मीसा के साथ इस बार कांटे की टक्कर में फंसे रामकृपाल

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पटना (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। बिहार में इस बार के लोकसभा चुनाव में सातवें और अंतिम चरण में पाटलिपुत्र सीट पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की पुत्री मीसा भारती और भारतीय जनता पार्टी उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री रामकृपाल यादव के बीच कांटे की टक्कर है। पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पटना जिले में है।

वर्ष 2008 तक पटना में सिर्फ एक लोकसभा सीट हुआ करती थी लेकिन परिसीमन के बाद यहां दो सीटें हो गईं। एक पाटलिपुत्र (शहर के प्राचीन नाम पर आधारित) और दूसरी सीट पटना साहिब। बिहार की प्राचीन राजधानी पाटलिपुत्र अपने उदय के समय से ही सियासी उठा-पटक का केंद्र रहा है।

पटना के पुराने नाम से मशहूर पाटलिपुत्र में कई राजवंशों के बीच सियासी लड़ाइयां हुईं और पाटलिपुत्र कई राजनीतिक बदलाव का गवाह बना रहा । लोकसभा चुनाव 2014 में पाटलिपुत्र लोकसभा सीट ने जिस राजनीतिक घमासान की वजह से पूरे देश का ध्यान खींचा था, इस बार भी ऐसा प्रतीत हो रहा है कि साख और पगड़ी की लड़ाई में फिर पाटलिपुत्र बिहार की राजनीति का कहीं केंद्र न बन जाए।

वर्ष 2009 में पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर पहली बार चुनाव हुए। पाटलिपुत्र के पहले चुनावी अखाड़े में एक ओर जहां राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव थे, वहीं दूसरी ओर थे जनता दल यूनाइटेड (जदयू) नेता रंजन प्रसाद यादव। पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर हुए पहले मुकाबले में ही बड़ा उलटफेर हो गया और जदयू के रंजन प्रसाद यादव ने लालू प्रसाद को पटखनी देकर सबको हैरान कर दिया।

रंजन प्रसाद यादव ने लालू प्रसाद यादव को करीब 23 हजार से ज्यादा वोटों से हराया और लालू प्रसाद यादव के कद पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया। वर्ष 2014 के आम चुनाव में जिस तरह से पाटलिपुत्र सीट पर अपनों के बीच सियासी घमासान देखने को मिला, इस बार भी वही जोड़ी सियासी अखाड़े में आमने सामने है। बिहार की हॉट सीटों में से एक पाटलिपुत्र पर सबकी नजर है।

यहां राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव की साख दांव पर है। यहां से उनकी बेटी मीसा भारती एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं, जिनका सामना मौजूदा भाजपा सांसद रामकृपाल यादव से है। कभी लालू प्रसाद यादव के ‘हनुमान’ 

माने जाने वाले राम कृपाल यादव ने भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ राजद सुप्रीमो की बेटी मीसा भारती को पटखनी दी थी।

लोकसभा चुनाव 2014 से पहले पाटलिपुत्र सीट पर राम कृपाल यादव का नाम राजद की ओर से तय माना जा रहा था, लेकिन ऐन वक्त लालू प्रसाद यादव ने राम कृपाल यादव को टिकट न देकर अपनी बेटी मीसा भारती को टिकट दे दिया। रामकृपाल यादव लालू प्रसाद यादव के इस फैसले से नाराज हुए।

उन्होंने इस फैसले के विरोध किया और बागी तेवर अपनाया और भाजपा ने मौके का फायदा उठाकर उन्हें टिकट दे दिया। चुनाव से पहले ऐसा माना जा रहा था कि राम कृपाल यादव भाजपा में जाकर और पाटलिपुत्र से लालू यादव की बेटी के खिलाफ चुनाव लड़कर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं, लेकिन उन्होंने मीसा भारती को हराकर सबको चौंका दिया।

श्री रामकृपाल यादव ने श्रीमती मीसा भारती को 40 हजार 322 मतो के अंतर से पराजित किया था। जदयू प्रत्याशी रंजन प्रसाद यादव तीसरे नंबर पर रहे। रामकृपाल यादव का वर्ष 2014 में बगावत कर भाजपा में शामिल होना किसी वरदान से कम नहीं रहा और नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में भी उन्हें जगह मिल गईं ।

पाटलिपुत्रा संसदीय सीट पर राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की पुत्री एवं राज्यसभा सांसद मीसा भारती एक बार फिर किस्मत आजमा रही हैं वहीं लोकसभा सांसद एवं भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव उन्हें चुनौती देने के लिए डटे हुये हैं।

लोकसभा सांसद राम कृपाल यादव और राज्यसभा सासंद मीसा भारती के बीच इस बार भी टक्कर काफी दिलचस्प मानी जा रही है। पाटलिपुत्र सीट का चुनाव एक सीट भर की बात नहीं है बल्कि इसे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की प्रतिष्ठा से जोड़कर भी देखा जा रहा है। इस बार के चुनाव में भाजपा और राजद दोनो दलों के प्रत्याशी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।

मीसा भारती ,लालू यादव के मुस्लिम-यादव (एमवाई) समीकरण के बल पर चुनाव में जीत हासिल करना चाहती हैं। वहीं, भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव विकास और मोदी के नाम के बल पर चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर मीसा भारती के सामने अपने पिता लालू प्रसाद यादव की प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती है, तो वहीं भाजपा प्रत्याशी राम कृपाल यादव के सामने इस क्षेत्र से दूसरी बार जीत दर्ज करने की चुनौती है

चारा घोटाले में सजायाफ्ता लालू प्रसाद इस बार चुनावी प्रचार अभियान में अनुपस्थित हैं। पिछली बार बेटी के लिए उन्होंने खूब प्रचार किया था, बावजूद इसके मोदी लहर में रामकृपाल की ही नैया पार लगी थी।इस बार तो लालू अपनी बेटी के लिए प्रचार भी नहीं कर पा रहे हैं। मां राबड़ी देवी और भाई तेजस्वी यादव ने ही मीसा के प्रचार का जिम्मा संभाल रखा है।

कहा जा रहा है कि पाटलिपुत्र से बेटी मीसा भारती की जीत के लिए लालू यादव ने आरा में भाकपा माले का समर्थन किया है। भाकपा माले ने भी पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर राजद प्रत्याशी मीसा भारती को समर्थन देने का एलान किया है। पाटलिपुत्र सीट पर पिछले चुनाव में भाकपा माले को जितने वोट मिले थे, उससे कम वोट से मीसा भारती चुनाव हारी थीं। वर्ष 2014 में भाजपा प्रत्याशी रामकृपाल यादव ने जीत दर्ज की थी।

तब दूसरे स्थान पर रहीं राजद उम्मीदवार मीसा भारती करीब 40,000 वोट से हारी थीं। उससे ज्यादा करीब 51,000 वोट माले प्रत्याशी रामेश्वर प्रसाद को मिले थे। एक तरह से देखा जाए तो राजद अपने इसी सियासी दांव की बदौलत मीसा की नैया पार कराने की जुगत में है। हालांकि भाजपा सांसद रामकृपाल ने भी पूरी ताकत झोंक दी है।

पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा सीटें हैं। यादव और भूमिहार बहुल पाटलिपुत्र लोकसभा सीट के अंतर्गत दानापुर, मनेर फुलवारी (सुरक्षित), मसौढ़ी (सुरक्षित) पालीगंज और विक्रम विधानसभा क्षेत्र आते हैं। दानापुर से आशा देवी (भाजपा) ,मनेर से भाई वीरेंद्र (राजद) ,फुलवारी (सु) से जदयू के नेता श्याम रजक विधायक हैं जो कभी लालू यादव के खास हुआ करते थे।

मसौढ़ी विधानसभा सीट पर फिलहाल राजद का कब्जा है। यहां से रेखा देवी विधायक हैं। पालीगंज सीट भी राजद के हिस्से में है और जयवर्धन यादव विधायक हैं। बिक्रम विधानसभा सीट कांग्रेस के सिद्धार्थ विधायक हैं। पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र बिहार का यह बेहद महत्‍वपूर्ण इलाका है। गंगा नदी के किनारे बसे इस शहर को लगभग 2000 वर्ष पूर्व पाटलिपुत्र के नाम से जाना जाता था।

सम्राट अजातशत्रु के उत्तराधिकारी उदयिन ने अपनी राजधानी को राजगृह से पाटलिपुत्र स्थानांतरित किया और बाद में चन्द्रगुप्त मौर्य ने यहां साम्राज्य स्थापित कर अपनी राजधानी बनाई। पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र में विकास की बात करें तो कई सुदूर गांवों, खासकर दियारा के इलाकों में बिजली आपूर्ति बहाल हुई।

पटना में पाइपलाइन गैस आपूर्ति की शुरुआत दानापुर-नौबतपुर इलाके से ही हुई। दो नए सीएनजी स्टेशन खुले। आठ लेन की दानापुर-खगौल सड़क का निर्माण कार्य शुरू। बिहटा में ईएसआई अस्पताल का शिलान्यास। एम्स, पटना में इमरजेंसी सेवा और ट्रामा सेंटर की शुरुआत। पटना-औरंगाबाद नेशनल हाई-वे का निर्माण। दानापुर, पालीगंज, बिक्रम में लिंक सड़कों का निर्माण हुआ। बेरोजगारी, बढ़ता अपराध, बिहटा-औरंगाबाद रेलखंड का निर्माण, गंगा पर स्थायी पुल, और सिंचाई की समस्या यहां के प्रमुख मुद्दे हैं।

सतरहवें आम चुनाव (2019) में पाटलिपुत्र संसदीय सीट से कुल 25 उम्मीदवार किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें भाजपा, राजद, बहुजन समाज पार्टी (बसपा), शिवसेना और सात निर्दलीय समेत 25 उम्मीदवार शामिल हैं। इस लोकसभा क्षेत्र में करीब 19 लाख 09 हजार मतदाता हैं। इनमें करीब नौ लाख 99 हजार पुरुष और नौ लाख 10 हजार महिला शामिल हैं जो सातवे और अंतिम चरण में 19 मई को होने वाले मतदान में 25 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला कर देंगे।   

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