संदेह के घेरे में नालंदा MCMC कोषांग सचिव सह DPRO की कार्यशैली

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एक्सपर्ट मीडिया न्यूज। लोक सभा आम निर्वाचन 2019, नालंदा समाहरणालय के सूचना भवन का MCMC कोषांग आदर्श चुनाव आचार संहिता को लेकर काफी गंभीर है। कोषांग के सचिव ने आदर्श आचार संहिता कोषांग के नोडल पदाधिकारी को एक पत्र प्रेषित किया है। यह पत्र आज ही कार्यालीय पत्रांक-18 दिनांक-14.05.2019 को जारी की गई है।

बड़ा रोचक बात यह है कि इस पत्र को तुरंत शोसल मीडया पर ही जारी कर दिया गया है, जिसे एक दल विशेष के लोगों के द्वारा खूब वायरल किया जा रहा है, ताकि उसका चुनावी लाभ उठाया जा सके।

सदस्य सचिव MCMC कोषांग सह जिला जनसंपर्क पदाधिकारी द्वारा “हम प्रत्याशी के पक्ष में अवयस्यक बच्चों के माध्ययम से चुनाव प्रचार कराने से संबंधित मामले में कार्रवाई के संबंध में” विषयगत लिखा है कि विभिन्न शोसल मीडिया के माध्ययम से प्राप्त पोस्ट से यह मामला प्रकाश में आया है कि लोक सभा आम निर्वाचन 2019 के अवसर पर हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रत्याशी के पक्ष में अवयस्यक बच्चों के माध्यम से चुनाव प्रचार कराया जा रहा है। एतएव सुसंगत नियम के तहत कार्रवाई करते हुए MCMC कोषांग को भी अवगत कराया जाए।

इस पत्र के साथ प्रमाण के तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट के स्क्रीन शॉट की प्रिंटेड प्रति लगाई गई है।

हालांकि MCMC कोषांग की ऐसी त्वरित कार्रवाई जहां उसकी गंभीरता दर्शाती है, वहीं खुद अपने उक्त पत्र को सोशल मीडिया पर ही वायरल होने के लिए छोड़ देना अनेक सवाल भी खड़ा करते हैं। क्या MCMC कोषांग सचिव सह DPRO  कार्यालय की ओर से यह चिठ्ठी किसी प्रतिदवंदी प्रत्याशी को फायदा पहुंचाने के लिए वायरल करवाई गई। 

विभिन्न व्हाट्सएप्प ग्रुपों में कोषांग द्वारा प्रेषित चिठ्ठी सुबह 10.00 बजे के बाद ही आग की तरह फैल गई। लेकिन जब इस संबंध में एक्सपर्ट मीडिया न्यूज द्वारा आदर्श आचार संहिता कोषांग के नोडल पदाधिकारी सह जिला सहकारिता पदाधिकारी से बात की गई तो उनका कहना था कि उन्हें यह चिठ्ठी दोपहर करीब 1.00 बजे प्राप्त हुई है, जिस पर अभी गंभीरता से जांच पड़ताल होना है।

उधर इस संबंध में MCMC कोषांग सदस्य सचिव सह जिला सूचना जन संपर्क पदाधिकारी से संपर्क साधने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने अपना सरकारी मोबाइल नहीं उठाया।

जाहिर है कि MCMC कोषांग सदस्य सचिव कार्यालय से एक दल विशेष के हित में इस तरह की लापरवाही की गई, जो कि खुद में आचार संहिता का घोर उल्लघंन है।

ऐसी लापरवाही यह संकेत देती है कि यहां आचार संहिता का पालन करने-करवाने में प्रशासन की भूमिका संदिग्ध है। जैसा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं।

जबकि, आदर्श आचार संहिता लागू होने बीच प्रतिदंदी दल व अन्य दलों की ओर से भी इस तरह के काफी मामले सामने आए हैं। शासन-प्रशासन के कार्यक्रमों में भी चुनाव संहिता की खुलकर धज्जियां उड़ाई गई है। लेकिन जब बात सत्तारुढ़ या प्रभावशाली दल-प्रत्याशी की बात सामने आती है तो सबकी घिग्घी बंध जाती है।

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