शराब की यह खेप बनी चर्चा का विषय, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सबाल

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एक्सपर्ट मीडिया न्यूज।  वेशक बिहार सरकार के पूर्ण शराब बंदी लागू करने के बाद समूचे नालंदा जिले में शराब का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद शराब के धंधे में कोई मंदी नहीं आई है।

खबर है कि नालंदा थाना पुलिस ने शनिवार की देर रात गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर शराब के साथ तीन धंधेबाज को दबोचने में सफलता पाई। इस दौरान एक टाटा कम्पनी की पिकअप गाड़ी को जब्त किया, जिसमें भारी मात्रा में अवैध शराब लदे थे।

खबरों के मुताबिक बकौल नालन्दा थानाधयक्ष शशिरंजन, पुलिस को सूचना मिली कि कुछ धंधेबाज बिचाली लदे वाहन में छुपाकर शराब ले जा रहे है। तभी छापेमारी कर नीरपुर गांव के निकट से 48 कार्टून विदेशी शराब के साथ संजीत कुमार (ककड़िया मोड़, नूरसराय), संदीप कुमार (महादेवबीघा, नूरसराय) तथा सुधीर कुमार (नीरपुर) को दबोच कर जेल भेज दिया।

बकौल, थानाध्यक्ष, रात्रि गश्ती के दौरान नीरपुर गांव के कपटिया मोड़ पर वाहन चेकिग की जा रही थी, उसी दौरान गुप्त सूचना मिली कि एक टाटा सुपर पिकअप से शराब ले ढोई जा रही है। पुलिस को देख मैजिक गाड़ी लेकर भागने की कोशिश की गई। जिसका पीछा कर पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान भूसा लदा मैजिक वाहन से हरियाणा निर्मित 48 कार्टून 750 एमएल का 576 बोतल रॉयल चैलेंजर्स बरामद किया गया।

इधर, पुलिस के हवाले से इस तरह की स्थानीय अखबारों में आई खबरें समूचे क्षेत्र में चर्चा की विषय बन गई। नालंदा एवं उसके आसपास हो रही चर्चाओं के मुताबिक पुलिस ने शराब किसी अन्य स्थान से बरामद की और उसकी बरामदगी कहीं अन्यत्र दिखाई है। ऐसा एक स्थानीय प्रभावशाली सत्तारुढ़ नेता के ईशारे पर की गई है।

इन चर्चाओं को तब और बल मिला जब, माइक्रो ब्लॉगिंग शोसल साइट पर इस शराब बरामदगी से जुड़ी सूचनाएं दौड़ने लगी। अपने फेसबुक पेज पर राजद नेता जीतु यादव साफ लिखते हैं कि नालंदा बीइएड महाबोधि कॉलेज के पास बरामद शराब चुनाव के लिए मंत्री और जदयू उम्मीदवार के ईशारे पर इनके करीबी मुखिया के यहां आया था।

वहीं विगत विधानसभा चुनाव में कथित मंत्री के निकटतम प्रतिद्वंदी रहे भाजपा नेता लिखते हैं कि ग्रामीणों के बीच ऐसी चर्चा हो रही है कि नालंदा क्षेत्र में पकड़ी गई शराब स्थानीय राजनीति के बड़े हस्ती के ईशारे पर मंगाई गई थी। महाबोधी बीएड कॉलेज के निकट बरामद शराब कांड का उद्भेदन जिला पुलिस निष्पक्षता पूर्वक करे, जिससे नागरिकों का भरोसा बनी रहे।

ऐसे में सबाल उठना स्वभाविक है कि क्या पुलिस के राजनीतिक आका होते हैं और वे उन्हीं के ईशारे पर ऐसे कार्य करते हैं? जिनसे उनकी छवि आम जन में धुमिल होती है।  

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