‘भाजपा भगाओ’ महारैली में उमड़ा जनसमुद्र, दांव पर लालू और उनकी राजनीतिक साख

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पटना/जयप्रकाश/एक्सपर्ट मीडिया न्यूज डेस्क। 21 साल बाद एक बार फिर पटना का गांधी मैदान लालू प्रसाद यादव द्वारा आयोजित एक और महारैली का गवाह बनने जा रहा है ।रविवार को पटना के गांधी मैदान में आयोजित “भाजपा भगाओ,देश बचाओ” महारैली में उम्मीद से ज्यादा अप्रत्याशित भीड़ उमड़ रही है।

राज्य के 19 बाढ़ प्रभावित जिलों के बाबजूद राजद समर्थकों की अपार भीड़ पटना पहुँच रही है । लगभग चार लाख समर्थक रैली पहुँच चुके हैं । पटना और आसपास के इलाकों में जनसैलाब दिख रहा है ।इस महारैली में युवाओं की सबसे ज्यादा भीड़ देखी जा रही है।

वही इस रैली में शामिल होने के लिए जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, बिहार प्रभारी सीपी जोशी,प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, के साथ झारखंड के कई दिग्गज नेता शामिल हो रहे हैं ।

राजद की यह रैली गठबंधन टूटने के पहले ही तय हो चुकी थी।गठबंधन के द एंड के बाद लालू प्रसाद लगातार इस रैली को लेकर सरकार के निशाने पर रहे ।उसके बाद राज्य के आधे से ज्यादा जिले बाढ़ की त्रासदी झेल रहे है।रैली की टाइमिंग को लेकर भाजपा और जदयू कई हमले कर चुका है ।

भाजपा जदयू इस रैली को पहले से ही फ्लाॅप बता रही थी। लेकिन जो लोग लालूप्रसाद को करीब से जानते हैं । वो रैली की सफलता के पहले से ही दावे करते रहे हैं । और यही उनका अंदाज रहा है । रैली में भीड़ जुटाने के नुस्खे कोई उनसे सीखें ।महारैली में शनिवार से ही लोक गीत, संगीत और नृत्य तथा बहुरूपिये रंग रूप का अंदाज छाया रहा है ।

लालू प्रसाद यादव को जब-जब लगा है कि उनका राजनीतिक कैरियर खतरे में है तब- तब उन्होंने रैली के माध्यम से अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाते आ रहे हैं ।

वर्ष 1996 जब लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाला का आरोप लगा तब वे पहली बार जनता के सामने आए थे। यही पटना का गांधी मैदान उनकी “गरीब महारैला” का गवाह बना था । उन्होंने इस रैली के माध्यम से विपक्ष को मुँह तोड़ जबाब दिया था । तब से उन्हें गरीबों का नेता कहा जाने लगा । उनकी हर रैली अपने आप में ऐतिहासिक होती है।उनकी हर रैली रिकॉर्ड तोड़ने वाली होती है।हर बार अपने शक्ति प्रदर्शन में वे सफल रहे हैं ।

रविवार को भी रैली में उमड़े जन सैलाब से लालू प्रसाद को अपनी शक्ति का एहसास दिख रहा होगा कि इन सब घटनाओं के बाद भी जनता में उनकी साख है । लालू प्रसाद यादव के परिवार के लिए खासकर उभरते तेजस्वी के लिए यह भीड़ एक आशा का संचार लेकर आई है कि आने वाले समय में उनके लिए एक लिटमस टेस्ट है । 2019 का लोकसभा और इसके बाद बिधानसभा का चुनाव की रणनीति यही महारैली तय करेंगी ।

फिलहाल पटना में महारैली को लेकर जिला प्रशासन काफी मुश्तैद है । गांधी मैदान से लेकर शहर के सभी संवेदनशील क्षेत्र, प्रमुख चौक- चौराहे चप्पे-चप्पे पर पुलिस जवान तैनात रहेंगे। 55 सौ पुलिसकर्मी और पदाधिकारी डटे हुए हैं।

साथ ही दूसरे जिलों से 15 डीएसपी रैंक के अधिकारियों को सुरक्षा की कमान सौंपी गई है। जेपी सेतु, कोईलवर से लेकर गांधी सेतु पर टै्रफिक सिस्टम न बिगड़े इसके लिए ट्रैफिक के डीएसपी और डेढ़ हजार पुलिसकर्मी नजर रखेंगे।

हर पुलिस अधिकारी को गांधी मैदान के अंदर से लेकर बाहर सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। शनिवार शाम से ही गांधी मैदान के अंदर और इससे जुडऩे वाले सभी मार्ग पर पुलिस बल तैनात कर दिए गए। इनकम टैक्स गोलंबर, बोली रोड, हड़ताली मोड़, बोरिंग रोड चौराहा, फ्रेजर रोड, डाकबंगला, कोतवाली से बुद्ध मार्ग होते हुए गांधी मैदान पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। जगह-जगह बेरिकेडिंग भी की गई है।

रैली में जुटने वाली भीड़ पर नजर रखने के लिए गांधी मैदान में पुलिस ने 45 सीसीटी कैमरा लगाए हैं। साथ ही शहर के अन्य स्थान पर पहले से लगे कुल 124 सीसीटी कैमरा से पुलिस नजर रखेगी। इसके लिए दो कंट्रोल रूम बने है। यहां छह पुलिस अफसर तैनात किए गए हैं । इसके अलावा बम निरोधक और श्वान दस्ता को भी जगह जगह तैनात कर दिया गया है ।

पटना के गांधी के सभी वाच टावरो पर भी भीड़ का हुजुम देखा जा सकता है । रैली समाप्त होने तक ट्रैफिक की नई व्यवस्था की गई है। रैली को लेकर नेताओं, कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है ।

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