रांची की रौनक छोड़ने को तैयार नहीं हैं भगवान बिरसा जैविक उद्दान के अफसर

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bbb parkसर्वत्र लूट और मनमानी का आलम

रांची (मुकेश भारतीय)। भगवान बिरसा जैविक उद्दान में सर्वत्र लूट-खसोंट का आलम है। यहां कहीं कोई देखने सुनने वाला नहीं है। लोग निरीह पशु-पक्षियों के भोजन तक हड़प रहे हैं। प्रायः जीव कुपोषण के शिकार हैं। उनके रख-रखाव और उद्दान की सुंदरता के नाम पर लाखों का वारा न्यारा हो रहा है लेकिन, पहले की तुलना में हर तरफ मायूसी ही नजर आती है।

बहरहाल, यहां काफी लंबे अरसे से अधिकारियों की फौज तैनात है। परन्तु सब अपनी मर्जी के मालिक हैं। इन सबों के सपरिवार रहने के लिए उद्दान परिसर में ही भव्य बंगलों की भरमार है। इन बंगलों का निर्माण किसी भी जैविक उद्दान में वनकर्मियों के परिसर में ही चौबीसों घंटे आपातकालीन हालत में रहने के लिए किया गया था।  फिर भी वे सब महंगी गाड़ियों से रांची से ही आकर अपनी दिनचर्या पूरी करते हैं। वह भी ये साहब लोगों में कौन और कब आएगा, कहना बड़ा मुश्किल है।

इन सबों की दलील है कि उनके रहने के लिए जो बंगले बने है, वे किसी काम के नहीं हैं। बिल्कुल जर्जर हो गये हैं। हालांकि उन आवासों को देख कर ऐसा कुछ लगता नहीं है। सारे आवास अभी अच्छे हालत में हैं। हल्के-फुल्के रिपेयरिंग के साथ ही चकाचक हो सकते हैं। लेकिन कोई इसमें रहने को तैयार हों तब न।

आश्चर्य की बात है कि उद्दान परिसर में अफसरों के लिए जब से करोड़ों की लागत से सभी प्रकार के सुविधाओं से लैस बंगले बनाये गये हैं, तब से उसमें कोई एक दिन रहा ही नहीं। जबकि उनकी खुबसूरती और देखभाल के लिए माली से चौकीदार अब तक तैनात हैं। उनके रख-रखाव के नाम पर लाखों की बंदरबांट होती रही है।

फिलहाल, इस जैविक उद्दान में निदेशक आईएफएस अशोक कुमार, फॉरेस्ट कान्जरवेटर आरएन ठाकुर, पशु चिकित्सक डॉ. अजय कुमार, रेंज फॉरेस्ट अफसर जिवराज भरतवार, जेपी भगत, अरुण कुमार, बीट अफसर मो. एजाजुल हक, फॉरेस्ट गार्ड जफर अंसारी और अशोक कुमार सिन्हा कार्यरत हैं। इनमें कोई भी कर्मी उद्दान परिसर के आवासों में नहीं रहते। इनमें प्रायः लोग राजधानी रांची से अपनी-अपनी मंहगी फोरव्हीलर वाहन से कार्यालय पहुंचते हैं। वह भी तब, जब उनकी मर्जी होती है या फिर उद्दान में कोई ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो जाती है और उनका आना मजबूरी हो जाती है। इस उद्दान में आए दिन पशु-पक्षियों की मौतें होती रहती है। इसका सबसे बड़ा कारण नियुक्त पशु चिकित्सक का यहां सुसमय उपलब्ध नहीं रहना ही है। पशु पक्षियों की यहां अब तक हुईं मौतों के आकड़ें रोंगटे खड़े कर देते हैं।

अब देखना है कि विभागीय व्यवस्था में भगवान बिरसा जैविक उद्दान के ऐसे धनाठ्य अफसरों की लूट और मनमानी की सुध लेने वाला कोई है या नहीं। या फिर यहां अफसरों की लूट और मनमानी का आलम यू हीं बदस्तुर जारी रहता है।

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