भाजपा से निष्कासित लोग ही दे रहे पार्टी सदस्यता अभियान को बल

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हालत यह है कि अब ये लोग प्रेस रिलीज भी जारी करने की हिम्मत नहीं जुटा रहे कि कार्यकर्ताओं को क्या कहें…………………?

एक्सपर्ट मीडिया न्यूज नेटवर्क। आज कल विश्व की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा का सदस्यता अभियान जोर शोर से चल रहा है। हो भी क्यों नहीं। संविधान में संशोधनों के साथ राष्ट्रहित में एक से बढ़कर एक फैसले लिये जा रहे है।

लेकिन इसके उलट नालंदा भाजपा का एक अलग ही संविधान है। तभी तो जिन लोगों का पार्टी से  निष्कासन हुआ, उनके भरोसे ही सदस्यता अभियान की नैया खेवी जा रही है। शायद किसी तरह यहां अभियान की लुटिया न डूबे।

नालन्दा भाजपा के जिलाध्यक्ष प्रो रामसागर सिंह द्वारा लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद आनन-फानन में बिना पार्टी संविधान का अनुपालन किए नालंदा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया सहित पार्टी के कुल 7 लोगो को प्रेस रिलीज जारी कर पार्टी से निकाल दिया था।

शायद नालंदा जिलाध्यक्ष को संगठन के संविधान की ज़रा भी जानकारी नहीं थी। न जाने किस मंशा से बिना प्रदेश स्तरीय सलाह के निष्कासन की प्रेस रिलीज जारी कर दी।

वहीं इधर पार्टी ने विधानसभा में अकेले चुनाव लड़ने की ताकत आज़माइश के लिये बतौर उन्हीं निष्कासित लोगों को विशेष सदस्यता प्रभारी बनाकर क्षेत्र मजबूत करने की जवाबदेही दे दी है।

शुरुआती में तो जिलाध्यक्ष से लेकर जिला के पार्टी पदाधिकारी इन नेताओं से दूरी बनाते दिखे, लेकिन जैसे-जैसे सदस्य्ता अभियान की गति बढ़ाने का दबाब पड़ा। सभी पार्टी संविधान विशेषज्ञ सरेंडर करते नज़र आये और फिर मंच साझा करना भी शुरू कर दिए।

फिलहाल पार्टी सूत्रों की माने तो जिलाध्यक्ष के खिलाफ पार्टी के अंदर एक मजबूत विपक्ष तैयार हो चुका है। जो संगठन से वर्तमान जिलाध्यक्ष को हटाने की माँग करेगा।

उधर समान पार्टी विचारों से सम्बंध रखने वाले विभिन्न संगठन भी जिलाध्यक्ष के खिलाफ मुखर होने लगे हैं।

उनका मानना है कि उन्हें विधानसभा की तैयारी में सभी वर्ग के कार्यकर्ताओं को जोड़ने वाला व्यक्ति चाहिए, न कि तोड़ने वाला।

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