बिहार में फर्जी शिक्षकों की बहाली जारी, सीएम का गृह जिला नालंदा अव्वल

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“एक तरफ बिहार के नियोजित शिक्षक ‘समान काम के बदले समान वेतन’ की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं। दूसरी तरफ राज्य सरकार के स्कूलों में फर्जी शिक्षक की बहाली रूकती नही दिख रही है। राज्य के कई जिलों में आज भी प्राधिकार की आड़ में शिक्षकों की बहाली हो रही है।”

बिहारशरीफ (एक्सपर्ट मीडिया न्यूज)। फर्जी शिक्षकों के होड़ में सीएम नीतीश कुमार का गृह जिला भी पीछे नही है। अगर नालंदा में सही ढंग से फर्जी शिक्षकों की जांच की जाए तो बड़ी संख्या में फर्जी शिक्षकों की पोल खुल सकती है।

नालंदा के कई प्रखंडों में तो सताधारी दल के सफेदपोश के रिश्तेदार और चहेते भी फर्जी शिक्षक बनें हुए है। इसमें चंडी प्रखंड भी शामिल है। यहां बड़े पैमाने पर शिक्षक नियोजन में फर्जीबाडे का खेल शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रहा है।

शिक्षक बहाली का ताजा उदाहरण सीएम के गृह प्रखंड हरनौत का है। जहाँ  नियोजन अपीलीय प्राधिकार की आड़ में पिछले 20 दिन से प्राथमिक विधालय उखड़ा में दो शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे हैं। लेकिन इसकी जानकारी शिक्षा विभाग को भी नही है।

स्कूल के हेडमास्टर प्रमोद कुमार की मानें तो 26 फरवरी को नवीन कुमार और विनोद जमादार दोनों नियुक्ति पत्र लेकर आया था। जिससे स्कूल में योगदान दे दिया गया। उनकी गलती यही है कि उन्होंने उनके नियोजन की सूचना बीईओ को नही दी।

जब हरनौत बीईओ रेणू देवी को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने स्कूल जाकर मामले की जांच की जो सही पाया गया। बीईओ ने हेडमास्टर को फटकराते हुए दोनों शिक्षकों पर कार्रवाई करने की बात कही है।

सिर्फ हरनौत ही नही चंडी प्रखंड में भी 43 शिक्षक अपीलीय प्राधिकार की आड़ में विभिन्न स्कूलों में आज भी जमे हुए हैं। चंडी प्रखंड में पंचायत स्तर से लेकर बीईओ कार्यालय के सांठगांठ से शिक्षक नियोजन का खेल आज भी चल रहा है।

चंडी प्रखंड में कथित दलाल चार लाख से पांच लाख तक में सारा सेटिग कर देते हैं ।वही थरथरी प्रखंड में आज भी आओ शिक्षक बनें का खेल जारी है।

वही नालंदा, सिलाव, राजगीर, बिंद, अस्थावां, नगरनौसा, रहूई, हिलसा, इस्लामपुर, एकंगरसराय सहित कई प्रखंडो में फर्जी शिक्षकों की भरमार है।

पिछले साल नूरसराय डायट में 60 से ज्यादा ऐसे शिक्षकों का खुलासा हुआ था जो टीईटी प्रमाण पत्र में हेराफेरी कर पास हो गए थें और ट्रेनिंग भी ले रहे थे।

चंडी और थरथरी में अगर सही से टीईटी प्रमाण पत्रों की जांच हो तो कई ऐसे शिक्षकों की पोल खुल सकती है जो एक ही टीईटी प्रमाण पत्र पर कई शिक्षक बने हुए हैं।

लेकिन सवाल वहीं कि आखिर फर्जी नियोजन की जांच करें तो कौन ? आज भी जिले के कई दर्जन पंचायतों में शिक्षक नियोजन के फोल्डर तक गायब है। निगरानी जांच के लिए प्रखंडो से शिक्षकों के फोल्डर की मांग होती है लेकिन मामला कुछ दिन बाद ठंडे बस्ते में समा जाता है।

नालंदा में हर चौक -चौराहे पर फर्जी शिक्षकों की ही चर्चा होती है। इससे न सिर्फ सरकारी राशि का चूना नही लग रहा है, बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था में विभागीय लापरवाही और पैसे का खेल चल रहा है। इसमें सभी की संलिप्तता जगजाहिर है। ऐसे में बिल्ली के गले में घंटी बांधे तो कौन?

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