सीएम साहब, आपके शिलान्यास-आवंटन के साढ़े 6 साल बाद भी नहीं बना कैफेटेरिया !

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“सरकार आये दिन पर्यटन स्थलों एवं तीर्थ स्थलों के सर्वांगिण विकास करने की ढोल पीट रही है। लेकिन जल मंदिर के पास सार्वजनिक शैचालय नहीं रहने के कारण सैलानी और तीर्थयात्री यत्र-तत्र मल- मूत्र त्यागने के लिए विवश हैं।“

नालंदा (राम विलास)। शिलान्यास और आवंटन के साढे छः साल बाद भी जैन तीर्थस्थल पावापुरी में कैफेटेरिया, पार्किग एवं जन सुविधाओं का निमार्ण कार्य शुरू नहीं किया गया है। यह शिलान्यास स्वंय मुख्यमंत्री नीतिश कुमार द्वारा 14 अप्रैल 2011 को किया गया था।

इस शिलान्यास समारोह में उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी कुमार चौवे, पथ निमार्ण मंत्री नंदकिशोर यादव, ग्रामीण विकास एंव संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार, सांसद कौषलेन्द्र कुमार, रामचंद्र प्रसाद सिंह के अलावे तत्कालीन पर्यटन मंत्री सुनील कुमार पिंटु , पूर्व खनन एंव भूतत्व मंत्री सत्यदेव नारायण आर्य और योजना मंत्री नरेंद्र नारायण यादव भी इस समारोह में शमिल  थे ।

यह शिलान्यास पर्यटन विभाग द्वारा कराया गया था। पर्यटन विकास निगम से इस कैफेटेरियर आदि का निर्माण होना है। लेकिन शिलान्यास के साढ़े छह साल बाद भी इस निर्माण कार्य के लिए स्थल का अधिग्रहण नहीं किया जा सका है।

शिलान्यास के लम्बे अर्से बाद भी निर्माण कार्य आरंभ नहीं होने से स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों में गहरी नाराजगी है। सरकार आये दिन पर्यटन स्थलों एवं तीर्थ स्थलों के सर्वांगिण विकास करने की ढोल पीट रही है।

लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी जैन तीर्थ सिद्ध क्षेत्र पावापुरी में एक अदद कैफेटेरिया, सार्वजनिक शौचालय और सैलानियों व तीर्थ यात्रियों के लिए पार्किंग स्थल का निमार्ण नहीं हो सका। फलस्वरूप सैलानी और तीर्थयात्रियों को चाय-कॉफी पीने के लिए पावापुरी में कोई उपयुक्त स्थल नहीं है।

इसी तरह जल मंदिर के पास सार्वजनिक शैचालय नहीं रहने के कारण सैलानी और तीर्थयात्री यत्र-तत्र मल- मूत्र त्यागने के लिए विवश हैं।  सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण खास कर महिलाओं और स्कूल-कॉलेज की छात्राओं को नित्य क्रिया में काफी फजिहत का सामना करना पड़ता है।

जैन तीर्थ स्थल पावापुरी में देष दुनिया के लाखों जैन तीर्थ यात्री आते हैं। सैलानियों और तीर्थयात्रियों के अलावे मुख्यमंत्री शैक्षणिक भ्रमण पर बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे यहां आते हैं और विष्व विख्यात जल मंदिर का दर्शन करते हैं।

यहां पार्किग स्थल नहीं रहने के कारण तीर्थ यात्रियों, सैलानियों और मुख्यमंत्री शैक्षणिक परिभ्रमण के लिए आये वाहनों को यत्र – तत्र सर्वत्र सड़क पर ही खड़ा किया जाता है, जिसके कारण आये दिन सड़क जाम होने की शिकायत होते रहती है।

पर्यटन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पावापुरी में कैफेटेरिया, पार्किंग और जन सुविधाएं निर्माण के लिए आवंटन है। लेकिन जमीन के अभाव में निर्माण कार्य नहीं आरंभ किया गया है। पावापुरी जैन सर्किट से जुडा है। इस सर्किट से भी पावापुरी का विकास किया जायेगा।

इस बाबत पर्यटन विभाग के अपर सचिव अशोक कुमार कहते हैं कि  पावापुरी में कैफेटेरिया, पार्किंग और शौचालय निर्माण के लिए धन का आवंटन किया जा चुका है। जिलाधिकारी नालंदा के द्वारा इन निर्माण कार्यों के लिए जमीन का अधिग्रहण होना है। जमीन की अनुपलब्धता के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। जैन सर्किट योजना से भी पावापुरी का निर्माण किया जायेगा।

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