिया साथ ही एडीसी सुबोध कुमार पर रिश्वत लिए जाने के आरोप को सही पाया।

वही इस संबंध में जिले के उपायुक्त ने कार्मिक विभाग को पत्र लिखकर एडीसी पर विभागीय कार्यवाई करने के साथ बर्खास्त करने की अनुशंसा की है।

इधर इस पूरे मामले पर एडीसी सुबोध कुमार से बात किए जाने पर उन्होंने कहा कि मैं इस कार्रवाई से हैरान हूं। उन्होंने बताया कि इस तरह की कोई भी जानकारी उपायुक्त महोदय की ओर से नहीं दी गई है। ना ही किसी तरह की कोई विभागीय सूचना ही उन्हें मिला है।

हां उपायुक्त महोदय की ओर से मामूली शो कॉज जरूर मिला है, जिसकी रिपोर्ट तैयार कर आज सौंपना था। इसी बीच अखबारों के माध्यम से मुझे सूचना मिली। वही रिश्वत के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया है।

गौरतलब है कि एडीसी सुबोध कुमार पिछले कई सालों से कोल्हान परिक्षेत्र में ही पदस्थापित रहे हैं। इससे पूर्व वे जमशेदपुर में भी कई पदों पर रह चुके हैं। जहां अब तक उन पर किसी तरह का कोई आरोप नहीं लगा है। न केवल अधिकारियों बल्कि आम जनों से भी उनके संबंध काफी मधुर रहे हैं।

जहां आज भी दूसरे जिले में पदस्थापन होने के बाद जमशेदपुर के कई अधिकारियों और आम लोगों से उनका सीधा संवाद होता रहता है। और कई आयोजनों एवं कार्यक्रमों में वे शिरकत भी करते हैं। सुबोध कुमार बेहद ही मृदुभाषी और जबरदस्त आर्टिस्ट हैं।

कला उनके अंदर कूट-कूट कर भरी है। वह एक बेहतरीन चित्रकार और गायक भी हैं। उनकी बनाई पेंटिंग्स सरकारी कार्यालयों में आज भी लगाई जाती है। ऐसे में इतनी बड़ी कार्रवाई किसी को हजम नहीं हो रहा है।

उधर एडीसी पर कार्रवाई से जिले के  उद्यमी भी हतप्रभ है। इस संबंध में हमने कई उद्यमियों से बात कर जानने का प्रयास किया, कि आखिर क्या वाकई में उद्योगों को चालू किए जाने के एवज में रिश्वत की मांग नोडल अधिकारियों द्वारा की जा रही है। जिस पर कई उद्यमियों ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में वे स्वयं उद्योगों को खोलने के पक्ष में नहीं हैं।

ऐसे में घूस देकर उद्योग को खुलवाने का सवाल ही नहीं उठता। उद्यमियों ने एडीसी की कार्रवाई की खबर को दुर्भावना से ग्रसित कार्रवाई बताया। हालांकि भूमिका के सवाल पर उद्यमियों ने कहा यह प्रशासनिक मामला है, हम इसमें दखलंदाजी नहीं कर सकते।

बहरहाल वैश्विक महामारी कोरोना से जंग के बीच सरायकेला- खरसावां जिला में अधिकारियों के बीच जंग अलग ही पटकथा लिखने को तैयार है। हालांकि इस संबंध में उपायुक्त की ओर से कोई अधिसूचना या अध्यादेश जारी नहीं किया गया है।ऐसे में किसी खास मीडिया रिपोर्ट्स के दावों में कितनी सच्चाई है, ये तो आने वाले दिनों में ही पता चल सकेगा।

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