370 यू टर्न पर आरसीपी सिंह का भड़कना सिर्फ जदयू की पलटीमार पॉल्टिक्स

आर्टिकल 370 को लेकर पहले से ही विरोध जता रही सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जदयू अब पलटी मार चुकी है………..….”

पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क ब्यूरो)। जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के अधिकांश प्रावधानों को हटाए जाने के मुद्दे पर नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने लोकसभा और राज्यसभा में इसको लेकर  विरोध दर्ज कराया था।

लेकिन ये बिल पास होने और आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जदयू ने यू-टर्न ले लिया है। वहीं, जब पार्टी के नेता आरसीपी सिंह से आर्टिकल-370 पर यू-टर्न के मसले पर सवाल किया गया तो वे भड़क गए।

एक कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकारों ने आरसीपी सिंह ने पूछा कि आर्टिकल 370 पर पार्टी का क्या स्टैंड है, तो वे भड़क गए।

आरसीपी सिंह ने कहा, ‘एक बार नहीं 50 बार बोल चुका हूं इस पर, आर्टिकल 370 है क्या अब हिंदुस्तान में? जब आर्टिकल 370 है ही नहीं देश में, तो रो किस बात के लिए रहे हैं। राज्यसभा और लोकसभा में हमारी पार्टी ने स्टैंड बता दिया। संसद में बिल पेश हुआ, बहुमत से पास हो गया, तो समस्या कहा हैं, क्यों छाती पीट रहे हैं।

पत्रकारों ने तीन तलाक बिल पर पार्टी का स्टैंड पूछा तो वे फिर भड़क गए। जदयू नेता ने कहा, ‘जब इस देश में कोई कानून बन जाता है, तो संविधान के अनुच्छेद के 51ए के मुताबिक, कानून बन जाने के बाद सभी को इसका पालन करना पड़ता है।’

जदयू के यूटर्न लेने के मसले पर बार-बार सवाल पूछने पर जदयू नेता ने गुस्से में कहा, ‘विरोध किए हम लोग, वॉक-आउट कर गए, और क्या सुनना चाहते हैं आप लोग? पार्टी ने कोई यूटर्न नहीं लिया है, जब कानून पास हो जाता है तो सभी को उसका पालन करना पड़ता है।

संसद में तीन तलाक बिल और अब अनुच्छेद 370 के पास होने के बाद जदयू के द्वारा विरोध को लेकर सीएम नीतीश कुमार की किरकिरी हो रही थी।

इससे पहले तीन तलाक बिल और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पास होने के बाद राज्यसभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह  ने सफाई दी थी कि चूंकि अब बिल पास हो गया है और नया कानून बन गया हैं, लिहाजा पार्टी पूरी तरह केंद्र सरकार के पीछे है।

बता दें कि दोनों मुद्दों पर जदयू ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए बिल का विरोध किया था और सदन से वॉकआउट किया था।

हालांकि, आर्टिकल 370 हटने के बाद इस मुद्दे पर जदयू के सर्वोसर्वा एवं बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। पार्टी के सांसदों और प्रवक्ताओं की राय को पार्टी की राय बतायी जा रही है, लेकिन मतभेद साफ तौर पर झलक रहे हैं।

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