रिश्वत लेते रंगे हाथ निगरानी के हत्थे चढ़े हिलसा सीओ के बचाव में उतरे विधायक

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“पिछले सत्तरह वर्ष में हिलसा और करायपरशुराय इलाके से दस पदाधिकारी समेत सत्तरह सरकारी कर्मचारियों को सलाखों के पीछे जाना पड़ा। इसमें से एक कर्मचारी और एक पदाधिकारी को सजा पाकर बर्खास्त भी हो गए। शेष बचे अधिकारी और कर्मचारी अपने दम-खम पर अभी भी नौकरी कर रहे हैं।”

हिलसा (चन्द्रकांत)। पटना की निगरानी टीम बुधवार को हिलसा में जमीन के दाखिल-खारिज करने के लिए बीस हजार रुपये रिश्वत लेते सीओ सुबोध कुमार को दबोच लिया।

निगरानी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक नगरनौसा थानाक्षेत्र के खीरुबिगहा गांव निवासी राजाबाबू की पत्नी रिंकु देवी निगरानी में जाकर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत पत्र में जमीन के दाखिल-खारिज किए जाने के एवज में तीस हजार रुपये रिश्वत की मांग आरोपी सीओ सुबोध कुमार द्वारा दी गई।

सत्यापन के दौरान आरोपी सीओ सुबोध कुमार बीस हजार रुपये लेकर काम करने को तैयार हुए। ज्योंही परिवादनी रिंकु देवी द्वारा बीस हजार रुपये दिया गया, त्योंही आसपास मौजूद डीएसपी गोपाल पासवान के नेतृत्व में गठित धावादल के सदस्य आरोपी सीओ सुबोध कुमार को अपने कब्जे में ले लिया।

निगरानी टीम के हत्थे चढ़े सीओ सुबोध कुमार आवश्यक पूछताछ के बाद निगरानी के न्यायालय में उपस्थापित कराने की बात कही गई।

निगरानी के हत्थे चढ़ने वाले सुबोध हिलसा के तीसरे सीओ

निगरानी टीम के हत्थे चढ़ने वाले सुबोध कुमार हिलसा के तीसरे अंचलाधिकारी (सीओ) हैं। सबसे पहले वर्ष 2002 में दाखिल-खारिज के एवज में रिश्वत लेने के आरोप में हिलसा के सीओ नरेन्द्र कुमार को निगरानी की टीम ने दबोचा था।

तकरीबन चौदह वर्ष के लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2016 में दाखिल-खारिज के एवज में ही रिश्वत लेने के आरोप में हिलसा के सीओ राजवद्र्धन गुप्ता निगरानी टीम के हत्थे चढ़े थे।

इसके बाद गुरुवार को दाखिल-खारिज के एवज में ही रिश्वत मांगने के आरोप में सीओ सुबोध कुमार भी निगरानी के हत्थे चढ़ गए।

सीओ की गिरफ्तारी के बाद शहर में हो रही है तरह-तरह की चर्चा

रिश्वतखोरी के मामले में सीओ सुबोध कुमार की गिरफ्तारी के बाद लोगों के बीच यह चर्चा बना हुआ है कि निगरानी या सीबीआई का अगला निशाना कौन होगा?  

हालांकि सीओ की गिरफ्तारी के बाद लेन-देन करने वाले कर्मी और अधिकारी थोड़े सहमे जरुर हैं लेकिन कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब लेन-देन का तौर-तरीका जरुर बदल गया है।

हिलसा में जब-जब निगरानी या सीबीआई छापेमारी कर रिश्वतखोर को पकड़ती है तब-तब तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म होता है। रिश्वतखोर कर्मी और अधिकारी थोड़ा सहमते तो हैं ही साथ ही साथ लेन-देन की प्रक्रिया में भी बदलाव करते हैं।

लेकिन वक्त बीतने के साथ ही सब कुछ बदल जाता है और रिश्वतखोर फिर अपनी पुरानी राह पकड़ लेते हैं। जिसका सीधा लाभ निगरानी या सीबीआई की टीम उठाते हुए आसानी से शिकार कर चली जाती है।

रजिस्ट्रार की गिरफ्तारी कर निगरानी ने खोला था हिलसा में खाता

शहर तथा आसपास के इलाके में निगरानी को तब लोग जाना जब हिलसा से रजिस्ट्रार ददन राय अठारह हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार हुए थे। खचाखच भरी भीड़ के बीच निगरानी की टीम जब रजिस्ट्रार के पास दस्तक दी तो खलबली मच गयी थी।

उस समय रजिस्ट्रार के चहेतों के साथ-साथ सभी अधिसंख्य कातिब इधर-उधर हो गये थे। अपनी कुर्सी पर अड़े रजिस्ट्रार वैसे हर फार्मूले को अपनाए जिससे वे गिरफ्तारी से बच पाए। लेकिन कुछ भी काम नहीं आया और अंतोगत्वा निगरानी की टीम अपने मिशन में कामयाब रही।

इसके बाद तो मानो हिलसा को निगरानी के साथ-साथ सीबीआई भी अपना चारागाह बना लिया। साल दो साल के अंतर में कभी निगरानी तो कभी सीबीआई की टीम हिलसा आकर अपना शिकार करते रहा है।

निगरानी बदल रहा है अपना पैटर्न, एजेंट के जरिये रिश्वतखोर तक पहुंचने की कवायद

आने वाले दिनों में रिश्वतखोरों को दबोचने के लिए निगरानी की टीम एजेंट का सहरा ले तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

सूत्र बताते हैं छोटे-मोटे रिश्वतखोर कर्मचारी को पकड़ते-पकड़ते उब चुकी निगरानी टीम अब वैसे अधिकारियों को पकड़ने की फिराक में जुट है जो भ्रष्टाचार के गंगोत्री में खुलकर डुबकी लगा रहे हैं।

ऐसे अधिकारियों को दबोच कर निगरानी की टीम सरकार की नजर में अपनी साख को और मजबूत करना चाहती है। इसके लिए निगरानी की टीम नए पैटर्न पर काम करना शुरु कर दिया।

हालांकि इस पैटर्न पर इक्के-दुक्के भ्रष्टाचारी कार्रवाई की जद में आ भी चुके हैं लेकिन उतनी नहीं जितनी होनी चाहिए। आने वाले दिनों में भ्रष्टाचार के आंकठ में डूबे अधिकारियों का एजेंट ही निगरानी का पहला पड़ाव होगा।

इसी एजेंट के सहारे निगरानी की टीम न केवल उस अधिकारी तक पहुंचेगा बल्कि उसके उन सारे गुप्त सम्पत्तियों का पता लगाएगी जो अवैध कमाई से अर्जित की गयी है।

ऐसे अधिकारियों के खिलाफ रिश्वतखोरी के साथ-साथ आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के आरोप में भी शिकंजा कसा जाएगा।

कौन-कौन हो चुके हैं रिश्वतखोरी के आरोप में गिरफ्तार

घूसखोरी आरोप में अबतक हिलसा से अठ्ठारह लोग निगरानी और सीबीआई की चपेट में आ चुके हैं। निगरानी और सीबीआई के चपेट में आने वालों में दस पदाधिकारी, एक पंचायत प्रतिनिधि और सात कर्मचारी शामिल हैं।

ऐसे अधिकारी और कर्मचारियों में रजिस्ट्रार ददन राय, सीओ नरेन्द कुमार, थाना प्रभारी ठाकुर देवेन्द्र सिंह, टेलीफोन एसडीओ अशोक चौधरी, टेलीफोन मिस्त्री चंद्रकांत दास, सीआई हरखनंदन चौधरी, महकार पंचायत के तत्कालीन मुखिया और पंचायत सेवक, बैंक कर्मी अरुण कुमार, कर्मचारी केदार प्रसाद, कर्मचारी अरुण कुमार, कर्मचारी सुरेश प्रसाद, बीईओ वीरेन्द्र कुमार, रजिस्ट्रार रामप्रवेश चौहान, जमादार उमाशंकर द्विवेदी, सीओ राजवद्र्धन गुप्ता, जेई राज कुमार एवं सीओ सुबोध कुमार शामिल हैं।

सीओ की गिरफ्तारी पर भड़के कर्मचारी, बंद रखा सरकारी कार्यालय

सीओ सुबोध कुमार की गिरफ्तारी से भड़के कर्मचारी न केवल विरोध प्रदर्शन किया बल्कि अनुमंडल कार्यालय के समक्ष धराना भी दिया। निगरानी टीम के चले जाने के बाद एकजुट हुए कर्मचारी और अधिकारी कार्यालय बंद कर अनुमंडल कार्यालय पहुंच गए।

सभी कर्मचारी एवं पदाधिकारी अनुमंडल कार्यालय के मुख्य गेट के निकट धरना पर बैठकर नारेबाजी करने लगे। कर्मियों की मानें तो सीओ न तो घूस की बात की और न ही किसी से घूस ली। अचानक एक महिला घुसी और टेबुल पर रुपये फेंक दी।

सीओ सुबोध कुमार विरोध किए तो निगरानी टीम द्वारा गॉलीग्लौज और मारपीट की गई। कर्मियों ने सीओ सुबोध कुमार को एक ईमानदार पदाधिकारी बताते हुए निगरानी की कार्रवाई को जबरिया कार्रवाई बताया। कर्मियों ने कहा कि ऐसी स्थिति में काम करना बहुत ही कठिन है। इससे कर्मियों का मनोबल टूटता है।

इस संबध में कर्मियों का एक दल पहले एसडीओ सृष्टि राज सिन्हा से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा और बाद में जिला पदाधिकारी से मिलने बिहारशरीफ चले गए।

पंचायत प्रतिनिधियों ने भी जताया विरोध

हिलसा प्रखंड से जुड़े पंचायत प्रतिनिधियों ने भी निगरानी टीम की कार्रवाई पर विरोध जताया। इस संबंध में प्रखंड प्रमुख रमेश चन्द्र चौधरी द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि सीओ सुबोध कुमार एक ईमानदार छवि के अधिकारी थे।

एक साजिश के तहत सीओ को निगरानी टीम से पकड़वाया गया। सीओ सुबोध कुमार को सम्मान रिहा करने और साजिशकर्ता को गिरफ्तार करने की मांग की गई। साथ ही मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी।

सीओ के खिलाफ निगरानी की कार्रवाई उचित नहीं- विधायक

विधायक अत्रीमुनी उर्फ शक्ति सिंह यादव ने हिलसा के सीओ सुबोध कुमार के खिलाफ निगरानी की कार्रवाई को गलत बताया।

विधायक ने दूरभाष पर बताया कि सीओ एक ईमानदार छवि के व्यक्ति थे। निगरानी की टीम जिस तरह से गिरफ्तारी की वह बिल्कुल ही गलत प्रक्रिया थी। सीओ को एक साजिश के तहत फंसाया गया है। सीओ को आरोप से मुक्त किया जाए।

विधायक ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो ईमानदार और बेहतर छवि वाले पदाधिकारियों का मनोबल टूटेगा और सरकार से लोगों का भरोसा उठ जाएगा।

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