एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। सोइल साइट फेसबुक पर वायरल एक हिन्दी चैनल की रिपोर्ट में बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की भाषा और कुतर्क किसी के भी दिमाग को भक कर देने वाली है।

पुलिस तंत्र की अपनी गरिमा होती है। लेकिन जब खुद राज्य पुलिस का मुखिया ही उसे तार-तार कर दे तो फिर आम आदमी पुलिस से किस मनोदशा की अपेक्षा रखेगा? यह तो सीधे बिहार के सुशासन बाबू यानि सीएम नीतीश कुमार ही स्पष्ट कर सकते हैं।

रिपोर्ट देखने से साफ स्पष्ट होता है कि उस चैनल के रिपोर्ट ने सुबह 4 बजे डीजीपी को बालू के अवैध कारोबार की जानकारी देनी चाही। इसी पर डीजीपी भड़क गए और रिपोर्टर के साथ सड़क छाप भाषा का ही प्रयोग न किए, बल्कि ऐसी धमकी दे डाली, जो पद और गोपनीयता की शपथ के कसौटी पर खुद अयोग्य साबित करते हैं।

रात अंधेरे अधिनस्थ पुलिस कार्यालयों में जाकर मीडिया की सुर्खियां बटोरने वाले डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की नजर में बालू माफियाओं का धंधा छोटा अपराध लगता है। इस खेल में कितने लोगों की जानें गई हैं, उंगली पर नहीं गिने जा सकते। लेकिन उल्टे रिपोर्टर की कुंडली खंगालने की चेतावनी देते हैं। उसे भद्दी-भद्दी गालियां देते हैं।

आईए आप भी सुनिए हिन्दी खबर न्यूज चैनल की वह वायरल वीडियो, जिसमें डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय की रिपोर्टर संग भद्दी बातचीत है, जो बिहार पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल उठाता है।

ऐसे डीजीपी को सेवा से तुरंत हटा देनी चाहिए। ताकि आम लोगों में यह भावना न पनपे कि माफिया-गुंडों के आगे पुलिस महकमा का अंतिम व्यक्ति भी उनकी नहीं सुनेगा। और यह जबावदेही सिर्फ बिहार के मुखिया नीतीश कुमार की है…

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