सीएम के पर्यटन वाहन मित्र को राजगीर थाना प्रभारी ने यूं मजाक बना डाला

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“पर्यटन मित्र वाहन राजगीर थाना पुलिस की व्यक्तिगत उपभोग का जरिया बन गया है। पर्यटन केन्द्रों पर आगंतुकों के बीच कभी नजर नहीं आता। इस वाहन से दैनिक पुलिस पेट्रोलिंग हो रही है। इस पर पुलिस के जवान सवार होकर बैंकों की गश्ती, शराब छापामारी से लेकर साग-सब्जी खरीदने तक की मटरगश्ती करते फिर रहे हैं।”

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज।  बिहार के नालंदा जिले के विभिन्न पर्यटक स्थलों खासकर राजगीर प्रक्षेत्र का अपना अलग ही महत्व है। यहां रोज हजारों देसी-विदेशी पर्यटक भ्रमण को आते हैं। लेकिन पर्यटको के बीच बढ़ती असुरक्षा की भावना को कम करने के लिये  यहां पर्यटक मित्र वाहन की शुरुआत की गई। यह शुभारंभ सब राजगीर में कैबिनेट की बैठक के बाद सूबे के मुखिया सीएम नितीश कुमार ने अपने मंत्रियों, सचिवों, डीजीपी, आईजी आदि मौजूदगी में खुद हरी झंडी दिखाकर किया था।

आधुनिक तकनीक से लैश इस पर्यटन वाहन में बतौर मित्र समूह में चार कांस्टेबल और एक पुलिस पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति भी की गयी। इसकी मॉनिटरिंग डीएसपी (सुरक्षा) ज्योति प्रकाश को सौंपी गई थी।

तब यह भी बताया गया था कि इस वाहन में कर्मी अंग्रेजी व हिंदी भाषा में दक्ष होंगे और उन्हें बाद मे अन्य विदेशी भाषाओं के ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इस वाहन में ब्लैक कैट कमांडों सवार होंगे जो अत्याधुनिक संसाधन, वायरलेस सिस्टम व हथियार से लैस होंगे। इतना ही नहीं 100 नंबर डायल करने से यह सीधे पुलिस कंट्रोल रूम से जुड़ जायेगी जो आवश्यकता के अनुसार पर्यटक मित्र वाहन को सूचना देगी ताकि पर्यटकों को तत्काल मदद मिल सके। मेडिकल किट से भी यह लैस होगी।

तब यह भी कहा गया था कि प्रारंभिक दौर में पर्यटन वाहन राजगीर और नालंदा के महत्वपूर्ण स्थलों पर पेट्रोलिंग करेगा।

लेकिन आज जिस तरह की सूचनाएं सप्रमाण सामने आई है, उस आलोक में साफ कहा जा सकता है कि वह सब कुछ क्षणिक छलावा मात्र था। ऐसा इसलिये कि क्योंकि उस महात्वाकांक्षी पहल को राजगीर थाना प्रभारी ने मजाक बना कर रख दिया है।

फिलहाल यहां पर्यटन मित्र वाहन राजगीर थाना पुलिस की व्यक्तिगत उपभोग का जरिया बन गया है। पर्यटन केन्द्रों पर आगंतुकों के बीच कभी नजर नहीं आता। इस वाहन से दैनिक पुलिस पेट्रोलिंग हो रही है। इस पर पुलिस के जवान सवार होकर बैंकों की गश्ती, शराब छापामारी से लेकर साग-सब्जी खरीदने तक की मटरगश्ती करते फिर रहे हैं।

जानकार सूत्र बताते हैं कि अपराधिक गतिविधियों के लिये शुमार राजगीर के गिधकुट पर्वत की गश्ती से सिर्फ इस लिये हटा लिया गया कि वहां भारी पैमाने पर जो चढ़ावा-दान होता है, उसका बंदरबांट हो सके। इस बंदरबांट में राजगीर के अनेक कथित समाजसेवी, नेता, अफसर, गुंडे सब संलिप्त नजर आते हैं। कमोवेश यही हालात राजगीर के अन्य सभी पर्यटन केन्द्रों पर देखने को मिलती है।

हालांकि पर्यटक मित्र वाहन का संचालन नालंदा के विधि व्यवस्था डीएसपी ज्योति प्रकाश के क्षेत्राधिकार में आता है और उसे चुनौती देकर राजगीर के थाना प्रभारी इस तरह की मनमानी करना एक बड़ा सबाल उठाता है।

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