शर्मनाकः सांप काटे बालक को पुलिस ने घंटों रोका, सीतामढ़ी-शिवहर सीमा पर बालक ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ा

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समूचे देश में लागू लॉकडाउन का आशय क्या है? यह बिहार में पदस्थ भाजपा-जदयू की नीतीश सरकार के नुमाइंदे नहीं समझ रहे हैं। पुलिस की मुस्तैदी की सराहना की जा सकती है, लेकिन किसी बीमार की मौत की कीमत पर कदापि नहीं। दरअसल ऐसे पुलिस अफसरों को इस बात का ज्ञान ही नहीं है कि उन्हें लॉकडाउन में क्या करना है और क्या नहीं। वे बिल्कुल कॉकरोच बन एक ही डंडा से सबको हांक रहे हैं। शराबबंदी की तरह  लॉकडाउन में भी कमाई ढूंढ रहे हैं। किसी गरीब की जान उनके लिए कोई मायने नहीं रखते

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। बिहार के सीतामढ़ी-शिवहर सीमा पर शिवहर जिले के पूरनहीया थाना क्षेत्र के बराही गांव निवासी मजदूर दिनकर महतो का 10 वर्षीय बालक पंकज कुमार ईलाज के आभाव में तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। रीगा थाना पुलिस ने लाख मिन्नत के बाबजूद पंकज को ईलाज कराने के लिए आगे अस्पताल ले जाने से रोक दिया।

प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीण अनील कुमार बताते हैं कि उसके पड़ोस के बालक के मुंह से अचानक झाग निगलने लगा। आशंका है कि उसे किसी जहरीले सांप ने काटा होगा। यह मान ग्रामीण उन्हें स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ग्रामीण ले गए। जहां मौजूद चिकित्सकों ने तत्काल सीतामढ़ी अस्पताल ले जाने को कहा।

ट्वीटर के साथ फेसबुक पर भी बिहार पुलिस की इस मानवता पर हो रही थू-थू..

अनील आगे बताते हैं कि पुरनहिया थाना पुलिस ने सिघोरबा बार्डर तक मदद की, लेकिन वहां तैनात रीगा थाना के दारोगा ने एक न सुनी और ग्रामीणों को बालक पंकज को ईलाज कराने जाने से रोक दिया। जब वहां तैनात दारोगा से सीओ, बीडीओ, एसडीओ, एसडीपीओ का मोबाइल नबंर मांगा गया तो वह भी नहीं दिया गया।

प्रत्यक्षदर्शी सिसकते हुए बताते हैं कि सिघोरबा बार्डर पर तैनात पुलिस करीब 2 घंटे तक रोके रहा। लाख मिन्नत के बाबजूद वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुआ। फिर थक हार कर बच्चे को एक मोटरसाईकिल से गांव-जेवार के रास्ते किसी तरह लेकर सीतामढ़ी अस्पताल ले गए। तब तक वह मर चुका था।

इस संबंध में पुरनहिया थानाध्यक्ष ने एक्सपर्ट मीडिया न्यूज को बताया कि रीगा थाना पुलिस को ऐसा नहीं करनी चाहिए। पीड़ित बच्चे को अस्पताल ले जाने से रोकना गैरकानूनी है। यदि वहां की थाना पुलिस को हर किसी को रोकने के आदेश मिले भी होंगे तो उसे रीगा पुलिस-प्रशासन के वरीय अफसरों से संपर्क कर मानवीयता का तत्काल परिचय देनी चाहिए थी। पूरी घटना दुःखद है।

उधर, सिघोरबा बार्डर पर तैनात पुलिस पर आम आरोप है कि यहां पहुंच वाले लोगों के लिए कोई रोक नहीं है। पैसे लेकर जाने देती है। पीड़ित बालक के परिजन से कुछ हासिल होने वाला नहीं होगा, इसीलिए कानून का धौंस जमाया गया। रीगा थाना पुलिस ने लॉकडाउन को भी कमाई का जरिया बना लिया है।

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