लोकसभा के पांचवें चरण में क्षेत्रीय दलों की प्रतिष्ठा दांव पर

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पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क ब्यूरो)। बिहार के पांचवें चरण के लोकसभा चुनाव दंगल में छह मई को बिहार के पांच सीटों पर मतदान होना है। जिनमें क्षेत्रीय दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है।

इस चरण में सबसे बड़ी चुनौती बड़ी भूमिका निभाने की होगी। लोजपा, रालोसपा और वीआईपी जैसे छोटे दलों के साख का सवाल इस चरण में बना हुआ है। आने वाले समय में मतदाताओं के हाथ में होगा कि मतदाता इन छोटे दलों के उम्मीदवारों को गले लगाती है या फिर नकारती है। 

इन सीटों में सीतामढी, सारण, मुजफ्फरपुर ,मधुबनी और हाजीपुर शामिल है।पिछली बार ये सभी सीटें भाजपा और लोजपा के खाते में थी। पिछले चुनाव से अलग इस बार परिस्थितियाँ बदल गई है।

इन सभी पांचों सीटों पर छोटी पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला होना तय है। पिछले चुनाव में रालोसपा ने सीतामढी सीट जीती थी लेकिन वह इस बार एनडीए का हिस्सा नहीं है।

यहाँ से आरजेडी ने शरद यादव के करीबी अर्जुन राय को टिकट दिया है। सारण को छोड़कर जहाँ राजद और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला है। बाकी सीट पर क्षेत्रीय दल एक दूसरे को टक्कर दे रहे है।

सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी को तीन सीट मिली है।छह मई को  मधुबनी और मुजफ्फरपुर में वीआईपी का  मुकाबला है।

पांचवें चरण में हाजीपुर में लोजपा बनाम राजद का मुकाबला तय है।एनडीए में हाजीपुर लोजपा के खाते में है। यह कभी केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान का परंपरागत सीट हुआ करता था। लेकिन इस बार वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।

इस बार उनके भाई पशुपति कुमार पारस चुनाव मैदान में हैं। श्री पारस के पास अपने परिवार की ‘मुगल वंश’ सीट बचाने की जद्दोजहद है। यहाँ से राजद ने शिव चंदर राम को मैदान में उतारा है।

दूसरी तरफ सारण में राजद ने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव के श्वसुर और पूर्व सीएम दरोगा राय के बेटे चंद्रिका राय को टिकट दिया है। यहां से भाजपा से सांसद राजीव प्रताप रूढी मुकाबले में है।

यहां भी महागठबंधन के पास सीट निकालने की चुनौती है।सारण में राजद प्रत्याशी के दामाद तेज प्रताप ही उनके लिए विलेन बने हुए हैं। तेज प्रताप अपने श्वसुर चंद्रिका राय के खिलाफ ही चुनाव प्रचार कर महागठबंधन दलों की परेशानी बढ़ा रखी है।

भाजपा ने मुजफ्फरपुर से मौजूदा सांसद अजय निषाद में फिर आस्था रखते हुए उन्हें टिकट दिया है। वही वीआईपी ने राज भूषण चौधरी निषाद को टिकट दिया है। सन ऑफ मल्लाह मुकेश सहनी की प्रतिष्ठा दांव पर है।

मिथिला पेंटिग और मखाने के लिए मशहूर मधुबनी में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार दिख रहे है। भाजपा के लिए यहां सीट बचाना एक चुनौती भी है। वीआईपी ने यहाँ से बद्री कुमार पूर्वे को मैदान में उतारा है। जहाँ उनका मुकाबला बीजेपी के अशोक यादव से है।

अशोक यादव पांच बार सांसद रहे हुकुमदेव सिंह यादव के बेटे हैं। वही कांग्रेस के बागी और निलंबित नेता शकील अहमद दो बार यहां से सांसद रह चुके हैं। लेकिन इस बार मैदान में निर्दलीय ताल ठोक रहें हैं।

वहीं राजद के अली अशरफ फातमी भी बागी रूख अपनाएँ हुए हैं। ऐसे में मधुबनी सीट पर महागठबंधन को चुनौती मिलता दिख रहा है।

सोमवार को इन पांच लोकसभा चुनाव के सभी प्रत्याशियों के भाग्य ईवीएम में कैद हो जाएगा।

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