मनरेगा राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किए गए नालंदा के डीएम-डीडीसी

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पटना (INR)। जिस पल का इंतज़ार था, वो आ ही गया। नालंदा ने पांच साल बाद फिर इतिहास रच दिया। जब मनरेगा राष्ट्रीय अवार्ड के लिए नालंदा का नाम पुकारा गया।

पूरे गर्व के भाव के साथ डीएम डॉ. त्यागराजन व इस मेहनत व सफलता के सूत्रधार डीडीसी कुंदन कुमार मंच पर गए। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र तोमर व केंद्रीय राज्य मंत्री राम कृपाल यादव ने दोनों को सम्मानित किया।

पुरुस्कार ग्रहण करने के बाद ही सबसे पहला प्रतिक्रिया डीडीसी कुंदन कुमार का आया, जिन्होंने यह अवार्ड जिले व अपनी पूरी टीम को डेडिकेट किया।

उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गौरव का पल है और उनके लिए इससे ज्यादा खुशी की बात और क्या होगी कि डीएम डॉ. त्यागराजन सर आज मेरे साथ इस अवार्ड में है। उनके मार्गदर्शन में जिला और तरक्की करेगा। यह उनका ही विश्वास था कि नालंदा मनरेगा में एक नई इबारत लिखेगी और हमारी टीम ने रात दिन मेहनत कर सपने को साकार किया।

डीएम डॉ. त्यागराजन ने इस ऐतिहासिक पल की फोटो को शेयर किया। उनके चेहरे की खुशी बता रही थी कि डीडीसी व उनकी टीम पर उन्हें कितना गर्व महसूस हो रहा होगा और वो भी वैसे समय में जब उन्होंने कुछ दिन पहले ही बिजली के क्षेत्र में काम कर पीएम के हाथों से अवार्ड ले चुके है।

दिल्ली के विज्ञान भवन में आज नालंदा की गूंज सभी के कानों में सुनाई दी।केंद्रीय मंत्री ने भी खुशी जाहिर की।पूरे सूबे में नालंदा ही राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित हो पाया था। मनरेगा के तहत जिले में जलसंचय के कामों की गूंज अब पूरे देश में सुनाई देने लगी है।

अवार्ड समारोह में जाने से पहले डीडीसी ने बताया था कि शुरू में वे जिले के जिस इलाके में जाते थे, वहां किसान पानी के लिए परेशान दिखते थे। बरसात के बाद लोग नदियों व नहरों में छोटे-छोटे बांध बनाकर पानी रोकने की कोशिश करते थे।

इतना ही नहीं कोई बांध को नुकसान न पहुंचाये इसके लिए किसान रातभर जाग उसकी रखवाली करते थे। बावजूद उनकी फसलें मारी जाती थीं। किसानों की इन्हीं परेशानियों को देख जलसंचय मॉडल के विकास करने की सोंच उनके मन में हुई।

शुरुआत में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन सभी का सहयोग मिला तो रास्ते खुद ब खुद बनते चले गये। आज नालंदा जलसंचय मॉडल का पूरा देश कायल हो गया है।

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