🌝बेवफा चली गई रोहिणी🌩, आसमान ताक रहे किसान🌈, सुखे की आशंका 🥀

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“खरीफ फसलों की तैयारी व बुआई के लिए रोहिणी नक्षत्र उपयुक्त माना जाता है।इस नक्षत्र में खासकर धान के बिचड़े लगाने पर धान की रोपनी समय पर होती है। फसलों का उत्पादन बेहतर होता है….”

नालंदा (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क)। खरीफ फसल के लिए कृषि कार्य शुरू होने का नक्षत्र माना जाने वाला रोहण नक्षत्र समाप्त हो गया, लेकिन किसानों को बारिश की एक बूंद भी नसीब नहीं हुई।

प्रखंड के किसान मौसम की इस बेरुखी से परेशान हैं। आसमान से बरस रहे आग के गोले और गिरते भूगर्भीय जल स्तर के कारण एक बार फिर अकाल की काली साया मंडराने लगा है।

रोहण नक्षत्र बीतने के बाद अब नग्विश्रा नक्षत्र भी 2 दिन में खत्म होने वाला है।लेकिन बारिश नहीं होने से अब तक कृषि कार्य आरंभ नहीं हो सका है। ऐसे में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी के कारण भूगर्भीय जल स्तर में लगातार गिरावट का दौर जारी है।

ऐसे में किसानों को बोरिंग के पानी से बीज डालने की हिम्मत नहीं हो रही है। वे हाथ पर हाथ धरे बैठे वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। गत वर्ष भी ऐसी ही स्थिति ऐसी थी और किसानों को भयंकर सूखे का सामना करना पड़ा था। इस बार भी मौसम की बेरुखी से किसानों को चिंता सता रही है।

खेतों में पड़ी दरार, सहमे हैं किसान: किसान दहशत में हैं। धान के बिचड़े के लिए खेत तैयार नहीं कर रहे हैं।खेतों में अभीतक दरार पड़े हैं।अगर समय पर धान की रोपाई नहीं हुयी तो कैसे होगी बिटिया की शादी और महाजन का कर्ज कैसे चुकता होगा, ये सवाल किसानों को परेशान कर रहे हैं।

किसान सूखे की संभावना से सहमे हुये हैं। मौसम का मिजाज देखकर किसानों को कुछ सूझ नहीं रहा कि वे क्या करें। आसमान से आग बरस रहा है। दूर-दूर तक बादलों का नामोनिशान नहीं है। जाहिर है कि किसान चिंतित होंगे ही।

लेकिन कृषि से जुड़े लोगों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी मानसून की यही स्थिति रहती है तो किसानों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो सकती है।

तालाब-पोखर सूखे, पानी को ले मनुष्य,पशु एवं पक्षी परेशानः मौसम की बेरुखी के कारण क्षेत्र में पेयजल का संकट इतना गहराता जा रहा है कि जल्द ही झमाझम बारिश नहीं हुई तो इलाके में हाहाकार मच जाएगा। बारिश नहीं होने से  तालाब, पोखरा व अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी की जगह धूल उड़ रही है।

बुधवार को तेज आंधी के साथ हल्की बारिश से लोगों को गर्मी से राहत तो मिली लेकिन उनकी समस्या जस की तस है। नगरनौसा इलाके में स्थिति ऐसी है कि जहां पहले नदी नाले, पोखर-तालाब में पानी से भरे होते थे वे पिछले कई साल से सूखे पड़े हैं। जिसके कारण गांव में भी पेयजल संकट बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है।

लगभग सभी चापाकल सूख चुके हैं। खेतों में गर्मी और पानी की कमी के कारण हरियाली समाप्त हो चुकी है। इस स्थिति में किसानों के सामने बहुत ही विकराल समस्या आ चुकी है। यदि खेती करने के लिए बोरिंग का सहारा लेते हैं तो पानी का स्तर नीचे चला जाता है और पीने के पानी की किल्लत हो जाती है।

अब  समस्या यह है कि किसान यदि खेती नहीं करेगा तो खाएगा क्या। और यदि खेती की तो पिएगा क्या। यही कारण है कि खेती का अनुकूल समय आ गया है। लेकिन,पानी की कमी के कारण खेती से इस बार किसान मुंह मोड़ रहे हैं। गांव के सभी पोखर तालाब सूखे पड़े है। 

लचर विद्युत व्यवस्था से परेशानीः मौसम की बेईमानी से प्रखंड में किसानों की मुसीबत बढ़ सकती है।प्रखंड में लचर विद्युत व्यवस्था और खस्ताहाल सिंचाई व्यवस्था मुसीबत में फंसे किसानों को और भी अधिक परेशान कर सकती है।

बुधवार के संध्या 10 मिनट के हुई बारिश ने बिजली के विभाग के तैयारियों के संबंध में किए जा रहे दावों की पोल खोल कर रख दी। प्री मानसून के दस्तक के साथ शुरू हुई बारिश के दौरान ही बिजली बंद हो गई। बिजली करीब 18 घण्टे से ज्यादा समय तक बंद हुई।

खरीफ फसल वैसे तो पूरी तरह बारिश पर आधारित होती है लेकिन कम बारिश होने की स्थिति में सिंचाई के लिए बिजली का महत्व बढ़ जाता है।

आसमान में टकटकी लगाए बैठे हैं किसानः  धान बुआई के महत्वपूर्ण समय रोहिणी नक्षत्र खत्म हो जाने के बाद नग्विश्रा नक्षत्र भी 15 दिन से ज्यादा गुजर जाने के बाद बारिश की बूंदें अब तक किसानों को तरसा ही रही हैं। कृषि कार्य शुरू करने के लिए मानसून की आस में प्रखंड क्षेत्र के किसान आसमान में टकटकी लगाए ही बैठे हैं।

किसान सतीश कुमार, रामशीष प्रसाद, रंजीत कुमार, रामाशीष प्रसाद, धीरेंद्र कुमार, अभिषेक भारती, राजीब कुमार सहित दर्जनों किसान ने बताया की रोहणी नक्षत्र से खरीफ़ फ़सल के लिए धान के बीज को लेकर खेत की तैयारी शुरुआत हो जाती है।

लेकिन रोहणी नक्षत्र बीत जाने के बाद नग्विश्रा नक्षत्र आधा बीतने के बाद भी बारिश नही होने से धान के बीज बोने के लिए खेत तैयार भी नही हो पा रहा है। जून के प्रथम सप्ताह तक मानसून पहले आ जाता था, लेक़िन इस बार अबतक मानसून नहीं आया है।

भूमिगत जल स्तर भी बहुत नीचे जा चुका है। पम्पसेट भूमिगत जल को नही निकाल पा रहा है जल निकालने के लिए 20 फ़िट गड्डा खोद पम्पसेट को गड्डा में डाल पानी निकालना पड़ रहा है। गर्मी से लोग बेहाल हो रहे है। वर्षा नहीं होने के बजह से तलाव,नदी,पाइन, पोखर सब सुख के वीरान पड़े है।

अगर कुछ दिन ऐसा ही हाल रहा तो धान का फसल को उपजाना सम्भव नहीं है। क्योंकि धान के फसल उपज करने में काफ़ी पानी की आवश्यकता होती हैं। लिहाजा अब किसानों को बारिश का बेसब्री से इंतजार में है।

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