मगही पान किसानों पर फिर गिरी आंधी-ओलावृष्टि की गाज

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नालंदा (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। जिले के इस्लामपुर प्रखंड एवं आस पास के इलाकों मे बुधवार की सुबह आंधी और ओलावृष्टि की गाज ने मगही पान किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है।

बताया जाता है कि इस प्रखंड के अर्जुन सेरथुआ, मदुद, बौरीडीह, बौरीसराय, डौरा, इमादपुर, कोचरा, मदरागंज समेत एक दर्जन गांव के लोगों द्वारा वर्षों पूर्व से मगही पान का उपजाने का सिलसिला चला आ रहा है।

यही वजह है कि यहां के मगही पान बिहार, लखनउ, पंजाब, बनारस, गया आदि  के अलावे छोटे बड़े शहरो में मशहुर है और लखनउ के नबाव पहले यहां से पान मंगवाकर सेवन करते थे।

लेकिन प्राकृतिक की दंश के सामने कई पान किसान इस धंधे को छोडकर बाहर पलायन कर गये। और शेष बचे-खुचे किसान इस पुस्तैनी धंधा में लगे हैं।

इस बार की आंधी ओलावृष्टि से किसान हाल से बेहाल हो गये हैं। वौरीडीह और अर्जुन सेरथुआ गांव में पान का वरेजा गिरता देख किसानो की बेचैनी बढ़ गइ है।

पीड़ितों का जायजा लेने मगही पान कृषक कल्याण संस्थान के अध्यक्ष लक्ष्मीचंद चौरसिया, अशोक चौरसिया, अपने सहयोगियों के साथ पहुंचे और वरेजा गिरने से पान फसल की बर्बादी देख परेशान हो गये।

उन्होने कहा कि लगभग एक करोड़ रुपया का पान फसल नुकसान हुआ है, क्योकि यह पान उचे दामों पर बनारस में बिकता है।

उन्होंने बताया कि बनारस में इस प्रकार की पान की पता का 106 ढोली का 45 से 65 हजार रुपया मिलता है, लेकिन यह वेशकीमती पान नुकसान होने से किसानों को परेशानी बढ़ गई है, कैसे इन पीड़ितों को राहत मिलेगा, कहना मुश्किल है।

उन्होंने राज्य सरकार से पान कृषकों को उचित मुआवजा देने का मांग किया है,ताकि लोगो को राहत मिल सके।

किसान मदन चौरसिया, विवेका चौरसिया, दयानंद चौरसिया, अनील चौरसिया, नौनाथ चौरसीआ आदि ने बताया कि आंधी और ओलावृष्टि ने इस कमरतोड़ महंगाई में किसानों की कमर तोड़कर रख दिया है। इस नुकसान से महाजन का कर्ज अदा, बेटी की शादी, परिवारों का भरण पोषण कैसे होगा, यह चिंता सताने लगी है।

यदि सरकार द्वारा मुआवजा नहीं दिया गया। तब हमलोग इस धंधा को छोड़कर रोजी रोजगार के लिए बाहर पलायन कर जाएंगे। क्योंकि इस आपदा इस प्रकार से झकझोर कर रख दिया है कि जीना मुश्किल हो जाएगा।

 

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