शराबबंदी फेल, किम जोंग से कम नहीं हैं नीतीश

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एक्सपर्ट मीडिया न्यूज। बिहार में शराबबंदी के बाद भी शराब मिल रहे हैं, तभी तो लोग शराब पी रहे हैं। क्या सरकार ने जिले के थानेदारों को सस्पेंड किया?

सीएम नीतीश कुमार ने तो साफ कहा था पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद अगर किसी थाना क्षेत्र में शराब की बिक्री हो रही है तो संबंधित थानाध्यक्ष नपेंगे। उन पर सीधे सीधे कार्रवाई करते हुए दस वर्षों के लिए थानेदारी से हटा दिया जाएगा। वहीं, दोष सिद्ध होने पर सीधी बर्खास्तगी की कार्रवाई किए जाने की बात कही थी। उसका क्या हुआ?

शराब मिल रहा हैं। तभी तो लोग पी रहे हैं। शराब इस लिए लोग पी रहे हैं, क्यूंकि शराब का काला कारोबार गांव-गांव चल रहा हैं। पुलिस और सरकार पूरी तरह से शराब रोकने में नाकाम रही हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार अब तक पीने-बेचने के जुर्म में 3 लाख से उपर लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इसमें 95 फीसदी लोग गरीब एवं दबे कुचले वर्ग से आते हैं।

साधन सम्पन्न लोगों के सामने पुलिस-प्रशासन याचक की मुद्रा में होते हैं।

अब सोचिये अब तक एक लाख से ऊपर लोग जेल में होंगे और उनके जेल जाने से करीब पांच लाख लोगों की घर बर्बाद हो गई होगी, क्योंकि घर चलाने वाला ही जेल चला गया।

नशा के आदतन व्यक्ति को अगर चोरी छुपे शराब मिलेगा तो पिएगा ही। चाहे उसे जेल क्यों न भेज दिया जाए। क्या सरकार के पास क्षमता है कि शराब के कारोबार को ख़त्म कर सकें।

नहीं क्षमता हैं तो इतने कठिन कानून लाने की क्या जरुरत थी कि लाखों गरीब को जेल में ठुसते रहे उसके शराब पीने के लिए?

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने सही ही लिखते हैं कि “जिसके पास पैसा है वो तो शराबबंदी की चपेट में नहीं है। सरकार शराब बिके नहीं, पहुंचे नहीं यह सुनिश्चित करा दे, किसी ग़रीब को पांच साल की जेल भेजने का क्या तुक है।”

“कई दशक तक आप किसी को शराब पीने की छूट देते हैं। लाइसेंस देकर गांव गांव में शराब की दुकाने खुलवाते हैं। एक दिन आप ही उठते हैं और शराबबंदी का एलान कर एक लाख से अधिक लोगों को जेल में बंद कर देते हैं। क्या यह उचित और तर्कसंगत लगता है?”

सरकार के इन फैसलों की वजह से कई बार लगता हैं बिहार में भी कहीं किम जोंग जैसा तानाशाह सरकार तो नहीं हैं, जो कभी शराब बेचवाता हैं तो कभी बंद करता हैं। लेकिन उसका इफ़ेक्ट यह हो रहा है कि इस राज्य के लोग जेल में ठुंसे कम और पुलिस के हाथों निचोड़े अधिक जा रहे हैं।

हम खुश हैं शराबबंदी से। लेकिन शराबबंदी तो करवाइए। गरीब लोगों को ठुंसे जा रहे हैं। आप सिर्फ शराब कारोबारी को ठुंसिये। जेल भरो कार्यक्रम से बढ़िया हैं शराबबंदी पर ध्यान दीजिये और लोगों के बीच नशा छुड़ाने का उपाय करते रहिये।

नहीं तो शराबबंदी बेकार हैं। जितना घर बचेगा, उससे ज्यादा उखड़ जायेगा इस तरह की शराबबंदी से। नीतीश जी किम जोंग बन के रह जाएंगे।

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